जिला परिषद के प्रमोटेड हेडमास्टरों को साल में 15 दिन की अर्जित छुट्टी, नया आदेश जारी
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ग्रामविकास विभाग के संशोधित सरकारी आदेश के मुताबिक 1 जनवरी 2023 से लागू होगा फायदा, लेकिन छुट्टी का नकदीकरण नहीं हो सकेगा।
जिला परिषद की प्राथमिक स्कूलों में प्रमोशन पाकर हेडमास्टर बने शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। गर्मी और दिवाली की लंबी छुट्टियों में भी ये हेडमास्टर स्कूल का दफ्तरी काम, सरकारी रिपोर्ट और दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते हैं। अब उन्हें साल में 15 दिन की अर्जित छुट्टी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस बारे में संशोधित सरकारी आदेश जारी किया है।
इस निर्णय पर अमल 1 जनवरी 2023 से किया जाएगा। यानी हेडमास्टरों को पिछले समय का फायदा भी मिलेगा। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि इस छुट्टी का नकदीकरण नहीं किया जा सकेगा। मिलने वाले 15 दिन छुट्टी के तौर पर ही इस्तेमाल करने होंगे, उनके बदले पैसे नहीं मिलेंगे। यह निर्णय वित्त विभाग की व्यय-15 और सेवा-6 शाखाओं की सहमति लेने के बाद जारी हुआ है।
पीछे की बात यह है कि वित्त विभाग के 6 दिसंबर 1996 के सरकारी आदेश में जिला परिषद की प्राथमिक स्कूलों के प्रमोटेड हेडमास्टर का पद ऐसा पद घोषित किया गया था, जिस पर लंबी छुट्टियों में भी ड्यूटी रहती है। इसलिए छुट्टियों में किए जाने वाले काम के बदले अर्जित छुट्टी दी जाए, यह मांग लगातार उठ रही थी। इसी के तहत सरकार ने 6 दिसंबर 2022 को एक निर्णय भी निकाला था। लेकिन अर्जित छुट्टी के नकदीकरण को लेकर स्पष्टता नहीं थी, इसलिए वह निर्णय अब रद्द कर दिया गया है और उसकी जगह संशोधित आदेश आया है।
महाराष्ट्र सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1981 के नियम 54 (2) (ए) के हिसाब से हर कैलेंडर वर्ष में 15 दिन की अर्जित छुट्टी मंजूर की गई है। इसके लिए हेडमास्टर से उम्मीद है कि वे लंबी छुट्टियों के दौरान कम से कम 30 दिन दफ्तर में हाजिर रहकर काम करें। पर जब कोई काम ही न हो, तब सिर्फ हाजिरी दिखाने के लिए स्कूल बुलाने की जबरदस्ती नहीं की जा सकती। और अगर कोई हाजिर नहीं रहा, तो इस वजह से उसकी तनख्वाह भी नहीं काटी जा सकेगी।
छुट्टियों में जिस दिन स्कूल के दफ्तर का काम हो, उस दिन हाजिरी रजिस्टर पर दस्तखत करना जरूरी है। हाजिरी 30 दिन से कम रही तो उसी अनुपात में अर्जित छुट्टी मिलेगी। छुट्टियों में बिल्कुल गैर-हाजिर रहने पर अर्जित छुट्टी नहीं मिलेगी। स्कूल के जरूरी और अर्जेंट काम समय पर पूरे न करने पर संबंधित हेडमास्टर के खिलाफ खंड शिक्षा अधिकारी या शिक्षा अधिकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकेंगे।
एक और मुद्दा अतिरिक्त पदभार संभालने वाले शिक्षकों का है। राज्य में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की करीब 90 प्रतिशत स्कूलों में योग्य हेडमास्टर ही नहीं हैं। ऐसे में सीनियर शिक्षक अतिरिक्त पदभार संभाल रहे हैं। उन्हें भी प्रमोटेड हेडमास्टरों जितना, बल्कि शिक्षक कम होने की वजह से उनसे ज्यादा काम करना पड़ता है। इसलिए मांग हो रही है कि इन शिक्षकों को भी अर्जित छुट्टी का फायदा दिया जाए।
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