हसन मुश्रीफ पर ईडी की कार्रवाई बंद करने की मांग, सचिन सावंत ने भाजपा से पूछे सवाल
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ईडी ने मुश्रीफ पर पीएमएलए की कार्रवाई बंद करने की मांग की। कांग्रेस के सचिन सावंत ने कहा कि मोदी सरकार जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल करती है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और राज्य के मंत्री हसन मुश्रीफ पर पीएमएलए के तहत चल रही कार्रवाई को बंद करने की मांग ईडी की ओर से की गई है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने एक बार फिर आरोप लगाया है कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करती है।
इसी बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और तेलंगाना के सह-प्रभारी सचिन सावंत ने भाजपा पर टीका-टिप्पणी की। सावंत का गंभीर आरोप है कि विपक्ष को बदनाम करने और उसे सत्ता के सामने झुकाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का खुलेआम गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
सावंत ने कहा, "मोदी सरकार जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल करती है, यह एक बार फिर साफ हो गया है। राज्य के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता हसन मुश्रीफ पर पीएमएलए के तहत चल रही कार्रवाई को बंद करने की मांग खुद ईडी ने अदालत में की और मुश्रीफ व उनके परिवार को राहत दी। विपक्ष के लोगों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाना और वही लोग भाजपा के साथ आ जाएं तो उन्हें साफ कर देना, यही मोदी सरकार की वॉशिंग मशीन राजनीति की असली पहचान है।"
उन्होंने आरोप लगाया, "पिछले बारह साल से मोदी सरकार विपक्ष को बदनाम करने, उनका राजनीतिक उत्पीड़न करने और उन्हें सत्ता के सामने झुकाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का खुलेआम गलत इस्तेमाल कर रही है। हसन मुश्रीफ ने सरेंडर किया, राष्ट्रवादी कांग्रेस महायुति में शामिल हुई और तुरंत भाजपा की वॉशिंग मशीन चालू हो गई। उन पर गंभीर आरोप लगाए गए और अब वही अचानक साफ हो गए। अगर हसन मुश्रीफ विपक्ष में होते, तो क्या उन्हें यही राहत मिलती?" सावंत ने यह भी पूछा कि किरीट सोमैया आज चुप क्यों हैं और उनके आरोपों की फाइल अब कहां गई।
सावंत ने आगे कहा, "विपक्षी दलों के नेताओं पर बेहिसाब आरोप लगाकर उनके खिलाफ फौरन कार्रवाई के लिए जांच एजेंसियों पर दबाव डाला जाता है। लेकिन वही नेता सत्ताधारी गठबंधन में शामिल हो जाएं तो उन पर कार्रवाई की रफ्तार अचानक धीमी पड़ जाती है या कार्रवाई ही वापस ले ली जाती है। यह संयोग नहीं, बल्कि मोदी सरकार की राजनीति में वॉशिंग मशीन संस्कृति का साफ उदाहरण है।"
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर सावंत ने कहा, "देश के हित और भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है। पिछले बारह साल में इन एजेंसियों की कार्रवाइयों में अदालत में दोष सिद्ध होने का प्रमाण बहुत ही कम रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन कार्रवाइयों का असली मकसद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई है या विपक्ष का राजनीतिक उत्पीड़न। इन एजेंसियों पर होने वाला खर्च जनता के टैक्स से होता है। जनता के पैसे से चलने वाली संस्थाओं का इस्तेमाल सत्ता की राजनीति साधने के लिए नहीं, बल्कि निष्पक्ष तरीके से कानून लागू करने के लिए होना चाहिए।"
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