मिडटर्म में हार के बाद ट्रंप पर महाभियोग का सवाल, सीनेट में 67 वोट की शर्त
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमेरिकी मध्यावधी चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लिया है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग की चर्चा फिर तेज है।
अमेरिका के मध्यावधी चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत के लिए जरूरी 218 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है। इस हार से ट्रंप के बाकी कार्यकाल और राजनीतिक समीकरणों पर साया पड़ गया है।
चुनाव से पहले ट्रंप ने पार्टी के साथियों को आगाह किया था कि अगर मध्यावधी चुनाव में उनकी हार हुई तो डेमोक्रेट्स महाभियोग का हथियार चलाकर उन्हें पद से हटाने की कोशिश करेंगे। अब वही सवाल फिर खड़ा हो गया है कि क्या ट्रंप सचमुच अपनी कुर्सी गंवा देंगे।
अमेरिकी कांग्रेस में दो सदन हैं, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स। अमेरिकी संविधान के मुताबिक किसी भी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का हक सिर्फ हाउस को है। चुनाव से पहले इस सदन में रिपब्लिकन पार्टी के पास 218-214 का मामूली बहुमत था। नतीजों के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और सत्ता डेमोक्रेट्स के हाथ में आ गई है।
हाउस में बहुमत मिलने से डेमोक्रेटिक पार्टी को ट्रंप प्रशासन, उसके नीतिगत फैसलों और अधिकारियों की गहराई से जांच करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। हाउस की ओवरसाइट कमेटी के सबसे सीनियर डेमोक्रेटिक सदस्य रॉबर्ट गार्सिया ने सोशल मीडिया पर ट्रंप प्रशासन को सीधी चेतावनी दी और लिखा, "अपने वकीलों को तैयार रखिए।" डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि महंगाई रोकने के साथ कार्यकारी शाखा को जवाबदेह ठहराना उनका मुख्य लक्ष्य होगा। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन को सख्त जांच और समन का सामना करना पड़ सकता है।
हाउस में बहुमत के चलते डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव आसानी से पास करा सकते हैं। लेकिन सिर्फ प्रस्ताव पास होने से राष्ट्रपति पद से नहीं हटते। संविधान के मुताबिक असली मुकदमा सीनेट में चलता है। राष्ट्रपति को दोषी ठहराकर हटाने के लिए सीनेट में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, यानी 67 सीनेटरों का समर्थन। मौजूदा चुनावी आंकड़ों के मुताबिक सीनेट के सारे डेमोक्रेटिक सदस्य ट्रंप के खिलाफ वोट दें, तब भी 67 का आंकड़ा पूरा नहीं होता। इसलिए हाउस से प्रस्ताव पास हो भी जाए, तो सीनेट की मंजूरी के बिना ट्रंप को हटाना डेमोक्रेट्स के लिए लगभग नामुमकिन है।
ट्रंप अमेरिकी इतिहास के पहले राष्ट्रपति हैं जिन्हें अपने पहले कार्यकाल में दो बार महाभियोग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। पहली बार दिसंबर 2019 में हाउस ने सत्ता के दुरुपयोग और संसद की जांच में अड़चन डालने के दो आरोपों पर उनके खिलाफ महाभियोग पास किया था। उन पर यूक्रेन के राष्ट्रपति पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की जांच के लिए दबाव डालने का आरोप था। फरवरी 2020 में सीनेट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
इसके बाद जनवरी 2021 में 6 जनवरी को कैपिटल हिल में हुई हिंसा के मामले में बगावत भड़काने के आरोप पर उन पर दूसरी बार महाभियोग चला। इस बार 10 रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट दिया था और 57 सीनेटरों ने उन्हें दोषी ठहराने के हक में मतदान किया। फिर भी दो-तिहाई यानी 67 का आंकड़ा नहीं छुआ जा सका और सीनेट ने उन्हें एक बार फिर बरी कर दिया।
इस हार के बाद ट्रंप को राष्ट्रपति पद से फौरन हटाना मुमकिन नहीं है, लेकिन उनके बाकी दो साल के कार्यकाल में सरकार चलाना काफी मुश्किल होगा। हाउस पर कब्जे के बाद डेमोक्रेट्स ट्रंप सरकार की हर नीति पर बारीक नजर रखेंगे। बजट पास कराने से लेकर नए कानून बनाने तक, हर मोड़ पर प्रशासन को अड़चनों का सामना करना पड़ेगा। डेमोक्रेट्स ट्रंप के निजी और प्रशासनिक फैसलों की गहरी जांच भी करेंगे। सीनेट के गणित की वजह से ट्रंप की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित है, मगर उनकी राजनीतिक मुश्किलें बढ़ना तय है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।