सूखे से जूझते किसानों के लिए वंचित बहुजन आघाडी की काली दिवाली, चटनी-रोटी खाकर सरकार का विरोध
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वंचित बहुजन आघाडी ने दिवाली पर राज्य भर में काली दिवाली मनाई। पार्टी का कहना है कि सूखे की मार झेल रहे किसानों को सरकार से पूरी मदद नहीं मिल रही।
दिवाली की रोशनी और उत्साह के बीच महाराष्ट्र में किसान और आम लोग सूखे की मार झेल रहे हैं। वंचित बहुजन आघाडी का कहना है कि राज्य सरकार से किसानों को जो मदद मिल रही है, वह काफी नहीं है। इसी को लेकर पार्टी ने पूरे राज्य में "काली दिवाली" आंदोलन शुरू किया है।
पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने चटनी-रोटी खाकर और काली दिवाली मनाकर राज्य सरकार की नीतियों का विरोध दर्ज कराया। इस दौरान "देवेंद्र-नरेंद्र घी खाएं, किसान भूखे" जैसे नारे भी लगाए गए।
छत्रपती संभाजीनगर में वंचित बहुजन आघाडी की ओर से कलेक्टर दफ्तर के सामने आंदोलन हुआ। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सूखे से प्रभावित किसानों को मदद नहीं मिल रही है, और चटनी-रोटी खाकर सरकार का विरोध किया। प्रदर्शन में मांग रखी गई कि सरकार किसानों और खेतिहर मजदूरों की परेशानियों पर गंभीरता से ध्यान दे।
जालना में भी कलेक्टर दफ्तर के सामने किसान और वंचित बहुजन आघाडी के पदाधिकारी एक साथ जुटे और काली दिवाली आंदोलन की शुरुआत की। बुलढाणा में भी कलेक्टर दफ्तर के सामने चटनी-रोटी खाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराज़गी जताई गई।
अकोला के आंदोलन में पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र पातोडे मौजूद रहे। किसानों के सवालों पर सरकार का ध्यान खींचने के लिए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
सोलापुर में भी कलेक्टर दफ्तर के सामने आंदोलन किया गया। आंदोलनकारियों ने मांग की कि सूखे जैसे हालात में किसानों को राहत देने के लिए सरकार ठोस फैसले ले।
वंचित बहुजन आघाडी की प्रमुख मांगें ये हैं: सूखे से प्रभावित किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए, फसलों के नुकसान की भरपाई की जाए, और किसानों तथा खेतिहर मजदूरों के लिए विशेष मदद का ऐलान किया जाए।
पार्टी ने दिवाली के त्योहार में किसानों के सवालों को केंद्र में रखकर राज्य भर में आंदोलन के जरिए सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की है।


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