गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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गोकुल में चार संचालक नियुक्त न होते तो दोबारा चुनाव होता, फडणवीस ने बताई वजह

गोकुल में चार संचालक नियुक्त न होते तो दोबारा चुनाव होता, फडणवीस ने बताई वजह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

गोकुल दूध संघ में सरकार के चार संचालक नियुक्त करने पर विपक्ष आक्रामक है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूत्रों के मुताबिक इसकी वजह बताई है।

गोकुल दूध संघ का मुद्दा इन दिनों राज्य की राजनीति में गरमाया हुआ है। राज्य सरकार ने संघ में चार संचालक नियुक्त करने का फैसला किया, जिसके बाद विरोधी काफी आक्रामक हो गए हैं। विधायक सतेज पाटील इस मामले में बार-बार सरकार को घेर रहे हैं। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की इस पर पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक फडणवीस ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अगर गोकुल में संचालक नियुक्त नहीं किए जाते, तो दोबारा चुनाव कराना पड़ता।

पूरा मामला यह है कि गोकुल दूध संघ के चुनाव में किसी भी गुट को साफ बहुमत नहीं मिला। इस वजह से चेयरमैन के चुनाव में बड़ी अड़चन खड़ी हो गई। इसी हालात में सरकार ने चार संचालक नियुक्त करने का फैसला लिया, और इसी फैसले से राजनीतिक विवाद शुरू हुआ।

संघ की कुल सदस्य संख्या 25 है। बताया जा रहा है कि चेयरमैन चुनने के लिए 14 सदस्यों का कोरम जरूरी है। सतेज पाटील के गुट के पास 13 सदस्य हैं, जबकि महायुति के पास 12 सदस्य हैं। किसी के पास भी जरूरी संख्याबल नहीं था, इसलिए चेयरमैन चुनाव की बैठक में दिक्कत आई। बैठक में पर्याप्त सदस्य मौजूद नहीं थे, सो चुनाव की प्रक्रिया अटक गई।

सरकार का कहना है कि यह गतिरोध बना रहता तो आगे चलकर चुनाव या प्रशासक नियुक्त करने की नौबत आ सकती थी। इसीलिए चार संचालक नियुक्त करने का फैसला किया गया। सूत्रों का कहना है कि फडणवीस ने साफ किया कि यह फैसला एडवोकेट जनरल की राय को ध्यान में रखकर ही लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक फडणवीस ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। राहुल गांधी ने गोकुल के चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर वोट चोरी का आरोप लगाया था। बताया गया है कि इस पर फडणवीस ने नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि गोकुल में साढ़े चार हजार मतदाता हैं और ऐसे में राहुल गांधी का इस पर ट्वीट करना बताता है कि यह विषय कितना छोटा है। ऐसा उनके हवाले से समझा जा रहा है।

सरकार का फैसला कानूनी है या नहीं, इस पर अब राजनीतिक संघर्ष और बढ़ने की संभावना है। विरोधियों का आरोप है कि चुनाव में बहुमत नहीं मिल पाया, इसलिए सरकार नियुक्तियों के जरिए गोकुल पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है।

अब पूरे राज्य की नजर इस पर है कि गोकुल का चेयरमैन कौन बनेगा, सरकार का फैसला टिकेगा या नहीं, और सतेज पाटील आगे क्या रुख अपनाएंगे।

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