दिवाली से पहले पुणे-नागपुर बस का किराया 9,000 रुपये तक, 11,000 पार जाने की आशंका
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दिवाली से करीब पंद्रह दिन पहले पुणे से नागपुर का एक तरफ का टिकट 9,000 रुपये तक पहुंच गया है। MSRTC सामान्य किराये पर अतिरिक्त बसें चलाएगी।
दिवाली पर पुणे से नागपुर आना इस बार जेब पर भारी पड़ रहा है। आरोप है कि प्राइवेट बस वाले त्योहार की भीड़ का फायदा उठा रहे हैं और त्योहार से करीब पंद्रह दिन पहले ही एक तरफ के टिकट के लिए 9,000 रुपये तक वसूल रहे हैं। ट्रैवल एजेंटों की चेतावनी है कि जैसे-जैसे दिवाली पास आएगी, मांग और बढ़ेगी और किराया 11,000 रुपये का आंकड़ा भी पार कर सकता है।
आम दिनों में एक तरफ का किराया 1,000 से 1,800 रुपये के बीच रहता है। इसके मुकाबले मौजूदा दाम 400 फीसदी तक ज्यादा हैं। पुणे में नौकरी और पढ़ाई कर रहे विदर्भ के हजारों लोग त्योहार पर घर लौटने की तैयारी में हैं, इसलिए यात्रियों के शोषण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पिछले साल का हाल देखें तो तस्वीर और साफ होती है। बताया गया है कि जो टिकट आम तौर पर करीब 1,500 रुपये का मिलता है, वह त्योहार की भीड़ में 5,000 रुपये तक चढ़ गया और आखिरी दिन किराया 11,000 रुपये को छू गया। इस बार दाम इतनी जल्दी चढ़ने से सरकारी नियमों के असर और प्राइवेट इंटरसिटी बसों पर किराये की सीमा लागू होने पर फिर सवाल उठ रहे हैं।
ऑनलाइन टिकट प्लेटफॉर्म के मुताबिक ऑपरेटर भीड़ संभालने के लिए बसों की संख्या काफी बढ़ा रहे हैं। पुणे से नागपुर के लिए लिस्टेड बसें 4 नवंबर को करीब 177, 5 नवंबर को 204, 6 नवंबर को 220 और 7 नवंबर को 170 हैं। आम दिनों में 40 से 69 ऑपरेटर करीब 100 से 160 बसें लिस्ट करते हैं। बसें सुबह 5 बजे से रात 11.30 बजे तक मिल रही हैं, लेकिन शाम के वक्त सबसे ज्यादा सर्विसें हैं।
बसें बढ़ने के बावजूद सफर सस्ता नहीं हुआ। मंगलवार को देखी गई लिस्टिंग में प्रीमियम वॉल्वो का टिकट 8,999 रुपये का था, जबकि रेगुलर सर्विसें 3,000 से 6,750 रुपये ले रही थीं। एक और वॉल्वो सर्विस 7,321 रुपये में लिस्टेड थी। AC स्लीपर का किराया 2,100 से 3,500 रुपये रहा, वहीं प्रीमियम वॉल्वो और मर्सिडीज सर्विसों में 2,600 से 5,500 रुपये मांगे जा रहे थे। जिन यात्रियों के पास तारीख बदलने की गुंजाइश नहीं है, उनके लिए यह रूट खास तौर पर महंगा हो गया है।
जो लोग अपनी गाड़ी से आना चाहते हैं, उनके लिए भी राह आसान नहीं है। पिछली दिवाली में खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम की वजह से नौ घंटे का सफर करीब 15 घंटे में पूरा हुआ था। समृद्धि एक्सप्रेसवे वाले रूट पर भी देरी हुई और जो सफर आम तौर पर 11 से 15 घंटे में होता है, वह कथित तौर पर 13 से 18 घंटे तक खिंच गया। इस साल कई हिस्सों में सड़कें बेहतर हुई बताई गई हैं और कुछ स्ट्रेच जल्दी निकल रहे हैं, पर त्योहार की भीड़ में ट्रैफिक की चिंता बनी हुई है।
प्राइवेट कार से जाने वालों का पेट्रोल-डीजल और टोल मिलाकर खर्च पिछले साल करीब 6,500 रुपये था। उसके इस बार 8,000 से 9,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। अकेले या छोटे परिवार के लिए यह भी महंगा सौदा है। इंटरसिटी कैब भी महंगी हुई हैं। पिछले साल जो गाड़ी 10,000 से 11,000 रुपये में मिल रही थी, उसके लिए अब पुणे-नागपुर के 12,000 से 15,000 रुपये मांगे जा रहे हैं।
