KYC के नाम पर ठगी से खाली हो सकता है बैंक खाता, जानिए पांच तरीके और बचाव
भारत में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ा है और उसके साथ साइबर ठगी भी। KYC के नाम पर होने वाले फ्रॉड के तरीके और बचाव के उपाय।
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भारत में डिजिटल लेनदेन बहुत तेजी से बढ़ा है और उसी रफ्तार से साइबर क्राइम का खतरा भी बढ़ा है। देश में डिजिटल फ्रॉड की दर में 7.1 प्रतिशत का इजाफा दर्ज हुआ है, जो दुनिया के औसत से करीब दोगुना है। दर्ज हुए कुल साइबर अपराधों में 60 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें आर्थिक ठगी की हैं। इनमें पहचान की चोरी और फर्जी "re-KYC" अलर्ट सबसे बड़े खतरे बनकर सामने आ रहे हैं।
KYC यानी "नो युवर कस्टमर" की जांच में बैंक और फिनटेक प्लेटफॉर्म किसी के PAN कार्ड या सरकारी पहचान पत्र जैसे अधिकृत कागजात से उसकी पहचान पक्की करते हैं। डिजिटल KYC में जल्दी खाता खोलने के लिए लाइव फोटो और वीडियो कॉल के जरिए कागजात जांचे जाते हैं। KYC पूरी होते ही खाते पर पूरा कंट्रोल मिल जाता है। इसी वजह से ठग इस प्रक्रिया का गलत फायदा उठाने के लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाते हैं।
पहला तरीका आइडेंटिटी थेफ्ट यानी पहचान की चोरी है। स्कैमर निजी जानकारी चुराते हैं या धोखे से KYC पूरी करने के लिए नकली पहचान बना लेते हैं। इसके बाद आपके नाम पर नए खाते खुलते हैं, लोन लिया जाता है या क्रेडिट कार्ड जारी करा लिया जाता है। दूसरा तरीका अकाउंट सस्पेंशन स्कैम है। इसमें SMS अलर्ट भेजकर दावा किया जाता है कि KYC अपडेट नहीं हुई तो आपका खाता या डिजिटल वॉलेट कुछ घंटों में हमेशा के लिए ब्लॉक हो जाएगा। इस तरह लोगों में डर फैलाया जाता है।
ठगी के पांच आम तरीके ये हैं। पहला, KYC पूरी करने के लिए पैसों का लालच: ठग लोगों को उनके खातों पर KYC जांच कराने के बदले पहले से रकम देते हैं और फिर उन खातों का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लेकर गैरकानूनी लेनदेन करते हैं। दूसरा, फर्जी Re-KYC लिंक से फिशिंग: फौरन पहचान जांच के मैसेज भेजकर KYC अपडेट के बहाने यूजर्स से गोपनीय कागजात और OTP जमा करवाए जाते हैं, जिनसे खाते हाईजैक हो जाते हैं।
तीसरा, फेक लोन प्रोसेस और नकली ऑनबोर्डिंग: लोन मंजूर करने का लालच देकर लोगों से ठगों के कंट्रोल वाले खातों पर वीडियो-KYC करवाई जाती है। सारी जिम्मेदारी उस व्यक्ति पर आ जाती है, जबकि खाते का पूरा कंट्रोल स्कैमर के पास ही रहता है। चौथा, SMS अलर्ट और फिशिंग KYC पोर्टल: "अनिवार्य re-KYC" के लिए बाहरी लिंक पर क्लिक न करने पर खाता या वॉलेट हमेशा के लिए बंद करने की धमकी वाले SMS भेजे जाते हैं, और इससे लोगों की पहचान और निजी डेटा सीधे चुरा लिया जाता है। पांचवां, रिमोट एक्सेस का गलत इस्तेमाल: कॉल करने वाले खुद को बैंक अधिकारी बताकर "पेंडिंग KYC जांच पूरी करने" के नाम पर स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवाते हैं। इससे ठगों को डिवाइस का रिमोट एक्सेस मिल जाता है और वे गैरकानूनी लेनदेन खुद मंजूर कर लेते हैं।
फोनपे में 'फोनपे डिवाइस गार्ड' जैसे इन-बिल्ट सिक्योरिटी फीचर हैं। ये चालू स्क्रीन-मिररिंग पकड़कर संवेदनशील डेटा अपने आप छिपा देते हैं और सेशन वहीं रोक देते हैं। 'फोनपे प्रोटेक्ट' जैसे सिक्योरिटी इंजन डिवाइस बदलने और संदिग्ध लोकेशन जंप को पहचानते हैं, और अनजान लॉगिन की कोशिशों को रियल-टाइम में ब्लॉक कर देते हैं।
बचाव के लिए कुछ बातें याद रखिए। जल्दबाजी या डर पैदा करने वाले मैसेज से सावधान रहिए, खासकर खाता फौरन बंद करने की धमकी देने वाले अनचाहे कॉल, ईमेल या मैसेज से। OTP, UPI पिन या पासवर्ड फोन पर या मैसेजिंग ऐप पर किसी के साथ शेयर मत कीजिए। असली और अधिकृत वित्तीय संस्था KYC अपडेट सिर्फ अपने आधिकारिक ऐप के अंदर पूरा करती है, बाहरी SMS लिंक से कभी नहीं। कस्टमर सपोर्ट कभी आपसे अनजान रिमोट डेस्कटॉप या स्क्रीन-शेयरिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने को नहीं कहता। कस्टमर सर्विस से संपर्क भी सिर्फ आधिकारिक ऐप में दिए गए नंबर पर ही कीजिए।
शक हो तो शिकायत कहां करें, यह भी जान लीजिए। PhonePe सपोर्ट के लिए 080-68727374 या 022-68727374 पर कॉल करें। आधिकारिक ट्विटर हैंडल (@PhonePeSupport) या फेसबुक हैंडल से भी संपर्क किया जा सकता है, या grievance.phonepe.com पर ओपन टिकट एस्केलेट करें। नेशनल साइबर क्राइम सेल के लिए फौरन 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। फर्जी कॉल या मैसेज की शिकायत DoT के संचार साथी की वेबसाइट sancharsaathi.gov.in पर चक्षू पोर्टल के जरिए की जा सकती है।
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