बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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हूथी बंडखोरों का दावा: सऊदी के रास तनुरा तेल प्लांट पर मिसाइल दागी, ब्रेंट 115 डॉलर के पार

हूथी बंडखोरों का दावा: सऊदी के रास तनुरा तेल प्लांट पर मिसाइल दागी, ब्रेंट 115 डॉलर के पार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

येमन के हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के रास तनुरा तेल रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया है। सऊदी प्रशासन ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

मध्यपूर्व में चल रहा संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिख रहा है और उसका असर अब दुनिया के तेल बाजार पर पड़ने लगा है। यमन के हूथी बाग़ियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के अहम रास तनुरा तेल शोधन परियोजना पर मिसाइल हमला किया है। हालांकि इस खास हमले की सऊदी प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। कच्चे तेल के दाम चढ़ने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का संकट आने का डर जताया जा रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह हालात चिंता की बात हो सकते हैं।

हूथी बाग़ियों का कहना है कि उन्होंने सऊदी अरब के रास तनुरा तेल शोधन परियोजना पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी। यह परियोजना फ़ारस की खाड़ी के किनारे है और सऊदी अरब की ऊर्जा व्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। यहां रोजाना करीब 5 लाख 50 हजार बैरल कच्चे तेल की प्रोसेसिंग होती है।

इसी वजह से इस जगह की सुरक्षा का खास महत्व है। हमले के दावे के बाद तेल परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। चिंता जताई जा रही है कि ऊर्जा सप्लाई बिगाड़ने के मकसद से अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है।

हमले की खबर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती दिखीं। ब्रेंट क्रूड का भाव प्रति बैरल 115 डॉलर के आगे निकल गया, जिससे तेल बाजार में फिक्र का माहौल है। मध्यपूर्व से दुनिया के कई देशों को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल जाता है।

इसलिए इस इलाके में किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर तेल के दामों पर पड़ता है। जब सप्लाई रुकने का डर पैदा होता है तो व्यापारी और निवेशक तेल खरीदने की तरफ ज्यादा झुकते हैं। नतीजा यह होता है कि दाम अचानक ऊपर जा सकते हैं।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में बाहर से मंगाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ें तो देश का आयात खर्च भी बढ़ जाता है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और ढुलाई के खर्च पर पड़ने की गुंजाइश रहती है। ढुलाई महंगी हुई तो अनाज, सब्जी और जरूरी चीजों के दामों पर भी दबाव बन सकता है।

दूसरी तरफ, अगर मध्यपूर्व का संघर्ष और बढ़ा तो दुनिया की तेल सप्लाई का हिसाब बिगड़ सकता है। इसी वजह से सऊदी अरब के हालात और तेल बाजार की हर हरकत पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

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