बस और कैब के दाम चढ़ने से कारपूलिंग का सहारा लेने वाले बढ़ रहे हैं। BlaBlaCar की लिस्टिंग में पुणे सिटी से नागपुर अर्बन का किराया करीब 2,000 रुपये, पुणे-नागपुर रूट पर 1,800 रुपये और हिंजेवाडी से नागपुर का 1,930 रुपये दिख रहा है। रूट और ट्रैफिक के हिसाब से सफर में 10 से 15 घंटे लगते हैं। बताया गया है कि लिस्टेड राइड में से करीब 66 फीसदी पहले ही बुक हो चुकी हैं और पीक तारीखों की सीटें कुछ ही घंटों में खत्म हो रही हैं, इसलिए जल्दी बुकिंग जरूरी हो गई है।
महाराष्ट्र में प्राइवेट बसों के किराये के नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। त्योहार के सफर के लिए बताई गई राज्य की गाइडलाइन के मुताबिक प्राइवेट इंटरसिटी बस ऑपरेटर उसी क्लास और रूट के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (MSRTC) के किराये से डेढ़ गुना से ज्यादा नहीं ले सकते। बताए गए किराया चार्ट में बस की श्रेणी के हिसाब से अधिकतम दर 69.30 रुपये से 169.86 रुपये प्रति किलोमीटर है।
बताया गया है कि पिछले अक्टूबर में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) ने ऑपरेटरों को निर्देश जारी किए थे और यात्रियों के लिए एक ईमेल पता और WhatsApp नंबर सार्वजनिक किया था, ताकि वे ज्यादा किराये के सबूत के साथ शिकायत कर सकें। बुकिंग काउंटरों और बोर्डिंग पॉइंट पर उल्लंघन जांचने के लिए उड़न दस्ते भी लगाए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद पीक मांग में यात्रियों से भारी बढ़े हुए दाम लिए जा रहे हैं। पिछले साल सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़कने के बाद हुई कार्रवाई से सवाल उठा कि प्रशासन खुद आगे बढ़कर कार्रवाई करता है या सिर्फ शिकायत के बाद हरकत में आता है। मौजूदा हालात में असरदार जांच, किराये का साफ प्रदर्शन और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई और भी जरूरी है।
प्राइवेट ऑपरेटरों के उलट MSRTC ने दिवाली पर किराया न बढ़ाने का फैसला किया है। वह 29 अक्टूबर से 7 नवंबर तक नागपुर और पुणे (चिंचवड़ समेत) के बीच अतिरिक्त सर्विसें चलाएगी। घोषित शेड्यूल के मुताबिक नागपुर से पुणे की तरफ अतिरिक्त बसें सुबह 9 से दोपहर 2 बजे के बीच करीब हर घंटे चलेंगी। 2 नवंबर को एक बस, 3 नवंबर को चार, 4 से 6 नवंबर तक रोज छह और 7 नवंबर को पांच बसें रहेंगी।
पुणे से नागपुर आने वालों के लिए अतिरिक्त बसें शाम 5.30 से 8.30 बजे के बीच करीब हर 30 मिनट पर चलेंगी। इनमें 3 नवंबर को एक बस, 4 नवंबर को चार, 5 और 6 नवंबर को रोज छह और 7 नवंबर को पांच बसें शामिल हैं। MSRTC स्वारगेट, शिवाजीनगर, पुणे स्टेशन और पिंपरी-चिंचवड़ से विदर्भ के ठिकानों के लिए भी अतिरिक्त बसें लगा रही है। नागपुर-माहुर, गोंदिया, गडचिरोली और राजुरा जैसे रूट पर सर्विसें प्लान की जा रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मांग ज्यादा रही तो और बसें उतारी जा सकती हैं। यात्री MSRTC की वेबसाइट npublic.msr-tcors.com या मोबाइल ऐप से सीट देखकर टिकट बुक कर सकते हैं।
इस बार दिवाली के सफर में किराया सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। प्राइवेट बसों के दाम भीड़ वाली तारीखों पर तेजी से चढ़ रहे हैं, जबकि MSRTC की सामान्य किराये वाली अतिरिक्त बसें उन यात्रियों को राहत दे सकती हैं जो अपना प्लान आगे-पीछे कर सकते हैं। यह कदम कितना काम आएगा, यह इस पर टिका है कि मांग के हिसाब से कितनी बसें लगती हैं और लोगों को अपनी पसंद की तारीख पर सीट मिलती है या नहीं। पुणे और नागपुर के बीच सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए यह अब सिर्फ सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि इस बात की परीक्षा है कि सबसे ज्यादा मांग के वक्त नियम यात्रियों को ज्यादा वसूली से बचा पाते हैं या नहीं।
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