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रविवार, 8 नवंबर 2026

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इस्राइल में आइज़ेनकोट को मिला सरकार बनाने का पहला मौका, राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने सौंपा जनादेश

सियासत PT24 टीम

राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने गैडी आइज़ेनकोट को सरकार बनाने का जनादेश दिया है। उनके पास 28 दिन हैं और संसद में 61 का आंकड़ा जुटाना सबसे बड़ी चुनौती है।

इस्राइल के राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग ने रविवार, 8 नवंबर को गैडी आइज़ेनकोट को नई सरकार बनाने का आधिकारिक जनादेश सौंप दिया। यह समारोह यरुशलम के राष्ट्रपति भवन में हुआ।

हाल के संसदीय चुनाव में मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को साफ बहुमत नहीं मिल पाया। नेतन्याहू करीब दो दशक से इस्राइल की राजनीति में असर रखते आए हैं।

चुनाव 27 अक्टूबर को हुआ था, लेकिन उसके बाद भी सरकार की तस्वीर साफ नहीं हुई। 120 सदस्यों की संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का बहुमत चाहिए। नेतन्याहू की अगुवाई वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि आइज़ेनकोट की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन के खाते में 48 सीटें आईं। बाकी 19 सीटों पर अरब पार्टियों का प्रतिनिधित्व है।

राष्ट्रपति ने सरकार बनाने के सवाल पर राजनीतिक पार्टियों से बातचीत की। इस बातचीत में 67 सांसदों ने आइज़ेनकोट के नाम का समर्थन किया, जबकि 46 सांसदों ने नेतन्याहू को पसंद किया। इसी वजह से सरकार बनाने का पहला मौका आइज़ेनकोट को मिला।

इस्राइल के कानून के हिसाब से आइज़ेनकोट के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन का वक्त है। ज़रूरत पड़ी तो राष्ट्रपति यह मियाद 14 दिन और बढ़ा सकते हैं।

आइज़ेनकोट ने देश में राष्ट्रीय एकता वाली सरकार बनाने का इरादा जताया है, ऐसी सरकार जो आपातकाल जैसे हालात का सामना कर सके। लेकिन अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियों को एक साथ लाना उनके लिए आसान नहीं होगा। इसलिए आने वाले कुछ हफ्ते इस्राइल की राजनीति के लिए बहुत अहम रहेंगे।

आइज़ेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसद में 61 सदस्यों का ज़रूरी बहुमत जुटाना है। अरब समुदाय की नुमाइंदगी करने वाली पार्टियों ने उन्हें समर्थन देने की सिफारिश की है। फिर भी यह पक्का नहीं कि ये पार्टियां सीधे सरकार में शामिल होंगी।

दूसरी तरफ नेतन्याहू ने राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की मांग की है। पर आइज़ेनकोट का रुख नेतन्याहू की अगुवाई में बनने वाली सरकार में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।

ऐसे में नई सरकार का भविष्य अरब पार्टियों के समर्थन, धार्मिक पार्टियों से बातचीत और संभावित राजनीतिक समझौतों पर टिका रहेगा। अगर आइज़ेनकोट सरकार बनाने में नाकाम रहे, तो नेतन्याहू को दोबारा मौका मिल सकता है। नहीं तो इस्राइल में फिर से चुनाव होने की संभावना बन जाएगी।

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