डिजिटल अरेस्ट से डीपफेक तक: ऑनलाइन ठगी की परतें खोलने वाले पांच शो और फिल्में
इन्फ्लुएन्सर अंकुश बहुगुणा के डिजिटल अरेस्ट से जान्हवी कपूर के डीपफेक वीडियो तक, डिजिटल फ्रॉड भारत में बड़ी चिंता बन गया है। इसी विषय को छूने वाले पांच शो और फिल्मों पर एक नज़र।
भारत में डिजिटल फ्रॉड अब बहुत चिंता की बात बनता जा रहा है। इन्फ्लुएन्सर अंकुश बहुगुणा को 40 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' के अनुभव से गुजरना पड़ा। हाल ही में जान्हवी कपूर का AI से बनाया गया एक डीपफेक वीडियो भी सामने आया। एक तरफ ये मामले साइबर फ्रॉड और पैसों की लूट के खतरे को दिखाते हैं, तो दूसरी तरफ यह भी बताते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तस्वीरों को कैसे बिगाड़ा जा सकता है और किसी की निजी सीमाएं कैसे लांघी जा सकती हैं।
फिशिंग नेटवर्क से लेकर आर्थिक घोटालों और AI की हेराफेरी तक, डिजिटल ठगी के कई चेहरे हैं। इन्हीं को सामने लाने वाले कुछ भारतीय शो और फिल्में ये हैं।
पहला नाम है 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' का। यह शो 1992 के सिक्योरिटी घोटाले पर बना है और स्टॉक ब्रोकर हर्षद मेहता के उठने और गिरने की कहानी सुनाता है। मुंबई के शेयर बाजार में नाम कमाने वाले हर्षद मेहता बाद में देश के सबसे बदनाम आर्थिक घोटालों में से एक में फंस गए। प्रतीक गांधी की मुख्य भूमिका वाली और हंसल मेहता के निर्देशन में बनी इस सीरीज़ में बैंकिंग की खामियां, पैसों का लेन-देन और मीडिया की जांच दिखाई गई है, जिसने इस घोटाले को लोगों के सामने रखा। यह सीरीज़ पत्रकार सुचेता दलाल और देवाशिष बसु की किताब 'द स्कैम: हू वन, हू लस्ट, हू गॉट अवे' पर आधारित है। कहां देखें: सोनी लिव।
दूसरे नंबर पर 'CTRL' है। इसमें अनन्या पांडे और विहान समत हैं। कहानी एक इन्फ्लुएन्सर की है, जो अपनी डिजिटल ज़िंदगी से एक्स-बॉयफ्रेंड को मिटाने के लिए AI ऐप का सहारा लेती है, लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि उस तकनीक के पीछे का मकसद बेहद डरावना है। विक्रमादित्य मोटवाने के निर्देशन में बना यह नेटफ्लिक्स थ्रिलर दिखाता है कि निजी डेटा, AI टूल्स और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता का गलत इस्तेमाल करके लोगों को कैसे गुमराह किया जा सकता है। डेटा के दुरुपयोग और ऑनलाइन हेराफेरी जैसी इसकी थीम साइबर क्राइम और डीपफेक को लेकर बढ़ती चिंता से मेल खाती है। कहां देखें: नेटफ्लिक्स।
तीसरा शो है 'स्कैम 2003: द तेलगी स्टोरी'। शेयर बाजार से हटकर यह फर्जी कागजात की ओर जाता है और अब्दुल करीम तेलगी के स्टांप पेपर घोटाले की कार्यप्रणाली का पीछा करता है। गगन देव रियार की मुख्य भूमिका वाली इस सीरीज़ में दिखाया गया है कि स्टांप पेपर सिस्टम की कमज़ोरी का फायदा उठाकर यह काम कैसे एक विशाल नेटवर्क में फैल गया। यह पत्रकार संजय सिंह की किताब 'तेलगी स्कैम: रिपोर्टर्स डायरी' पर आधारित है। कहां देखें: सोनी लिव।
चौथा नाम 'जामताड़ा: सबका नंबर आएगा' का है। यह शो बड़ी आर्थिक संस्थाओं से हटकर रोज़ फोन इस्तेमाल करने वालों तक पहुंचता है। झारखंड में ऑनलाइन ठगी से जुड़े शहर जामताड़ा के फिशिंग घोटालों की पड़ताल इसमें की गई है। यह क्राइम ड्रामा उन नौजवानों पर है, जो फोन कॉल के जरिए लोगों से उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी उगलवा लेते हैं। फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट घोटालों के इस दौर में यह शो दिखाता है कि एक साधारण फोन कॉल भी ठगी का हथियार बन सकता है। कहां देखें: नेटफ्लिक्स।
पांचवां नाम 'बैड बॉय बिलियनेयर्स: इंडिया' है। यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ विजय माल्या, नीरव मोदी और सुब्रत रॉय समेत कई बड़े भारतीय कारोबारियों से जुड़े विवादों और आरोपों को परखती है। पुराने फुटेज, इंटरव्यू और खोजी अंदाज़ की कहानी के सहारे यह इन ताकतवर कारोबारी साम्राज्यों के उभरने और उसके बाद आए कानूनी व आर्थिक विवादों की पड़ताल करती है। किसी एक घोटाले पर ध्यान देने के बजाय यह सीरीज़ कॉर्पोरेट महत्वाकांक्षा, कथित आर्थिक गड़बड़ियों और जवाबदेही की बड़ी दुनिया को खंगालती है। कहां देखें: नेटफ्लिक्स।