शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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गोकुल अध्यक्ष चुनाव का विवाद दिल्ली पहुंचा; राहुल गांधी के आरोपों पर चंद्रशेखर बावनकुळे का जवाब

गोकुल अध्यक्ष चुनाव का विवाद दिल्ली पहुंचा; राहुल गांधी के आरोपों पर चंद्रशेखर बावनकुळे का जवाब
चंद्रशेखर बावनकुळे | फाइल फोटो | ABP Majha
PT24 टीम

गोकुल में 4 सरकार नियुक्त निदेशकों की नियुक्ति पर राहुल गांधी ने मतचोरी का आरोप लगाया, बावनकुळे ने जवाब दिया और रोहित पवार ने भी निशाना साधा।

कोल्हापुर में गोकुल के अध्यक्ष चुनाव को लेकर राजनीति गरमा गई है। चुनाव में 13 निदेशक जीतकर आए, फिर भी अध्यक्ष की कुर्सी सतेज पाटील के समान विचार वाले गठबंधन को नहीं मिली। ऊपर से सरकार ने गोकुल में 4 सरकार नियुक्त निदेशक नियुक्त कर दिए हैं। सरकार के दखल का यह मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतचोरी को लेकर सत्ताधारी पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने भी जोरदार जवाब दिया है।

बावनकुळे ने कहा, "गोकुल का फैसला और मांग को देखते हुए सहकारिता मंत्री और प्रभारी मंत्री हसन मुश्रीफ ने शायद यह फैसला लिया होगा, ताकि राज्य सरकार के सहायक काम, गोकुल को की गई मदद और राज्य सरकार से मिलने वाले सहयोग के लिए सरकार और चुनी हुई समिति के बीच तालमेल बने।"

नागपुर में भाजपा की लोकतंत्र बचाओ यात्रा के बारे में बावनकुळे बोले, "राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की साजिश को नाकाम करने और लोगों को जागरूक करने के लिए यह रैली रखी गई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हजारों नागरिक रैली में आएंगे। राहुल गांधी को एक ठोस जवाब दिया जाएगा।"

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया, फिर भाजपा ने चुनाव के नियम ही बदल दिए। उनके मुताबिक 4 सरकार नियुक्त निदेशक घुसाए गए और 12 निदेशकों की संख्या 16 करके कथित तौर पर बहुमत की चोरी की गई। यह दूध उत्पादकों की चोरी है और भाजपा ने जनादेश में मिलावट की है। उन्होंने पूछा कि भाजपा इतनी निराश क्यों है, और कहा कि सत्ता बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जा रहे हैं। दूध उत्पादक मत चुराने वालों को याद रखें, किसान भूलता नहीं।

रोहित पवार ने कहा, "गोकुल के चुनाव में साढ़े पांच लाख सभासदों ने जो जनमत दिया, उसे किनारे कर सरकारी सदस्य नियुक्त करके गोकुल को कब्जे में लेने की चाल को 'विनाशकाले विपरीत बुद्धि' ही कहना पड़ेगा। नतीजे के दिन कोल्हापुर में रहकर जुलूस नहीं निकाल पाए, इसलिए अहं को ठेस लगी हो, तो क्या सरकारी सदस्य नियुक्त करके जनमत से छेड़छाड़ की जाएगी? सरकार का यह फैसला अराजकता है। गोकुल का मुद्दा सिर्फ बंटी पाटील और कोल्हापुर तक सीमित नहीं है, यह लोकतंत्र और संविधान पर भरोसा रखने वाले हर व्यक्ति का है। आज गोकुल में बेईमानी का खेल खेला गया, कल लोकसभा चुनाव हारने पर भी खेलेंगे। इसलिए ऐसे जहरीले सांपों को अभी कुचलना चाहिए। जिस दिन अध्यक्ष का चुनाव होगा, उस दिन सभी लोकतंत्र प्रेमी और संविधान प्रेमी नागरिकों को गोकुल का घेराव करके जनमत की ताकत मुंबई से दिल्ली तक दिखा देनी चाहिए। गोकुल के सभासदों और बंटी पाटील के साथ पूरा महाराष्ट्र मजबूती से खड़ा है।"

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