चंद्रपुर की झुग्गी बस्तियों के बच्चों के लिए अक्षरप्रवाह फाउंडेशन ने शुरू की अभ्यास शाला
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महाकाली मंदिर के पास दानववाडी में 22 अक्टूबर से रोज शाम 7 से 8 बजे कार्यशाला लगती है, रविवार को पुस्तक परिचय कार्यक्रम होता है।
चंद्रपुर की झुग्गी और वंचित बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए अक्षरप्रवाह फाउंडेशन ने एक नई पहल की है। फाउंडेशन ने इन बच्चों के लिए अभ्यासशाला शुरू की है, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए एक ठीक-ठाक जगह और सही मार्गदर्शन मिल सके।
आयोजकों के मुताबिक यह अभ्यासशाला महाकाली मंदिर के पास दानववाडी में 22 अक्टूबर से रोज शाम 7 से 8 बजे तक लगती है। इसके अलावा हर रविवार सुबह 9 से 11 बजे तक पुस्तक पहचान पहल भी चलती है।
इस पहल की वजह यह है कि कई बच्चों को घर पर पढ़ने के लिए न सही जगह मिलती है, न कोई बताने वाला। आर्थिक और सामाजिक हालात की वजह से झुग्गी इलाकों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल, बैठने की जगह और जरूरी मार्गदर्शन अक्सर नहीं मिल पाता। घर की मुश्किल हालत, जगह की कमी, पैसों की तंगी और पढ़ाई में मदद करने वाले की कमी, ये सब उनके रास्ते में रुकावट बनते हैं।
फाउंडेशन का कहना है कि शिक्षा हर बच्चे का बुनियादी हक है। इन्हीं दिक्कतों को देखकर उसने अभ्यासशाला के जरिए बच्चों को पढ़ाई का नया मौका देने की कोशिश की है।
अभ्यासशाला के मकसद भी साफ बताए गए हैं। बच्चों को पढ़ने के लिए अलग और अच्छा माहौल देना, उनमें पढ़ने का शौक जगाना, उन्हें किताबों से मिलवाना, स्कूल की पढ़ाई में मदद करना, पढ़ने की आदत डालना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना इसमें शामिल है। फाउंडेशन के मुताबिक बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में बनाए रखने और उनके छिपे हुए गुणों को मौका देने में यह पहल अहम साबित होगी।
फाउंडेशन की सोच यह भी है कि झुग्गियों के बच्चों में भी कमाल की काबिलियत, समझ और सपने होते हैं। सही मौका और मार्गदर्शन न मिलने की वजह से उनके सपने अधूरे न रह जाएं, इसी विचार से यह पहल हाथ में ली गई है। समाज के वंचित तबके के बच्चों को पढ़ाई के जरिए मजबूत बनाना, उनमें आत्मविश्वास पैदा करना और आगे चलकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा नागरिक बनाना, यही इसका बड़ा मकसद है।
अभ्यासशाला में बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं दिया जाएगा। कोशिश यह रहेगी कि उन्हें पढ़ाई का मजा, अनुशासन, संस्कार और सपने देखने की प्रेरणा भी मिले।
इस पहल में स्वप्निल मेश्राम, चंद्रशेखर ओशाखा, श्रीकांत येरकर, प्रतीक्षा मावलीकर, सेजल चांदेकर, धीरज शेंडे, लक्ष्मी गोखरे और साईचरण सहयोग कर रहे हैं। समाज के हर बच्चे को पढ़ाई का बराबर मौका मिलना चाहिए, इस सोच से शुरू हुई यह अभ्यासशाला झुग्गी के बच्चों के बेहतर भविष्य की तरफ एक अहम कदम मानी जा रही है।
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