शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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खर्गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव रखा, मॉक संसद में गिनाए छह आरोप

खर्गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव रखा, मॉक संसद में गिनाए छह आरोप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने शनिवार को इंडिया गठबंधन के प्रतीकात्मक कार्यक्रम में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग रखी।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खर्गे ने शनिवार (31 अक्टूबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग का प्रस्ताव रखा। मौका था इंडिया गठबंधन के प्रतीकात्मक कार्यक्रम "जनता का महाभियोग" का। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में खर्गे के घर पर एक मॉक पार्लमेंट की शक्ल में हुआ।

इस मॉक पार्लमेंट में खर्गे ने ज्ञानेश कुमार पर छह आरोप लगाए। उनके मुताबिक पहला आरोप यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावों में हेराफेरी की साजिश रची। दूसरा, 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए। तीसरा, ECINET के जरिए वोटर लिस्ट पर कंट्रोल एक जगह जमा कर लिया गया। चौथा, संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म 6 में फेरबदल किया गया। पांचवां, बाकी दो चुनाव आयुक्तों को फैसले की प्रक्रिया से दूर रखा गया। और छठा आरोप यह कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के निर्देश पर काम कर रहे हैं।

केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए खर्गे ने कहा, "2014 से सत्ता पाने और उसे बनाए रखने के लिए हर तरह की कोशिश की गई। सांसदों को खरीदा गया, राजनीतिक पार्टियां तोड़ी गईं, सरकारें गिराई गईं। इलेक्टोरल बॉन्ड, ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल हुआ। अब वोट की चोरी की जा रही है। हमारे पास वोट चोरी के सैकड़ों उदाहरण हैं।"

खर्गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर भी ऐतराज जताया। उनका आरोप है कि यह कानून दिसंबर 2023 में उस वक्त पास हुआ, जब विपक्ष के 145 सांसद सस्पेंड थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून की वजह से चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा मिल जाती है।

अपने भाषण की शुरुआत खर्गे ने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करके की। उन्होंने कहा कि संविधान ने नागरिकों को वोट देने का अधिकार दिया है, लेकिन उनका आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को यह अधिकार मंजूर नहीं था।

खर्गे ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर हमारे मन में कोई निजी गुस्सा नहीं है। हमें सिर्फ निष्पक्ष चुनाव चाहिए। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री के निर्देशों के हिसाब से काम कर रहे हैं।"

उन्होंने साफ किया कि आज वोट देने का अधिकार खतरे में है और लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष अपनी पूरी ताकत लगा देगा। इंडिया गठबंधन का यह प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए रखा गया था।

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