ऐप वाली कैब में महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आयोग ने राज्यों को भेजीं नई गाइडलाइन्स
राष्ट्रीय महिला आयोग ने ऐप आधारित कैब इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को गाइडलाइन्स जारी की हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने सोमवार को ऐप आधारित कैब से सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कीं। इनमें असली पैनिक बटन, गाड़ी तय रास्ते से भटकने पर रियल-टाइम अलर्ट और लंबे समय तक या संदिग्ध जगह पर रुकने पर निगरानी की बात कही गई है। साथ ही कैब सेवा देने वाली कंपनियों से 24x7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने पर जोर दिया गया है।
आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि इन गाइडलाइन्स का मकसद बुकिंग के समय, सफर के दौरान और सफर पूरा होने के बाद सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने वाले मौजूदा इंतजामों को और मजबूत करना है। उनके मुताबिक इससे सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा पक्की की जा सकेगी।
रहाटकर ने यह भी बताया कि आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे इन नई गाइडलाइन्स को लागू करें और जरूरी कदम उठाएं।
गाइडलाइन्स में कहा गया है कि कैब कंपनियां अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की नियमित समीक्षा करें। शिकायतों के निपटारे के लिए तय समय सीमा वाला सिस्टम हो, शिकायतें कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक भेजी जाएं, और नियमों के पालन व सुरक्षा इंतजामों की रिपोर्ट समय-समय पर दी जाए।
गाइडलाइन्स के मुताबिक ड्राइवर या गाड़ी में किया गया कोई भी गैर-मंजूर बदलाव ऐप पर ठीक से दर्ज होगा और उसे सुरक्षा से जुड़ा मामला माना जाएगा। यह मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन्स, 2025 की धारा 15.4 के मुताबिक है। इस धारा के तहत ऐप में यह जांचने का इंतजाम होना जरूरी है कि सफर कराने वाला ड्राइवर वही व्यक्ति है जो दर्ज है। धारा 14.9 के मुताबिक ड्राइवर की साफ और हाई-रिजोल्यूशन फोटो ऐप पर दिखाना जरूरी है।
महिला यात्रियों के लिए एक सिफारिश यह भी है कि ऐप पर दिखाई गई ड्राइवर या गाड़ी की जानकारी असल जानकारी से मेल न खाए, तो वे बिना कोई जुर्माना दिए सफर रद्द कर सकें। गाइडलाइन्स में ड्राइवर और गाड़ी के वेरिफिकेशन की भी बात है।
देर रात के सफर में ज्यादा सुरक्षा की मांग करते हुए गाइडलाइन्स में कहा गया है कि कंपनियां रात में देर तक काम करने वाले ड्राइवरों के वेरिफिकेशन और निगरानी का ज्यादा मजबूत सिस्टम बनाएं। सफर शुरू होते समय ड्राइवर की फोटो का अनिवार्य वेरिफिकेशन, ड्राइवर के नशे में होने पर कार्रवाई का इंतजाम, यात्री चाहे तो भरोसेमंद लोगों को सफर की जानकारी अपने आप भेजने की सुविधा, मजबूत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से निगरानी और सफर के अंत में सुरक्षित जगह पर छोड़ने का विकल्प जैसे उपाय शामिल किए जा सकते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि ड्राइवरों को समय-समय पर सुरक्षा और जेंडर संवेदनशीलता की ट्रेनिंग दी जाए। गाइडलाइन्स में ड्राइवरों को काम पर रखने से पहले और उसके बाद भी नियमित अंतराल पर आपराधिक रिकॉर्ड की जांच, पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक की जरूरत बताई गई है।