एसटी कर्मचारियों की देनदारी पर बैठक बेनतीजा, संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी
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पीएफ, ग्रैच्युइटी, दिवाली भेंट और महंगाई भत्ते पर मंगलवार की बैठक में हल नहीं निकला। संगठन ने मुख्यमंत्री से दखल मांगा है।
मुंबई: महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) के कर्मचारियों की पैसों से जुड़ी मांगों पर मंगलवार, 3 नवंबर को हुई बैठक में कोई हल नहीं निकला। यह बैठक इसी मकसद से बुलाई गई थी कि कर्मचारियों की अटकी हुई देनदारी का रास्ता निकले, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक एसटी महामंडल के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक माधव कुसेकर ने बैठक में कहा कि फंड न होने की वजह से कर्मचारियों की बकाया रकम देने में दिक्कत आ रही है। इस तरह उन्होंने अपनी असमर्थता जता दी।
बरगे ने सवाल उठाया कि पिछले बारह महीनों से सिर्फ तनख्वाह के लिए ही 1,338.15 करोड़ रुपये की कमी चल रही है। ऐसे में पीएफ, ग्रैच्युइटी, दिवाली भेंट और महंगाई भत्ते जैसे फायदे कर्मचारियों को कैसे मिलेंगे? उन्होंने कहा कि इस आर्थिक तंगी से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है। बार-बार मांग करने के बाद भी पैसों के सवाल हल नहीं हो रहे, इसलिए गुस्सा और बढ़ रहा है।
कर्मचारी संगठन का आरोप है कि एसटी कर्मचारियों की लंबी हड़ताल के दौरान राज्य सरकार ने तीन सदस्यों वाली समिति के सामने महामंडल को जरूरी फंड देने का वादा किया था। संगठन के मुताबिक वह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसी वजह से संगठन ने बैठक में पुरजोर मांग रखी कि महामंडल सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करे। बरगे का कहना था कि हर महीने सरकार को चिट्ठी भेजते रहने से कर्मचारियों के आर्थिक सवाल नहीं सुलझेंगे।
बरगे के अनुसार ये सवाल सिर्फ महामंडल के प्रबंध निदेशक के स्तर पर हल होने वाले नहीं हैं। इसलिए उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री फौरन बैठक लेकर कर्मचारियों की मांगों पर फैसला करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की तरफ से सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि कर्मचारियों के हाथ में असल में पैसा नहीं आ रहा। ऐसे में आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा, यह चेतावनी भी उन्होंने दी।
इसी बीच, मंगलवार की बैठक में माधव कुसेकर ने आश्वासन दिया कि आने वाली 6 नवंबर को उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की मौजूदगी में बैठक होगी। इसके बाद ही मंगलवार की बैठक खत्म हुई।
अब कर्मचारियों की नजर 6 नवंबर की बैठक पर टिकी है कि उनकी अटकी हुई आर्थिक मांगों पर क्या फैसला होता है। अगर इस बैठक में भी कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो एसटी महामंडल में फिर से आंदोलन छिड़ने की संभावना है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।
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