शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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कोंकण रेलवे परियोजना प्रभावित 26 नवंबर को संविधान दिवस पर करेंगे अनशन और रेल रोको

कोंकण रेलवे परियोजना प्रभावित 26 नवंबर को संविधान दिवस पर करेंगे अनशन और रेल रोको तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

कोकणभूमी परियोजना प्रभावित कार्रवाई समिति का आरोप है कि जमीन और घर देने वालों के सवाल अब भी अटके हैं। समिति ने 26 नवंबर को अनशन और रेल रोको का फैसला किया है।

कोकण रेलवे प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन, घर और जायदाद देने वाले प्रोजेक्ट प्रभावितों के सवाल अब तक अटके पड़े हैं। रत्नागिरी की कोकणभूमी प्रोजेक्ट प्रभावित कृति समिति का आरोप है कि प्रशासन इन सवालों को नजरअंदाज कर रहा है। इसी वजह से समिति ने अब आर-पार के आंदोलन का रास्ता चुन लिया है।

समिति की संयुक्त बैठक में तय हुआ कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के दिन अनशन किया जाएगा और रेल रोको आंदोलन भी होगा। आंदोलन से पहले कोकण रेलवे के मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) को आखिरी पूर्वसूचना का निवेदन भेजा जाएगा। यही निवेदन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय रेल मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भी भेजा जाएगा। कोकण के संबंधित सांसदों और विधायकों को भी इसकी प्रति दी जाएगी।

समिति ने कहा है कि मांगें पूरी होने तक लड़ाई जारी रहेगी। उसके मुताबिक प्रोजेक्ट प्रभावितों के मुद्दों पर आआरएम, सीपीओ और ऑपरेशन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर विस्तार से बात की गई थी। मांगों के पीछे की वजहें, प्रोजेक्ट प्रभावितों के साथ हो रहा अन्याय, और उससे जुड़े सबूत व कागजात भी सौंपे गए थे। इसके बावजूद किसी भी मांग पर ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं हुआ।

समिति का यह भी आरोप है कि प्रोजेक्ट प्रभावितों के सवाल सीधे सीएमडी तक पहुंचाने के बजाय वरिष्ठ स्तर पर ही रोक लिए जाते हैं। समिति चाहती है कि सिर्फ बातचीत और आश्वासन न हों, जमीन पर कार्रवाई हो। इसलिए मांग की गई है कि सीएमडी खुद दखल दें और समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करें।

भर्ती की सख्त शर्तें भी एक बड़ा मुद्दा हैं। कोकण रेलवे की ग्रुप 'ड' लेवल-1 भर्ती में प्रोजेक्ट प्रभावितों पर जो शर्तें लगाई गई हैं, उनके खिलाफ समिति पहले ही प्रशासन को निवेदन दे चुकी है। मांगें ये हैं: भर्ती में निगेटिव मार्किंग खत्म की जाए, 35 किलो वजन उठाकर चलने की शारीरिक परीक्षा रद्द हो, एक किलोमीटर की दौड़ में उम्र के हिसाब से छूट मिले, और ठेका मजदूर व्यवस्था में प्रोजेक्ट प्रभावितों को ट्रेनिंग और रोजगार का मौका दिया जाए।

इसके अलावा समिति ने प्रोजेक्ट प्रभावितों के दस अहम मामलों की अलग से और गहराई से दोबारा जांच की मांग की है। इनमें जमीन की संयुक्त और स्वतंत्र मालिकाना हक, एक परिवार एक नौकरी के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र, बेटी, पोते और पोती की पात्रता का सवाल, वारिसों के सहमति पत्र में होने वाली देरी और पात्रता से जुड़ी दूसरी बातें शामिल हैं। समिति के अनुसार इन मामलों की दोबारा जांच कर न्यायपूर्ण फैसला लेने का आश्वासन पहले दिया गया था। लेकिन बार-बार पीछे पड़ने पर भी न कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही लिखित जवाब मिला, ऐसा समिति का आरोप है।

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