MPSC की नौ परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच के लिए राज्य सरकार ने बनाया जांच आयोग
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2023 से 2026 के बीच हुई नौ परीक्षाओं में पेपर लीक और आंसर-की में हेरफेर के आरोपों की जांच रिटायर्ड चीफ जस्टिस दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाला आयोग करेगा।
महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की नौ परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए एक Commission of Inquiry यानी जांच आयोग बना दिया है। ये परीक्षाएं 2023 से 2026 के बीच हुई थीं। पेपर लीक, आंसर-की में हेरफेर और दूसरी गड़बड़ियों के आरोप अब न्यायिक स्तर पर परखे जाएंगे।
आरोप कई बड़ी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े हैं, इसलिए सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, भरोसे और निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। आयोग उन शिकायतों को देखेगा जिनमें पेपर लीक, आंसर-की में हेरफेर और दूसरी तरह की गड़बड़ी की बात है, जिनसे परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों पर असर पड़ा हो सकता है।
आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस दिलीप भोसले कर रहे हैं। आयोग का दफ्तर मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के मुख्यालय की दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर 201 में है। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे को आयोग का सदस्य-सचिव बनाया गया है।
आयोग ने उम्मीदवारों, छात्रों, व्हिसलब्लोअर, आम लोगों और रजिस्टर्ड संस्थाओं से कहा है कि जिनके पास इस मामले की जानकारी या दस्तावेजी सबूत हों, वे 16 नवंबर 2026 से पहले अपने बयान जमा करें। बयान शपथपत्र (affidavit) की शक्ल में होने चाहिए, मराठी या अंग्रेजी में।
जिन नौ परीक्षाओं की जांच होगी, उनमें ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा (ग्रुप B) 2025, महाराष्ट्र ग्रुप-B (नॉन-गैजेटेड) सेवा संयुक्त प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा 2025, महाराष्ट्र ग्रुप-C सेवा संयुक्त प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा 2025 और महाराष्ट्र कृषि सेवा मुख्य परीक्षा 2024 शामिल हैं।
इनके अलावा फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज मुख्य परीक्षा 2023, महाराष्ट्र सिविल इंजीनियरिंग सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और महाराष्ट्र इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की भी जांच होगी। आयोग के अधिकार-क्षेत्र में तय की गई इन परीक्षाओं की संबंधित प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा प्रक्रियाएं भी इसमें आएंगी।
उम्मीद है कि यह जांच किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहेगी। आयोग अलग-अलग परीक्षा चक्रों और भर्ती श्रेणियों में आरोपों को देखेगा। उम्मीदवारों और दूसरे पक्षों के दिए सबूतों की छानबीन करेगा और तय करेगा कि तथ्य साबित करने के लिए गवाहों से और पूछताछ जरूरी है या नहीं।
मुंढे के मुताबिक आयोग पूरी तरह से, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर बयान को सख्त गोपनीयता में रखा जाएगा। उन्होंने उन उम्मीदवारों से, जिन्हें कथित गड़बड़ियों से नुकसान हुआ हो, और भरोसेमंद सबूत रखने वाले लोगों से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आयोग हर दस्तावेज को बारीकी से देखेगा और तय करेगा कि सबूत देने वालों को गवाह के तौर पर बुलाना है या नहीं।
उम्मीदवारों और दूसरे पक्षों को अपने शपथपत्र, वैध पहचान पत्र और संबंधित दस्तावेजों की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी के साथ कमरा नंबर 201, दूसरी मंजिल, FDA बिल्डिंग, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई में जमा करने होंगे। शपथपत्रों और दस्तावेजों की कॉपी [email protected] पर ईमेल भी करनी होगी। जानकारी और मदद के लिए आयोग ने हेल्पलाइन नंबर 022-20867677 दिया है।
16 नवंबर की आखिरी तारीख प्रभावित उम्मीदवारों और व्हिसलब्लोअर को न्यायिक पैनल के सामने ठोस सबूत रखने का मौका देती है। आयोग के निष्कर्ष से पता चल सकता है कि कथित गड़बड़ियां किस तरह की और कितनी थीं, और जहां साबित हो, वहां जिम्मेदारी तय हो सकती है।
नौ बड़ी परीक्षाएं अब जांच के दायरे में हैं, इसलिए महाराष्ट्र की प्रतियोगी भर्ती व्यवस्था के कामकाज पर नजर है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सालों लगाने वाले हजारों उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चयन प्रक्रिया सचमुच योग्यता के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी मौका देती है।
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