गिरगाव चौपाटी पर 13 दिसंबर के जन्मोत्सव को लेकर आयोजकों को कानूनी नोटिस
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
गिरगाव चौपाटी पर प्रस्तावित 'प्रभु येशु जन्मोत्सव 2026' की परमिशन, पर्यावरण नियम और फंड के हिसाब पर कानूनी नोटिस भेजा गया है। आयोजकों से सात दिन में लिखित जवाब मांगा गया है।
मुंबई की गिरगाव चौपाटी पर क्रिसमस के मौके पर हर साल प्रभु येशु का जन्मोत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस बार 13 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित 'प्रभु येशु जन्मोत्सव 2026' कार्यक्रम को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम के लिए जरूरी परमिशन, पर्यावरण नियमों का पालन, पब्लिक की सुरक्षा और फंड जुटाने में पारदर्शिता को लेकर कानूनी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
यह नोटिस अविनाश पंचाल की तरफ से अधिवक्ता पंकज पी. मानेकर ने भेजा है। इसमें आयोजन से जुड़े लोगों, संस्थाओं और पदाधिकारियों से कई मुद्दों पर सफाई मांगी गई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि जरूरी कानूनी परमिशन मिलने तक ऐसा आभास न बनाया जाए कि कार्यक्रम को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है, और प्रचार, विज्ञापन व प्रसार रोक दिया जाए। आयोजकों और संस्थाओं से सात दिन के अंदर लिखित जवाब देने को कहा गया है।
नोटिस में बिशप ऐलन रॉकी एंथनी, बिशप ऑगस्टस एंथनी, पास्टर विपिन मैसी, पास्टर शुभम कुमार, Furtados Music India Pvt. Ltd. और RESOUND Band के नाम हैं। इनके साथ अब्राहम मथाई का भी जिक्र है। नोटिस के मुताबिक अब्राहम मथाई हार्मनी फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं और प्रभु येशु जन्मोत्सव समिति से जुड़े पदाधिकारी हैं। हार्मनी फाउंडेशन और प्रभु येशु जन्मोत्सव समिति 2026 का नाम भी नोटिस में है। कार्यक्रम में हर किसी की भूमिका, परमिशन, प्रायोजन और फंड जुटाने के इंतजाम की जानकारी मांगी गई है।
गिरगाव चौपाटी सार्वजनिक समुद्र तट का इलाका है, इसलिए यहां बड़ा कार्यक्रम करते वक्त तटीय नियमन क्षेत्र यानी CRZ के नियमों का पालन जरूरी है। नोटिस में सवाल उठाया गया है कि इस कार्यक्रम के लिए कौन सी परमिशन चाहिए और क्या वे मिल चुकी हैं। अस्थायी स्टेज, लाउडस्पीकर, जनरेटर, संभावित भीड़, प्लास्टिक का इस्तेमाल और कार्यक्रम के बाद कचरे के निपटारे पर भी चिंता जताई गई है। साथ ही ध्वनि प्रदूषण पर काबू, सीवेज के इंतजाम, पर्यावरण की हिफाजत और तटीय जैव विविधता पर संभावित असर को लेकर आयोजकों ने क्या एहतियात बरता है, इसका ब्योरा भी मांगा गया है।
फंड के मामले में नोटिस कहता है कि दान, टिकट बिक्री, कॉरपोरेट प्रायोजन या कोई और आर्थिक मदद ली जा रही हो, तो उसकी जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने रखी जाए। नोटिस में HDFC Bank और Citibank के खातों और फंड जुटाने से जुड़े आर्थिक इंतजाम का जिक्र है। संबंधित संस्थाओं की कानूनी रजिस्ट्रेशन, फंड लेने के अधिकार, लेन-देन और ऑडिट की जानकारी भी मांगी गई है। हालांकि बैंक खातों का जिक्र होने या फंड पर सवाल उठने का मतलब यह नहीं कि आर्थिक गड़बड़ी साबित हो गई है। इस बारे में संस्थाओं की सफाई और आधिकारिक आर्थिक रिकॉर्ड अहम होंगे।
नोटिस में यह भी पूछा गया है कि कार्यक्रम का स्वरूप असल में क्या है, यानी यह सांस्कृतिक और संगीत महोत्सव है या इसमें दूसरी धार्मिक गतिविधियां भी शामिल हैं। कुछ लोगों और संस्थाओं से जुड़े आरोप और संदर्भ भी इसमें दर्ज हैं, लेकिन उनकी अलग से पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए उन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
नोटिस के हिसाब से, मिलने के सात दिन के भीतर लिखित जवाब में कार्यक्रम के लिए जिम्मेदार कानूनी संस्था, जरूरी सरकारी परमिशन, फंड जुटाने का इंतजाम, प्रायोजन और लागू नियमों के पालन का ब्योरा देना होगा। जरूरी परमिशन और कानूनी पालन साफ होने तक प्रचार पर रोक की मांग भी है। मांगें न मानी गईं तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत और अदालती कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है।
इस मामले में मुंबई जिलाधिकारी कार्यालय, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (MCZMA), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और संबंधित पुलिस की भूमिका अहम हो सकती है। परमिशन ली गई है या नहीं, पर्यावरण नियमों का पालन हो रहा है या नहीं और फंड जुटाने का इंतजाम कानूनी है या नहीं, यह आधिकारिक रिकॉर्ड से साफ होना जरूरी है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।