अमेरिका में मिडटर्म की गिनती शुरू, संसद पर रिपब्लिकन की पकड़ रहेगी या डेमोक्रेट्स की?
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अमेरिका में मध्यावधी चुनाव की वोटों की गिनती तेजी से चल रही है। नतीजों से तय होगा कि रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण रख पाती है या नहीं।
अमेरिका में हाल ही में हुए मध्यावधी चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) के बाद वोटों की गिनती तेजी से शुरू हो गई है। इन नतीजों से अमेरिकी राजनीति की आगे की दिशा तय होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के सामने अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद में अपना दबदबा बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
मंगलवार को देश के लाखों नागरिकों ने वोट डाला। इसी वोटिंग से पता चलेगा कि संसद पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बना रहता है या विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी निचले सदन, यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बाजी मार लेती है। उधर सीनेट, यानी ऊपरी सदन में दोनों पार्टियों के बीच बेहद कांटे की टक्कर चल रही है।
अमेरिकी राजनीति के इतिहास और रुझान को देखें तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद लगभग हर मध्यावधी चुनाव में सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रपति ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग इस वक्त अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच चुकी है। ईरान के साथ सैन्य विवाद, ईंधन के बढ़े हुए दाम और बढ़ती महंगाई से अमेरिकी नागरिक काफी नाराज हैं।
एग्जिट पोल के मुताबिक करीब 50 फीसदी वोटरों ने इस चुनाव को ट्रम्प सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जताने का जरिया बनाया। करीब 75 फीसदी वोटरों ने देश की मौजूदा दिशा पर गहरी नाराजगी जताई, जबकि 70 फीसदी वोटरों का कहना है कि कांग्रेस को राष्ट्रपति के अधिकारों पर ज्यादा नियंत्रण रखना चाहिए। ट्रम्प ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे यह मानकर वोट करें कि खुद ट्रम्प मैदान में हैं। विपक्ष ने भी इसी मुद्दे को अपने प्रचार का मुख्य केंद्र बनाया।
अब दोनों सदनों का गणित देखें। प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर वोट पड़े हैं। यहां बहुमत के लिए डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन पार्टी से कम से कम 3 सीटें छीननी होंगी। एक विश्लेषण के मुताबिक 47 सीटों पर बहुत कड़ा मुकाबला है। बाकी सीटों पर नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे, तो डेमोक्रेट्स को बहुमत के लिए इन 47 में से सिर्फ 13 सीटें जीतनी होंगी।
सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर वोट डाले गए। यहां बहुमत के लिए डेमोक्रेट्स को 4 नई सीटें जीतनी होंगी, लेकिन उनके लिए सीनेट की राह मुश्किल मानी जा रही है। उन्हें अपनी सारी सीटें बचानी होंगी और साथ ही अलास्का, आयोवा, कंसास, नेब्रास्का, ओहायो, साउथ कैरोलाइना और टेक्सास जैसे राज्यों में भी जीतना होगा, जहां 2024 के चुनाव में ट्रम्प दो अंकों के फर्क से जीते थे।
डोनाल्ड ट्रम्प पहले भी कई बार चुनावों में गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगा चुके हैं। इसलिए कानून के जानकार और विपक्षी नेता यह आशंका जता रहे हैं कि रिपब्लिकन पार्टी हारी, तो ट्रम्प अदालत का दरवाजा खटखटाकर नतीजों को चुनौती दे सकते हैं।
इस बीच चुनाव की निष्पक्षता के लिए अमेरिकी न्याय विभाग ने सभी 50 राज्यों में करीब 1,000 चुनाव पर्यवेक्षक और निगरानी टीमें तैनात की हैं। प्रशासन ने कहा है कि यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा चुनावी निगरानी अभियान है। दूसरी तरफ, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस कदम की आलोचना की है। उसका आरोप है कि यह वोटरों पर दबाव डालने या उन्हें डराने की कोशिश है।
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