मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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रत्नागिरी में सूखे का खतरा, 10 बांधों से रिसता पानी, सिंचाई विभाग ने शुरू की मरम्मत

रत्नागिरी में सूखे का खतरा, 10 बांधों से रिसता पानी, सिंचाई विभाग ने शुरू की मरम्मत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

रत्नागिरी जिले में कम बारिश से जलसंकट गहरा रहा है और सिंचाई विभाग के 10 अहम बांधों में रिसाव से रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।

रत्नागिरी जिले में सूखे जैसे हालात की वजह से हर तरफ चिंता है। इसी बीच एक और गंभीर बात सामने आई है। सिंचाई विभाग के कब्जे वाले 10 अहम बांधों में रिसाव शुरू हो गया है। इस रिसाव से रोज हजारों लीटर कीमती पानी बह रहा है और हालात और बिगड़ गए हैं।

इस साल शुरू से ही बारिश कम हुई। ऊपर से तेज धूप के कारण पानी भाप बनकर तेजी से उड़ रहा है। इन दोनों वजहों से जिले के सारे जलाशयों का स्तर पहले ही तेजी से नीचे जा रहा था। अब बांधों से लगातार हो रहे रिसाव ने जलसंकट को और बढ़ा दिया है और लोग परेशान हैं। पानी बचाना और बांधों की जल्द मरम्मत करना इस वक्त प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 71 बांध परियोजनाएं चालू हैं। मानसून का मौसम खत्म होने के बाद बांधों में जितना पानी बचा है, उसकी बारीकी से योजना सिंचाई विभाग की तरफ से इस वक्त बनाई जा रही है। खेती, उद्योग और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है कि पीने के पानी को सबसे ऊपर रखा जाएगा।

आंकड़ों के मुताबिक जिले के कुल 72 बांधों में अभी औसतन करीब 15 प्रतिशत पानी बचा है। सुनने में यह संतोषजनक लग सकता है, लेकिन सूखे की गंभीरता और रिसाव को देखते हुए हालात आसान नहीं हैं।

सिंचाई विभाग ने बांधों के रिसाव को बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला मानते हुए मरम्मत के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रोज बड़ी मात्रा में हो रही पानी की बर्बादी को फौरन रोकना प्रशासन का मुख्य मकसद है। बारिश के अनियमित रहने और आबादी बढ़ने की वजह से आगे पानी की किल्लत न हो, इसके लिए लंबे समय के उपाय भी तैयार किए जा रहे हैं।

सरकारी स्तर पर 500 करोड़ के प्रस्ताव को जल्द से जल्द मंजूरी दिलाने की कोशिश चल रही है, ताकि असल काम में तेजी आ सके। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि वे पानी बर्बाद न करें और किफायत से इस्तेमाल करें।

प्रशासन का कहना है कि अगर मरम्मत का काम वक्त पर पूरा हो गया और रिसाव रोकने में कामयाबी मिली, तभी रत्नागिरी जिला भीषण पानी की किल्लत के खतरे से सुरक्षित बाहर निकल पाएगा।

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