गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:02 IST

वेस्ट बैंक विवाद पर ब्रिटेन के प्रतिबंधों से भड़का इस्रायल, लंदन के खिलाफ 4 कड़े फैसले लिए

वेस्ट बैंक की बस्तियों से जुड़े व्यापार पर ब्रिटेन के प्रतिबंध के जवाब में इस्रायल ने जेरुसलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया और 12 ब्रिटिश सांसदों के इस्रायल आने पर रोक लगा दी।

वेस्ट बैंक विवाद पर ब्रिटेन के प्रतिबंधों से भड़का इस्रायल, लंदन के खिलाफ 4 कड़े फैसले लिए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मिडिल ईस्ट का तनाव अब सिर्फ जंग के मैदान तक सीमित नहीं रहा, इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखने लगा है। वेस्ट बैंक में बसी इस्रायली बस्तियों के साथ होने वाले व्यापार पर ब्रिटेन ने अचानक आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, जिससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की सरकार बुरी तरह भड़क गई। इसके जवाब में इस्रायल ने लंदन के खिलाफ चार बड़े और सख्त कूटनीतिक फैसले लिए हैं। इन कदमों के बाद दोनों देशों के बीच दशकों पुराने कूटनीतिक और सैन्य रिश्ते एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गए हैं।

इस्रायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की पूरी मंजूरी के साथ इन फैसलों का औपचारिक ऐलान किया। इस्रायली विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि जेरुसलम इस्रायल की अखंड राजधानी है, और शहर में किसी भी विदेशी कूटनीतिक गतिविधि को इस्रायल की संप्रभुता और अधिकार का सम्मान करना ही होगा। इस्रायल का आरोप है कि ब्रिटेन का यह रवैया उसके आंतरिक मामलों में सीधा दखल है और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।

ब्रिटेन के प्रतिबंधों के जवाब में नेतान्याहू सरकार ने जो चार कदम उठाए हैं, वे इस तरह हैं। पहला, पूर्वी जेरुसलम में चल रहे ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया गया है। यह दूतावास फिलिस्तीनी प्राधिकरण से सीधे संपर्क साधने के काम आता था। दूसरा, किरयात गाट में चल रहे गाजा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समन्वय और मदद अभियान से ब्रिटिश प्रतिनिधियों को निकाल बाहर किया गया है और उन्हें आगे इसमें शामिल होने से रोक दिया गया है। तीसरा, रामल्ला में मौजूद ब्रिटिश सपोर्ट टीम फिलिस्तीनी प्राधिकरण के सुरक्षा दलों को जो सैन्य और सुरक्षा ट्रेनिंग दे रही थी, उसे तुरंत रोक दिया गया है। चौथा, ब्रिटेन की लेबर पार्टी के पूर्व नेता जेरेमी कॉर्बिन, सांसद झारा सुल्ताना और डायने एबॉट समेत 12 प्रमुख ब्रिटिश राजनेताओं और नागरिकों के इस्रायल में घुसने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ब्रिटेन की संसद में विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने वेस्ट बैंक की इस्रायली बस्तियों से आने वाले हर तरह के सामान के आयात पर कानूनी रोक लगाने का ऐलान किया। मिलिबैंड ने संसद में सीधा आरोप लगाया कि वेस्ट बैंक में इस्रायली बसने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ हिंसा कर रहे हैं और वहां के हालात 'नस्लीय सफाई' जैसे बनते जा रहे हैं। ब्रिटेन के इस कड़े रुख के बाद फ्रांस, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन समेत 12 पश्चिमी देशों ने भी साथ आकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें वेस्ट बैंक में इस्रायली बस्तियों का विस्तार तुरंत रोकने और फिलिस्तीनियों पर हिंसा बंद करने की मांग की गई।

इस्रायल ने पश्चिमी देशों के इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री गिडियन सार ने ब्रिटेन के आरोपों को झूठा, भड़काऊ और हकीकत से परे बताया। सार ने यह भी आरोप लगाया कि इस्रायल में अक्टूबर 2026 में होने वाले संसदीय चुनाव को प्रभावित करने और इस्रायली राजनीति में दखल देने के लिए ही ब्रिटिश सरकार ने यह पूरा मामला खड़ा किया है। नेतान्याहू सरकार वेस्ट बैंक को, जिसे इस्रायल में जुडिया और समारिया कहा जाता है, यहूदी संस्कृति का ऐतिहासिक और अभिन्न हिस्सा मानती है और E1 इलाके समेत पूरे क्षेत्र में नए घर और बस्तियां बनाने की अपनी नीति पर कायम है। ऐसे में ब्रिटेन के व्यापारिक प्रतिबंध और इस्रायल के कड़े जवाब के बाद आने वाले दिनों में यूरोप और इस्रायल के रिश्ते और बिगड़ने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।

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