अमेरिका मध्यावधि चुनाव: दोनों सदनों में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत गया, डेमोक्रेट्स आगे
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3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी हाउस और सीनेट दोनों में बहुमत गंवा बैठी है। ट्रम्प ने माना कि इराक की नहीं, इराण की जंग इसकी आंशिक वजह है।
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव (US Midterm Elections 2026) के नतीजे आ गए हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। संसद के दोनों सदनों, यानी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate), में पार्टी का बहुमत हाथ से निकल गया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने जोरदार वापसी करते हुए दोनों जगह बढ़त बना ली है।
खबर के मुताबिक इस चुनाव में जनता की नाराजगी की तीन बड़ी वजहें रहीं: इराण में चल रही जंग, बढ़ती महंगाई और विदेश नीति। सबसे अहम मुद्दा इराण के साथ चल रहा फौजी टकराव रहा। ट्रम्प प्रशासन ने इराण में सत्ता बदलने के मकसद से जो कदम उठाए, उनकी वजह से अमेरिकी फौज इस मुहिम में फंसी हुई थी। इस जंग के चलते अमेरिका में महंगाई भड़की और लाखों लोगों में नाराजगी फैली। वोट डालते वक्त लोगों ने इन्हीं नीतियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाया।
खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में माना कि रिपब्लिकन पार्टी की इस हार के लिए इराण की जंग और उससे बने हालात कुछ हद तक जिम्मेदार हैं।
अब सवाल यह है कि ट्रम्प की कुर्सी पर इसका क्या असर पड़ेगा। इस हार का मतलब यह नहीं कि उनका राष्ट्रपति पद फौरन खतरे में आ गया है। लेकिन संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने से ट्रम्प के एकतरफा फैसलों पर अब बड़ी रोक लगेगी। प्रशासन को कोई भी बड़ा कानून, बजट या फौज से जुड़ा बिल पास कराना हो, तो उसे विपक्ष की रजामंदी और मंजूरी पर निर्भर रहना पड़ेगा। इस हालात से निपटने के लिए ट्रम्प ने पहले ही वीटो (Veto) के अधिकार का इस्तेमाल करने के संकेत दे दिए हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस चुनाव में ऐतिहासिक और चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले कई राज्यों में भी डेमोक्रेट्स ने जीत हासिल की, जिससे राजनीतिक विश्लेषक और सर्वे करने वाले हैरान रह गए। कैन्सस में 1932 के बाद पहली बार किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने सीनेट की सीट जीती है। इसके अलावा टेक्सास और साउथ कैरोलिना जैसे लाल यानी रिपब्लिकन माने जाने वाले राज्यों में भी डेमोक्रेट्स को बड़ी कामयाबी मिली है।
इन अभूतपूर्व नतीजों से साफ हो गया है कि अगले दो साल तक ट्रम्प प्रशासन की विदेश और घरेलू नीतियों पर संसद की कड़ी नजर रहेगी।
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