गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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गोंदिया जिला परिषद में ग्रामपंचायत अधिकारी यूनियन की मांगों पर CEO की बैठक, कई निर्देश जारी

शहर PT24 टीम

महाराष्ट्र राज्य ग्रामपंचायत अधिकारी युनियन की गोंदिया शाखा की मांगों पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कक्ष में शिकायत निवारण समिति की बैठक हुई।

गोंदिया, 5 नवंबर: महाराष्ट्र राज्य ग्रामपंचायत अधिकारी युनियन की जिला शाखा गोंदिया ने सेवा और प्रशासन से जुड़े कई अटके हुए सवालों को लेकर निवेदन दिया था। प्रशासन ने इस निवेदन पर गौर किया है। युनियन के जिलाध्यक्ष कमलेश बिसेन की मांग पर जिला परिषद गोंदिया में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कक्ष में शिकायत निवारण समिति की अहम बैठक हुई। बैठक में संगठन की पेंडिंग मांगों पर प्रशासन ने सकारात्मक चर्चा की और कई निर्देश दिए।

बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनित चंद्र दोनतुला मौजूद थे। उनके साथ उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (सामान्य प्रशासन) फनिंद्र कुत्तीरकर, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (पंचायत) मधुकर वासनिक, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिजित गोल्हार, लेखा अधिकारी पंधरे, सहायक खंड विकास अधिकारी वैद्य, कक्ष अधिकारी गुणवंत ठाकूर और वरिष्ठ सहायक पकंज पटेल भी शामिल हुए। युनियन के पदाधिकारी भी हाजिर थे।

ठेके पर काम कर रहे ग्रामपंचायत अधिकारियों के बारे में निर्देश दिया गया कि उन्हें तुरंत सेवा निरंतरता के आदेश जारी किए जाएं और उनका वेतन नियमित व वक्त पर दिया जाए।

वरिष्ठता सूची को लेकर तय हुआ कि 2004 में भर्ती हुए ग्रामपंचायत अधिकारियों की सूची को 2005 की संशोधित सूची की तर्ज पर जांचकर सुधारा जाए। साथ ही संबंधित कर्मचारियों की फाइलें गहरी जांच के लिए पेश करने को कहा गया।

दिव्यांग पदोन्नति के सवाल पर लोकोमोटर और क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल कंडिशन वर्गों की पात्रता के बारे में सक्षम स्तर से मार्गदर्शन मांगने का फैसला हुआ। जब तक मार्गदर्शन नहीं मिलता, तब तक विस्तार अधिकारी (पंचायत) संवर्ग में दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित एक पद की पदोन्नति रोककर रखने का निर्देश दिया गया।

टीडीएस कटौती पर भी साफ बात कही गई। ग्रामपंचायत 'टीडीएस डिडक्टर' है, इसलिए जिला परिषद स्तर से निर्माण के बिल में से टीडीएस नहीं काटा जाए और पूरा बिल ग्रामपंचायत को दिया जाए। नियम के मुताबिक टीडीएस कटौती की आगे की कार्रवाई ग्रामपंचायत ही करेगी।

पदनाम को लेकर बताया गया कि ग्रामसेवक और ग्रामविकास अधिकारी के पद मिलाकर अब 'ग्रामपंचायत अधिकारी' नाम का एक ही पद बना है। इसलिए सभी सरकारी परिपत्रों, आदेशों और पत्रव्यवहार में यही अधिकृत पदनाम इस्तेमाल करने का परिपत्र निकालने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा कालबद्ध पदोन्नति, अटके हुए बिल और अतिरिक्त प्रभार के लिए मानदेय पर जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया। ऑनलाइन कामकाज, ई-निविदा और सरकारी योजनाओं पर अमल के लिए कर्मचारियों को जरूरी ट्रेनिंग देने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

कई सालों से लटके सवालों पर जिला परिषद प्रशासन का रुख सकारात्मक रहने से ग्रामपंचायत अधिकारी संवर्ग में संतोष का माहौल है। जिलाध्यक्ष कमलेश बिसेन ने उम्मीद जताई कि इन फैसलों पर असल में अमल हो और सभी सवाल तय समय सीमा में निपटाए जाएं।

बैठक में जिला संगठन के पदाधिकारी कमलेश बिसेन (अध्यक्ष), कुलदीप कापगते (महासचिव), सचिन कुथे, भारती वाघमारे (उपाध्यक्ष), शैलेश परिहार (कोषाध्यक्ष), योगेश रुद्रकार (सहसचिव), योगराज बिसेन, रजनी सहारे (राज्य काउंसिलर), रामेश्वर जमईवार (प्रचार प्रमुख), रितेश सहारे, सुरेश वाघमारे, टिकाराम जनबंधू (जिला संगठक), प्रदीप ठाकरे, किशोर आचले (कानूनी सलाहकार), नरेंद्र गोमाशे और नम्रता रंगारी (जिला संयोजक) मौजूद थे। तालुका अध्यक्ष ओमेंद्रकुमार रहांगडाले, पांडुरंग हरीणखेडे, संदीप मेंढे, पवनकुमार पवार, तारेश कुबडे, शिवाजी राठोड, योगेंद्र कटरे और शैलेश परिहार भी आए। तालुका सचिव दीपककुमार रेवतकर, अरविंद साखरे, ओमेश्वर कापगते, तोताराम निमजे, रवींद्र अंबादे, राजेश रामटेके, सरिता ब्रह्मावंशी, सुमेध बनसोड, कुणाल मेश्राम और कुणाल रहांगडाले समेत दूसरे पदाधिकारी भी हाजिर थे।

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