मालेगाव के डोंगराळे में साढ़े चार साल की बच्ची की हत्या के दोषी विजय खैरनार को फांसी की सज़ा
मालेगाव की अपर जिला व सत्र अदालत ने डोंगराळे के मामले में विजय खैरनार को फांसी की सज़ा सुनाई।
मालेगाव तालुका के डोंगराळे गांव में साढ़े चार साल की बच्ची के साथ यौन अत्याचार और उसकी हत्या के मामले में अदालत का फैसला आ गया है। 16 अक्टूबर को मालेगाव की अपर जिला व सत्र अदालत ने 21 साल के विजय खैरनार को फांसी की सज़ा सुनाई। यह फैसला घटना के करीब दस महीने बाद आया है।
मामला 16 नवंबर 2025 का है। आरोप था कि विजय खैरनार ने साढ़े चार साल की बच्ची पर यौन अत्याचार किया और उसका गला दबाकर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। इस घटना से पूरे राज्य में हलचल मच गई थी। फैसले से पहले सबकी नज़र इसी पर थी कि अदालत उम्रकैद सुनाती है या फांसी।
जिला व अपर सत्र अदालत के जज के.जी. पालदेवार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह घटना दुर्लभ से भी दुर्लभ है। अदालत ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये देने का आदेश भी दिया है। यह सुनवाई मालेगाव की अपर जिला व सत्र अदालत में पोक्सो की फास्ट ट्रैक अदालत में हुई।
फैसले के वक्त आरोपी विजय खैरनार और उसके वकील को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अदालत में पेश किया गया। अदालत परिसर में पीड़ित परिवार के लोग, मंत्री दादा भुसे और कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
पीड़ित पक्ष की तरफ से विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम ने पैरवी की। उनके साथ एड. स्नेहा शर्मा ठाकरे और एड. संजय सोनवणे भी थे। आरोपी की तरफ से एड. राठी ने कामकाज देखा। सरकार की ओर से नियुक्त विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम ने मज़बूत सबूतों के आधार पर अदालत में अपनी बात रखी।
मालेगाव तालुका पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की थी और शुरुआती 23 दिनों में ही 425 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी थी। इस मुकदमे में अब तक पुलिस, गांववालों, पीड़ित के परिवार और मेडिकल अफसर समेत 24 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है।
पिछली सुनवाई में विजय खैरनार पर आरोप तय किए जा चुके थे और अदालत ने उसे अपनी बात रखने का मौका भी दिया था। इसके अलावा पुलिस, मनोचिकित्सक और जेलर की तरफ से उसके बर्ताव को लेकर रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी। अब आरोपी 30 दिन के अंदर हाई कोर्ट में अपील कर सकता है।