हेब्रॉन से लौटी इस्रायली सेना, 10 दिन की घेराबंदी खत्म, फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों का कंट्रोल
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हेब्रॉन के गवर्नर खालेद दुदिन के मुताबिक इस्रायली सेना पूरे शहर से हट गई है। महापौर यूसुफ अल-जबारी ने नुकसान का ब्योरा दिया।
वेस्ट बैंक से एक बड़ी खबर आई है। 10 दिन से ज्यादा चली सख्त सैन्य घेराबंदी और छापेमारी के बाद इस्रायली सेना (IDF) हेब्रॉन शहर से वापस लौट गई है।
हेब्रॉन के गवर्नर खालेद दुदिन ने आधिकारिक जानकारी में बताया कि इस्रायली सेना पूरे शहर से हट गई है और अब इस इलाके का पूरा कंट्रोल फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों के पास है। घेराबंदी की वजह से अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए सैकड़ों फिलिस्तीनी परिवारों को अब घर लौटने की इजाजत दे दी गई है।
जानकारी के मुताबिक 23 अक्टूबर को हेब्रॉन शहर के पास एक भीषण हमला हुआ था। इसमें इस्रायल डिफेन्स फोर्सेस (IDF) के दो सैनिक मारे गए थे। इसके बाद इस्रायली सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया और सैन्य कार्रवाई के नाम पर 10 दिन तक शहर की सड़कें बंद रखीं।
स्थानीय नगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक इस 10 दिन की कार्रवाई का सीधा असर 3,300 से ज्यादा फिलिस्तीनी नागरिकों पर पड़ा। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगह भागना पड़ा। इस दौरान कई घर तबाह हो गए और स्थानीय कारोबार पूरी तरह ठप रहे।
हेब्रॉन के महापौर यूसुफ अल-जबारी ने घेराबंदी से हुए भारी नुकसान का पूरा ब्योरा दिया। उनके मुताबिक इन 10 दिनों में शहर को रोज 12 मिलियन शेकेल का आर्थिक नुकसान हुआ, यानी करीब 3.8 मिलियन डॉलर से ज्यादा।
महापौर के बताए ब्योरे में सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को 1.9 मिलियन डॉलर (19 लाख डॉलर) से ज्यादा का नुकसान हुआ है। सेना की कार्रवाई से स्वास्थ्य व्यवस्था और पर्यावरण को करीब 1,60,000 डॉलर की चोट पहुंची है। इस्रायली दल ने 15 घर और दूसरी अहम इमारतें गिरा दीं, जबकि 327 कारोबार और दुकानें जबरन बंद करा दी गईं।
अल-जबारी ने कहा कि सबसे गंभीर असर स्थानीय छात्रों पर पड़ा है। लगातार कार्रवाई और पाबंदियों की वजह से करीब 80,000 विद्यार्थी लगातार 10 दिन स्कूल नहीं जा सके, जिससे उनकी पढ़ाई में बड़ा गैप आ गया।
पूरे फिलिस्तीन की अर्थव्यवस्था में अकेले हेब्रॉन शहर का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत माना जाता है। महापौर ने गंभीर आरोप लगाया कि हेब्रॉन औद्योगिक और कारोबारी केंद्र है, इसलिए इस शहर को 10 दिन रोके रखना एक तरह से सामूहिक सजा देने जैसा था।
उधर इस्रायल की अंदरूनी राजनीति में भी बड़ी हलचल है। हाल ही में हुए चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। सत्ताधारी गठबंधन को 53 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि विपक्ष ने 67 सीटें जीती हैं।
विपक्ष की इन 67 सीटों में जायोनिस्ट पार्टियों की 48 और अरब गैर-जायोनिस्ट पार्टियों की 19 सीटें शामिल हैं। विपक्षी गठबंधन में आपस में उलटी सोच वाली पार्टियां साथ हैं, इसलिए सरकार बनाने में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। नवनिर्वाचित क्नेसेट (इस्रायली संसद) का आधिकारिक शपथ समारोह 10 नवंबर को होगा। उसके बाद इस्रायल की नई राजनीतिक दिशा की तस्वीर साफ होगी।
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