गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण: 231 किमी लाइन के पूरे रूट का सर्वे पूरा, 5,235.79 करोड़ की परियोजना
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना के पूरे मार्ग का सर्वेक्षण हो चुका है। मार्च 2026 में Rs 5,235.79 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस 231 किलोमीटर लंबी परियोजना से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।
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गोंदिया, 17 अक्टूबर 2026: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। मार्च 2026 में यह परियोजना Rs 5,235.79 करोड़ की लागत से मंजूर हुई थी। कुल 231 किलोमीटर लंबी इस लाइन का करीब 213 किलोमीटर हिस्सा मध्यप्रदेश में और 18 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में पड़ता है। इससे दोनों राज्यों के बीच रेल संपर्क को नई मजबूती मिलेगी।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी शेख समी उर रहमान ने इस परियोजना के बारे में कहा, "गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना क्षेत्र के रेल बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल उत्तर और दक्षिण भारत के बीच रेल संपर्क सुदृढ़ होगा, बल्कि बालाघाट, सिवनी, मंडला और जबलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों, किसानों, उद्योगों एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। रेलवे परियोजना को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।"
परियोजना तीन खंडों में होगी: गोंदिया-बालाघाट (42 किमी), बालाघाट-नैनपुर (82.40 किमी) और नैनपुर-जबलपुर (106.80 किमी)। इस रूट पर कुल 23 स्टेशन हैं: गोंदिया, प्रतापबाग, बिरसोला, हट्टा रोड, बालाघाट, धापेवाड़ा, समनापुर, चारेगांव, लामटा, नगरवाड़ा, पाद्रीगंज, नैनपुर, पिंडरई, निधानी, घंसौर, बिनैकी, शिकारा, सुकरीमंगेला, बरगी, चारघाट पिपरिया, ग्वारीघाट, गढ़ा और कछपुरा।
तैयारियों के तहत पूरे मार्ग का सर्वे पूरा कर लिया गया है। कुल 507 पुल बनाने का प्रस्ताव है और लगभग सभी के सामान्य व्यवस्था आरेख तैयार हो चुके हैं। 23 में से 21 स्टेशनों के यार्ड प्लान बन गए हैं, बाकी पर काम चल रहा है। परियोजना में 10 नए स्टेशन भवन बनेंगे और 31 जगहों पर बिजली, पानी समेत दूसरी उपयोगिता सेवाएं हटाकर दूसरी जगह ले जाई जाएंगी।
निजी जमीन का अधिग्रहण, सरकारी जमीन का हस्तांतरण और वन्यजीव से जुड़ी मंजूरियों की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। बालाघाट-नैनपुर और नैनपुर-जबलपुर खंडों के काम की निविदा वन एवं वन्यजीव संबंधी मंजूरियां मिलने के बाद जारी की जाएगी।
दोहरीकरण से लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। ज्यादा यात्री और मालगाड़ियां चल सकेंगी, परिचालन में रुकावट नहीं आएगी और ट्रेनों की समयबद्धता भी बढ़ेगी। यह रेलखंड गोंदिया में हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग से और जबलपुर में इटारसी-वाराणसी रेलमार्ग से जुड़ता है। इस तरह यह वाराणसी और प्रयागराज को चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद से जोड़ने वाला सबसे छोटा रेल मार्ग है।
परियोजना पूरी होने पर इस रेलखंड से हर साल लगभग 7.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बनेगी। रेल परिवहन के किफायती और पर्यावरण के अनुकूल होने से हर साल लगभग Rs 350 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत बचाने में मदद मिलेगी। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में हर साल लगभग 16 करोड़ किलोग्राम की कमी आने का अनुमान है, जो लगभग 63 लाख पेड़ लगाने के बराबर है। निर्माण के दौरान लगभग 78 लाख मानव दिवस का रोजगार बनने की संभावना है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में वन्यजीव अंडरपास और फेंसिंग का प्रावधान रखा गया है।
इस परियोजना से महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के बालाघाट, सिवनी, मंडला और जबलपुर जिलों को सीधा फायदा मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, पेंच टाइगर रिजर्व और धुआंधार जलप्रपात तक पहुंचना आसान होगा। अयोध्या धाम, वाराणसी, प्रयागराज, रामेश्वरम और मदुरै जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा भी ज्यादा सुविधाजनक हो सकेगी। क्षेत्र के बिजली संयंत्रों, आयुध निर्माणी और खदानों को भी बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिससे औद्योगिक गतिविधियों, माल परिवहन और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।