शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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04:43 IST

मालखेड तलाव में सिर्फ 81.23 फीसदी पानी, चांदूर रेल्वे के रब्बी किसान सिंचाई को लेकर परेशान

कम बारिश से खरीफ में नुकसान झेल चुके किसानों को अब गेहूं और चने की बुआई से पहले पानी की चिंता है।

मालखेड तलाव में सिर्फ 81.23 फीसदी पानी, चांदूर रेल्वे के रब्बी किसान सिंचाई को लेकर परेशान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

इस साल बारिश के मिजाज ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कम बारिश की वजह से खरीफ सीजन की फसलों को नुकसान हुआ और अब किसानों के सामने सवाल है कि रब्बी की फसलें कैसे बचाई जाएं। गेहूं और चने की बुआई का सीजन पास आ रहा है, ऐसे में चांदूर रेल्वे शहर और आसपास के इलाके के किसान जिस मालखेड तालाब पर निर्भर हैं, उसमें इस बार सिर्फ 81.23 फीसदी जलभंडार है। इसलिए रब्बी की फसलों के लिए सिंचाई का पानी मिलेगा या नहीं, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।

मालखेड तालाब से हर साल रब्बी सीजन में चांदूर भाग क्रमांक एक, मांजरखेड, बासलापूर, धानोरा म्हाळी, शिवणी और आसपास के खेतों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। यह पानी तालाब से छोटी वितरिकाओं के जरिए छोड़ा जाता है। लेकिन अगर तालाब पूरी क्षमता से नहीं भरा हो, तो उपलब्ध जलभंडार के हिसाब से दो या तीन वितरिकाओं से ही सिंचाई की व्यवस्था की जाती है। इस बार सीमित पानी की वजह से सिंचाई की योजना और मुश्किल होने वाली है।

शहर के पीने के पानी के लिए जरूरी भंडार रखने के बाद खेती के लिए कितना पानी बचेगा, कितनी वितरिकाएं चालू होंगी और कितने इलाके को इसका फायदा मिलेगा, इस बारे में अभी कुछ साफ नहीं है। खरीफ के नुकसान और बढ़ती लागत से किसान पहले ही आर्थिक तंगी में हैं। अब वे रब्बी की बुआई पर खर्च करने से पहले पानी की पक्की गारंटी चाहते हैं। किसानों को डर है कि बुआई, बीज और खाद पर पैसा लगाने के बाद सिंचाई का पानी नहीं मिला, तो आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।

एक तरफ शहर की पीने के पानी की जरूरत है, तो दूसरी तरफ रब्बी की फसलों के लिए सिंचाई की मांग। प्रशासन को इस दोहरी चुनौती से निपटना होगा। खरीफ में नुकसान झेल चुके किसानों की उम्मीदें अब रब्बी की फसलों पर टिकी हैं। अगर सिंचाई के पानी को लेकर अनिश्चितता बनी रही, तो बुआई के रकबे और संभावित पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों की नजर जलसंपदा विभाग के आने वाले फैसले पर है।

सिंचाई विभाग के उपविभागीय अधिकारी विनय मुन्ने ने बताया कि 88 रथी फसलों के लिए मालखेड तालाब से पानी उपलब्ध कराने की योजना चल रही है। उनके मुताबिक जलभंडार कम होने से किसानों की मांग मिलने के बाद ही पानी छोड़ने की योजना बन सकेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही जल उपयोगकर्ता संस्थाओं के अध्यक्षों की बैठक लेकर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। साथ ही सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए किसानों से कहा गया है कि वे कम पानी में होने वाली फसलें लें।

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