सोनिया गांधी बोलीं, उनकी किताब राजनीतिक नहीं, परिवार के निजी जीवन की कहानी है
सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब पर चल रही चर्चा के बीच कहा कि यह राजनीतिक किताब नहीं है। भाजपा का आरोप है कि इसमें निजी अनुभवों की जगह राजनीतिक आलोचना है।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब को लेकर शुरू हुई चर्चा पर आखिरकार जवाब दिया है। उन्होंने साफ किया कि यह राजनीतिक किताब नहीं है, बल्कि उनके परिवार के निजी जीवन की कहानी है। उनके मुताबिक किताब में परिवार के रिश्तों, संघर्ष, अनुभवों और इंसानियत के अलग-अलग पहलुओं को ईमानदारी से दिखाया गया है।
सोनिया गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "एक्स" पर अपनी पहली निजी पोस्ट की। इसी पोस्ट से उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी निजी मौजूदगी शुरू की। पोस्ट में उन्होंने अपने दिवंगत पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यादें ताज़ा कीं। उन्होंने लिखा कि राजीव गांधी का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक था और स्वभाव नरम था।
इससे पहले गुरुवार को सोनिया गांधी इंस्टाग्राम पर भी आई थीं। वहां उन्होंने अपनी आने वाली किताब का ज़िक्र करते हुए इसे "प्यार, कर्तव्य, बिछोह और अपनेपन की तलाश की कहानी" बताया था।
उनकी 544 पन्नों की किताब का नाम "बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव" (Belonging: A Journey of Love) है। किताब का वैश्विक प्रकाशन 10 नवंबर को होगा। भारत में इसे हार्परकॉलिन्स इंडिया छापेगा। इससे पहले प्रकाशन को लेकर लेखिका के प्रतिनिधि और पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया के बीच मतभेद पैदा हुए थे। अब बताया जा रहा है कि यह अड़चन दूर हो गई है।
किताब लिखने के फैसले के बारे में सोनिया गांधी ने "एक्स" की पोस्ट में कहा कि वे अपने परिवार की ज़्यादा निजी और असली तस्वीर लोगों के सामने रखना चाहती थीं। उनका कहना था कि परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन वे लोग असल में कैसे थे, उनकी प्रेरणा, उनके संघर्ष और उनकी इंसानी सीमाएं क्या थीं, इसका चित्रण कम ही हुआ है। उन्होंने साफ किया कि जिन लोगों को उन्होंने जाना और जिनसे प्यार किया, उन्हें ईमानदारी से पेश करने की कोशिश इस किताब में की गई है।
दूसरी ओर, भाजपा ने किताब को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा का आरोप है कि इसमें निजी अनुभवों की जगह राजनीतिक आलोचना की गई है। किताब के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी ने "द हिंदू" अखबार को दिए इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार की वजह से देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बड़ा नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्यधारा के मीडिया पर नियंत्रण है और राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का इस्तेमाल हो रहा है।
इसके अलावा सोनिया गांधी ने 1975 में लागू की गई इमरजेंसी के संवैधानिक आधार का भी समर्थन किया था। इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि वे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर की इमरजेंसी को सही ठहराने की कोशिश कर रही हैं।
अब तक सोनिया गांधी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से दूर रही थीं। उनके बयान और संदेश मुख्य रूप से कांग्रेस के आधिकारिक "एक्स" अकाउंट से जारी होते थे। किताब के प्रकाशन के मौके पर उन्होंने "एक्स" और इंस्टाग्राम पर सक्रिय होना शुरू किया है। इसलिए उनके सार्वजनिक संवाद में आए इस बदलाव को अहम माना जा रहा है।


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