अमेरिका के मध्यावधि चुनाव: डेमोक्रेट्स हाउस और सिनेट पर कब्जे की ओर, ट्रम्प को झटका
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस और सिनेट दोनों में बहुमत के करीब है। रिपब्लिकन खेमे की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के लिए अच्छी खबर नहीं लेकर आए हैं। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के पहले दो साल पूरे होने के बाद ये चुनाव हुए हैं। नतीजों का रुझान ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ जाता दिख रहा है, और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सिनेट, दोनों अहम सदनों पर कब्जे की ओर बढ़ रही है।
इस चुनाव में हाउस की सभी 435 सीटों पर वोट पड़े। सिनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हुआ। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर के पद के लिए भी जनता अपना फैसला दे रही है। शुरुआती आंकड़ों के हिसाब से हाउस में सत्ता पलटने और अपना बहुमत साफ करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को सिर्फ तीन और सीटें चाहिए। सिनेट में नियंत्रण पाने के लिए उसे चार सीटें जीतनी होंगी। डेमोक्रेट्स जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, उससे लगता है कि दोनों सदनों में ट्रम्प की पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की जीत से उसका जोश और बढ़ा है। जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सिनेटर जॉन ऑसॉफ (Jon Ossoff) ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक कॉलिन्स को हराकर दूसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 39 साल के ऑसॉफ ने पूरे प्रचार में ट्रम्प की नीतियों पर जमकर हमला बोला था।
नॉर्थ कैरोलिना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर (Roy Cooper) ने सिनेट की खाली सीट जीतकर रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया। उन्होंने ट्रम्प के समर्थन वाले माइकल व्हाटली को करारी शिकस्त दी। इन दोनों राज्यों की जीत से सिनेट में बहुमत का रास्ता डेमोक्रेट्स के लिए आसान हो गया है।
इस चुनाव को एक तरह से राष्ट्रपति ट्रम्प के कामकाज पर जनता का फैसला माना जा रहा है। पिछले साल ट्रम्प महंगाई घटाने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा वादा करके सत्ता में आए थे, लेकिन हकीकत में तस्वीर अलग दिखी। ट्रम्प प्रशासन के लगाए सख्त टैरिफ और मध्यपूर्व के संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के बढ़े दामों ने आम अमेरिकी परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। लगातार बढ़ती महंगाई और आर्थिक नीतियों से नाराजगी के कारण ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर करीब 30 फीसदी के आसपास आ गई है। इसका सीधा नुकसान रिपब्लिकन उम्मीदवारों को होता दिख रहा है।
अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस में बहुमत मिलता है, तो ट्रम्प के कानून बनाने के एजेंडे को बड़ा झटका लग सकता है। डेमोक्रेट्स संसद में ट्रम्प प्रशासन के विवादित फैसलों और अलग-अलग कार्रवाइयों की गहरी जांच शुरू कर सकते हैं। सिनेट में बहुमत हाथ से गया, तो राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के जज, बड़े अफसर और राजदूत नियुक्त करने में काफी दिक्कत आएगी। ऐसे में बचे हुए दो साल के कार्यकाल में कोई बड़ा फैसला लेना या बिल पास करवाना ट्रम्प के लिए मुश्किल होगा।
चुनाव की रात राष्ट्रपति ट्रम्प व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में अपने कैबिनेट के वरिष्ठ साथियों और राजनीतिक सलाहकारों के साथ मौजूद थे। रुझान आने के बाद उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) की पोस्ट से उनकी बेचैनी साफ दिखी। इस बीच व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा है कि ट्रम्प चुनाव प्रक्रिया में कोई दखल नहीं देंगे और नतीजों का आधिकारिक प्रमाणन शांति से पूरा होगा।
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