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गणित से डरते हैं? इसे देखने का नज़रिया बदलिए, विषय आसान लगने लगेगा

गणित से डरते हैं? इसे देखने का नज़रिया बदलिए, विषय आसान लगने लगेगा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

गणित सिर्फ जोड़-घटाव नहीं, दुनिया और कुदरत को समझने का तरीका भी है। नज़रिया बदलने पर यह विषय रोचक और आसान लग सकता है।

स्कूल के दिन याद करें तो ज्यादातर लोगों को सबसे पहले गणित का पीरियड याद आता है। बड़े-बड़े फॉर्मूले, मुश्किल समीकरण, हिसाब-किताब और गणित के एग्जाम का डर आज भी कई लोगों के मन में बैठा है। ज्यादातर स्टूडेंट्स ने गणित को सिर्फ एग्जाम में नंबर लाने वाला विषय माना। लेकिन क्या गणित बस जोड़, घटाव, गुणा और भाग है? या इसके आगे भी गणित की एक अलग दुनिया है? इस पर सोचें तो गणित को देखने का नज़रिया ही बदल सकता है।

गणित स्कूल के कोर्स का एक विषय भर नहीं है। यह दुनिया, कुदरत और ब्रह्मांड को समझने का असरदार जरिया है। वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और दार्शनिकों के मुताबिक गणित एक तरह की वैश्विक भाषा है। जैसे हम हिंदी, मराठी या अंग्रेजी के जरिए अपनी बात कहते हैं, वैसे ही गणित के अंक, चिन्ह, नियम और समीकरणों से कई उलझी हुई बातें साफ समझाई जा सकती हैं।

भाषा विचार और जानकारी जाहिर करने का माध्यम है, और गणित यही काम अलग ढंग से करता है। आम भाषा में शब्द होते हैं, तो गणित में अंक और चिन्ह। भाषा के व्याकरण के नियम होते हैं, वैसे ही गणित के भी तय नियम और सूत्र होते हैं। जिस तरह भाषा में वाक्य बनते हैं, उसी तरह गणित में समीकरण बनाए जाते हैं।

मिसाल के तौर पर 2+2=4 यह समीकरण दुनिया के किसी भी देश में समझा जाता है। भारत, जापान या अमेरिका में भाषा अलग-अलग हो सकती है, पर इस समीकरण का मतलब नहीं बदलता। इसीलिए गणित को भाषा से परे जाने वाला संवाद का माध्यम माना जाता है।

मशहूर वैज्ञानिक गैलिलियो गैलिली ने यह जानी-मानी बात कही थी कि कुदरत की महान किताब गणित की भाषा में लिखी गई है। कुदरत की कई घटनाओं में गणित के नियम और खास पैटर्न दिखते हैं। सूरज का उगना और ढलना, ग्रहों की चाल, समंदर की लहरें, पेड़ की डालियों की बनावट और फूलों की पंखुड़ियों की सजावट, इन सबमें गणित का रिश्ता नज़र आता है। संगीत के ताल और लय का भी गणित से संबंध है। कुदरत की इन रचनाओं और घटनाओं को पढ़ने-समझने के लिए गणित का इस्तेमाल होता है।

दुनिया भर में हजारों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं। एक भाषा की जानकारी दूसरी भाषा में समझने के लिए अनुवादक की जरूरत पड़ती है। मगर गणित की अवधारणाएं और नियम भाषा की हदों से आगे जा सकते हैं।

मान लीजिए भविष्य में पृथ्वी के बाहर किसी ग्रह पर परग्रहवासी मिल जाएं, तो उनसे बात करने के लिए इंसानी भाषा काम आए, यह जरूरी नहीं। लेकिन अभाज्य संख्याओं, बुनियादी गणितीय समीकरणों और पाइथागोरस के प्रमेय जैसी चीजों के जरिए गणित के पैटर्न समझाने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए गणित को मुमकिन वैश्विक संवाद का माध्यम माना जाता है। हालांकि परग्रहवासियों को गणित समझ आता है, या उनसे पक्के तौर पर बात हो सकेगी, यह अभी साबित नहीं हुआ है।

कई स्टूडेंट्स को गणित से डर लगता है। मुश्किल सूत्र और लंबे समीकरण देखकर लगता है कि गणित कठिन है। पर गणित को सिर्फ एग्जाम के नंबर का विषय न मानकर तर्कशक्ति बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में देखने की जरूरत है।

गणित से सोचने का तरीका सुधरता है, समस्याओं का विश्लेषण हो पाता है और सही नतीजे तक पहुंचने की क्षमता बढ़ती है। रोजमर्रा की जिंदगी में पैसों के लेन-देन, वक्त की प्लानिंग, खरीद-बिक्री, दूरी और नाप-जोख जैसी कई चीजों में गणित काम आता है।

यानी गणित सिर्फ हिसाब-किताब या कठिन सूत्रों का खेल नहीं है। कुदरत की बनावट समझने से लेकर अंतरिक्ष में ग्रहों की हलचल पढ़ने तक, गणित की अहम भूमिका है। डर की जगह जिज्ञासा से गणित को देखना शुरू करें, तो यह विषय ज्यादा रोचक और समझने में आसान लग सकता है।

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