गोसेखुर्द धरण पूरा भरा, सूखे जैसे हालात में पूर्व विदर्भ के चार जिलों को राहत
गोसेखुर्द धरण मंगलवार को अंतिम जलस्तर 245.50 मीटर तक पहुंचा; भंडारा, नागपुर, चंद्रपुर और गडचिरोली के पानी के नियोजन को सहारा मिलेगा।
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इस साल औसत से कम बारिश हुई है और इसी वजह से राज्य में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। ऐसे में पीने के पानी, खेती और मवेशियों के लिए पानी का हिसाब पहले से बैठाना जरूरी हो गया है। इसी बीच पूर्व विदर्भ के लिए अहम गोसेखुर्द बांध मंगलवार को अपने अंतिम जलस्तर तक पहुंच गया।
बांध में पानी का स्तर 245.50 मीटर तक पहुंचा है। इससे भंडारा, नागपुर, चंद्रपुर और गडचिरोली जिलों के आगे के पानी के प्रबंधन को राहत मिलने की उम्मीद है।
इस साल राज्य में औसत से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मानसून खत्म होने के बाद अगली बारिश के लिए जून 2027 तक इंतजार करना पड़ेगा। इतने लंबे वक्त में पीने के पानी, खेती और जानवरों की जरूरत पूरी करने के लिए जो भी पानी जमा है, उसका सोच समझकर प्रबंधन करना बहुत अहम होगा। इसी वजह से गोसेखुर्द बांध में पानी रोकने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए बांध के सभी 33 गेट बंद रखे गए थे।
बांध पूरा भरने के बाद बैकवॉटर बांध के आसपास के कुछ गांवों की सीमा तक पहुंच गया है। इसलिए जमा पानी का प्रबंधन करते वक्त संभावित बाढ़ की स्थिति और लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ेगा।
इससे पहले 2022 में भी बांध को अंतिम स्तर तक भरने का प्रयोग किया गया था। उस वक्त वैनगंगा के इलाके के कुछ हिस्से, भंडारा शहर से सटी बस्तियां, गांव और श्मशान घाट पानी में डूब गई थीं। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पानी चरणों में, यानी थोड़ा थोड़ा करके छोड़ने की योजना बनाई जाएगी।
बांध के अंतिम स्तर तक पहुंचने के बाद आगे की योजना के लिए गोसेखुर्द परियोजना के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। इस बैठक में तीन बातों पर जोर रहेगा: आपदा प्रबंधन, सिंचाई और पीने के पानी का प्रबंधन। आपदा प्रबंधन अधिकारी अभिषेक नामदास ने बताया कि बैकवॉटर से बनने वाली बाढ़ जैसी स्थिति को टालने के लिए जरूरत के हिसाब से पानी छोड़ा जाएगा, फिर भी 245.50 मीटर का स्तर कायम रखने की योजना है।
बांध भरने से पानी की उपलब्धता जरूर बढ़ी है, लेकिन अगले महीनों में कितना पानी और किन जरूरतों के लिए इस्तेमाल होगा, यह प्रबंधन सबसे अहम रहेगा। पीने के पानी को पहली प्राथमिकता देते हुए खेती, मवेशियों और संभावित बाढ़ के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।