कराड में डॉक्टर दंपती से सीबीआई अधिकारी बनकर 1.15 करोड़ ठगने का आरोप, केस दर्ज
मेडिकल पीजी में एडमिशन का लालच देकर पैसे लेने और फिर सीबीआई जांच का डर दिखाकर वसूली करने का आरोप।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
उंब्रज और कराड में ठगी और कथित वसूली का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन दिलाने का लालच देकर एक डॉक्टर दंपती से लाखों रुपये लिए गए। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में नाम आने का डर दिखाकर कथित तौर पर वसूली की गई और फिर करोड़ों रुपये और मांगे गए। शिकायत के मुताबिक दंपती से कुल 1 करोड़ 15 लाख रुपये की ठगी हुई है और 1 करोड़ 35 लाख रुपये और मांगे गए।
डॉ. वैशाली अजित थोरात की शिकायत पर कराड शहर पुलिस स्टेशन में 16 अक्टूबर 2026 को रात 9.38 बजे केस दर्ज किया गया। एफआईआर में कराड के पुष्कर सुभाष कुलकर्णी, वडगांव (उंब्रज) के अनिकेत सदाशिव चव्हाण और दो अनजान लोगों का नाम है। शिकायत में कहा गया है कि यह सब अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच हुआ।
शिकायत के अनुसार कराड में प्राइवेट ट्यूशन लेने वाला पुष्कर कुलकर्णी डॉक्टर दंपती के संपर्क में आया। उसे पता था कि उनका बेटा एमबीबीएस कर चुका है और पीजी मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी कर रहा है। आरोप है कि उसने मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन की व्यवस्था करने की बात कहकर दंपती का भरोसा जीता।
शिकायत में बताया गया है कि 13 अप्रैल 2026 को कराड तहसील कार्यालय से कावनाका रोड के बीच मुलाकात में 35 लाख रुपये नकद दिए गए। इसकी नोटरी रसीद बनी और लौटाने की तारीख 25 सितंबर 2026 लिखी गई। आरोप है कि जुलाई में 15 लाख रुपये और लिए गए, जिसके बदले चेक दिया गया। इस तरह एडमिशन के नाम पर कुल 50 लाख रुपये लेने का आरोप है।
इसके बाद मामले ने नया मोड़ लिया। शिकायत के मुताबिक दंपती से कहा गया कि नीट-पीजी परीक्षा के पेपर घोटाले की जांच चल रही है, उनका नाम जांच में आया है, उनके फोन की बातचीत रिकॉर्ड हुई है और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। 19 अगस्त को उन्हें तासवडे टोलनाका इलाके में बुलाया गया और फिर वहागांव के पास मुलाकात हुई। वहां कथित आरोपी ने कहा कि मामला निपटाने के लिए सीबीआई दस करोड़ रुपये मांग रही है। दंपती ने इतनी रकम देना मुमकिन नहीं बताया, तो आरोप है कि दो करोड़ रुपये में मामला निपटाने का प्रस्ताव रखा गया।
शिकायत के अनुसार डर के मारे दंपती ने क्रेडिट सोसायटी की जमा रकम तोड़ी और सोने के गहने बेचकर करीब 65 लाख रुपये जुटाए। 20 अगस्त की रात पुणे के आंबेगांव इलाके में मुलाकात हुई। कुछ देर बाद एक सफेद चार पहिया गाड़ी वहां आई। आरोप है कि उसमें मौजूद लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर धमकाया और पैसों का बैग गाड़ी में रखवा लिया।
शिकायत में कहा गया है कि इसके बाद दंपती घबरा गए और सीधे पुलिस के पास जाने के बजाय पुणे में एक रिश्तेदार के यहां रुके। एडमिशन के लिए दिए 50 लाख के साथ ये 65 लाख मिलाकर कुल रकम 1 करोड़ 15 लाख रुपये होती है।
आरोप है कि 3 अक्टूबर की सुबह एक अनजान व्यक्ति डॉक्टर के घर के गेट पर आया। उसने खुद को राष्ट्रीय चिकित्सा शिक्षा बोर्ड से जुड़ा अधिकारी बताया और सतारा में और रकम लेकर आने को कहा। शिकायत के मुताबिक इसके बाद कथित आरोपियों की ओर से 1 करोड़ 35 लाख रुपये मांगे गए और पैसे न देने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।
रिश्तेदार की मदद से पूरी जानकारी लेने के बाद दंपती ने पुलिस के पास जाने का फैसला किया। शिकायत में 9 अक्टूबर को आवेदन देने का जिक्र है। 11 अक्टूबर को पुलिस ने संबंधित लोगों को बुलाकर पूछताछ की। शिकायतकर्ता का दावा है कि तब पुष्कर कुलकर्णी ने 50 लाख रुपये लेना माना और कहा कि मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन नहीं दिलाया जा सकेगा। शिकायत के मुताबिक उसने यह भी बताया कि पुणे में सीबीआई अधिकारी बनकर आए व्यक्ति ने जो 65 लाख रुपये लिए, वे अनिकेत चव्हाण की मदद से लिए गए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 14 अक्टूबर तक पैसे लौटाने का आश्वासन मिलने से दंपती ने तुरंत केस दर्ज नहीं कराया। लेकिन आरोप है कि 15 अक्टूबर को कराड के होटल अलंकार में हुई मुलाकात में शिकायत करने पर जेल भिजवाने की धमकी दी गई। इसके बाद दंपती ने पुलिस में केस दर्ज कराने का फैसला किया।
कराड शहर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 308(2), 308(3), 308(6), 308(7), 318(2), 318(4), 319(2), 336(3) और 338 के तहत केस दर्ज हुआ है। एफआईआर के मुताबिक जांच की जिम्मेदारी पुलिस निरीक्षक निखिल श्रीपती मगदूम को सौंपी गई है।
जांच के लिहाज से कथित तौर पर इस्तेमाल हुई गाड़ियां, पैसों का लेनदेन, चेक, नोटरी के कागजात, मोबाइल बातचीत के रिकॉर्ड और घर का सीसीटीवी फुटेज अहम हो सकते हैं। इलाके में चर्चा है कि पढ़ा-लिखा डॉक्टर परिवार ऐसे फेर में फंस सकता है तो आम आदमी का क्या होगा। यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस सख्ती से जांच करे ताकि संदिग्ध आरोपियों को उचित सजा मिले। अनिकेत चव्हाण का पुराना रिकॉर्ड उंब्रज पुलिस स्टेशन में दर्ज है और जिला बदर होने की कगार से किस राजनीतिक नेता ने उसे बचाया, इस पर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई है।