अमरावती मंडी में सोयाबीन की आवक तेज, भाव 6,551 रुपये तक पहुंचा
अमरावती बाजार में नई सोयाबीन की आवक 1 से 13 अक्टूबर के बीच शून्य से बढ़कर हजारों बोरों तक पहुंच गई, जबकि भाव में उतार-चढ़ाव रहा।
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नापिकी के संकट से आर्थिक तंगी झेल रहे किसानों की सोयाबीन की अमरावती बाजार में बड़े पैमाने पर आवक शुरू हो गई है। 1 अक्टूबर को सोयाबीन की आवक शून्य थी, लेकिन 9 अक्टूबर को यह 9 हजार 33 बोरों पर पहुंच गई। इसके बाद 12 अक्टूबर को 15 हजार 757 बोरों की आवक दर्ज की गई। 13 अक्टूबर को आवक कुछ कम होकर 12 हजार 24 बोरों पर आ गई। इस तरह 1 से 13 अक्टूबर के बीच सोयाबीन की आवक में हुई बढ़ोतरी और बाजारभाव का उतार-चढ़ाव ध्यान खींचने वाला रहा।
सोमवार को बाजार में सभी कृषि उपज की कुल आवक 17 हजार 335 बोरे थी, जिनमें से 15 हजार 757 बोरे सोयाबीन के थे। मंगलवार को सभी कृषि उपज की कुल आवक 13 हजार 326 बोरे रही, जबकि सोयाबीन की आवक 12 हजार 24 बोरे दर्ज हुई। इससे साफ है कि बाजार में नई सोयाबीन का बड़ा हिस्सा है।
भाव की बात करें तो 1 अक्टूबर को नई सोयाबीन का भाव प्रति क्विंटल 5 हजार 750 से 6 हजार 200 रुपये था। शुक्रवार को यह 6 हजार 300 से 6 हजार 800 रुपये तक पहुंच गया। इस तुलना में न्यूनतम भाव 550 रुपये और अधिकतम भाव 600 रुपये बढ़ा। लेकिन सोमवार को न्यूनतम भाव 6 हजार 100 रुपये और अधिकतम भाव 6 हजार 503 रुपये रहा। मंगलवार को न्यूनतम भाव 6 हजार 100 रुपये बना रहा, जबकि अधिकतम भाव 6 हजार 551 रुपये दर्ज किया गया। यानी 9 अक्टूबर के अधिकतम भाव के मुकाबले 13 अक्टूबर का अधिकतम भाव 249 रुपये कम था।
सोयाबीन के अलावा दूसरी कृषि उपज के भाव में भी उतार-चढ़ाव दर्ज हुआ। गेहूं की मिल क्वालिटी की सबसे ज्यादा आवक 1 अक्टूबर को 209 बोरे थी। उस दिन गेहूं को प्रति क्विंटल 2 हजार 600 से 2 हजार 700 रुपये भाव मिला। 3 अक्टूबर को अधिकतम भाव 2 हजार 750 रुपये पर पहुंचा, जबकि 9 अक्टूबर को आवक 89 बोरों पर आ गई।
देसी चने की सबसे ज्यादा आवक 6 अक्टूबर को 748 बोरे हुई। उस दिन प्रति क्विंटल 6 हजार 800 से 7 हजार 400 रुपये भाव मिला। 7 अक्टूबर को अधिकतम भाव 7 हजार 451 रुपये पर पहुंचा। शुक्रवार को चने की आवक 358 बोरों पर आ गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अरहर का अधिकतम भाव प्रति क्विंटल 10 हजार 701 रुपये दर्ज किया गया।
भाव में उतार-चढ़ाव होने से किसानों के लिए कृषि उपज बेचने का फैसला करना मुश्किल हो जाता है। किसान इस उम्मीद में बाजार पर नजर रखे हुए हैं कि सोयाबीन को अच्छा भाव मिलेगा। आवक बढ़ने के बावजूद दर टिके रहने चाहिए। किसानों की मांग है कि सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद की असरदार व्यवस्था करे और किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े, इसके लिए ठोस कदम उठाए। आवक का बढ़ता सिलसिला और दरों का उतार-चढ़ाव किसानों को असल में कितना फायदा देगा, यह आगे के बाजारभाव पर निर्भर करेगा।