एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के 8वें दीक्षांत समारोह में 17 पीएचडी समेत 7,806 विद्यार्थियों को डिग्री
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पुणे की एमआईटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मुख्य अतिथि रहे। 345 विद्यार्थियों को पदक मिले।
पुणे की एमआईटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी (MIT-WPU) के 8वें दीक्षांत समारोह में 17 पीएचडी शोधकर्ताओं समेत कुल 7,806 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। समारोह के मुख्य अतिथि तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर थे। उन्होंने डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों को संबोधित किया।
आर्लेकर ने कहा, "शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री लेना, नौकरी पाना या कामयाब करियर बनाना नहीं है। शिक्षा को किताबों और क्लासरूम से आगे जाकर अनुशासन, समर्पण और सबसे अहम चरित्र गढ़ना चाहिए। जब हम चरित्र बनाते हैं, तब जिम्मेदार नागरिक तैयार होते हैं और उसी से राष्ट्र निर्माण अपने आप होता है।"
समारोह में वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी गोवा के मानद कुलाधिपति और अमेरिका की बफेलो युनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी मौजूद थे। माईर्स एमआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रबंध ट्रस्टी और कार्यकारी अध्यक्ष तथा एमआईटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड भी आए थे। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम समेत कई और गणमान्य लोग भी हाजिर रहे।
देश के भविष्य में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए आर्लेकर ने कहा, "आज की 'जेन जी' हमारे देश की असली युवा शक्ति की नुमाइंदगी करती है। भारत का भविष्य आपके हाथ में है और आपका ज्ञान, हुनर और अनुभव समाज और देश के काम आना चाहिए। भारत जब 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब हर नौजवान को खुद से पूछना चाहिए कि इस बदलाव में वह क्या योगदान दे सकता है। अगर हम अपनी जिंदगी सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के बड़े हित के लिए समर्पित करें, तभी शिक्षा का असली मकसद पूरा होता है।"
इस समारोह में विश्वविद्यालय का नेतृत्व, प्रोफेसर, पास होने वाले विद्यार्थी, अभिभावक और खास मेहमान एक साथ जुटे। मौका विद्यार्थियों की पढ़ाई की कामयाबी का जश्न मनाने और उनके शैक्षणिक सफर के एक अहम पड़ाव का था। समारोह ने एक बार फिर शिक्षा, नवाचार, नेतृत्व और विश्व शांति के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को सामने रखा।
डिग्री पाने वालों में 17 पीएचडी शोधकर्ता शामिल थे, जिन्हें उनके शोध में योगदान और पढ़ाई के प्रदर्शन के लिए खास तौर पर सम्मानित किया गया। शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 345 पदक विजेताओं का सम्मान हुआ। इनमें 135 स्वर्ण, 105 रजत और 105 कांस्य पदक विजेता थे। स्कूल ऑफ साइंस अँड एन्व्हायर्नमेंटल स्टडीज की सुश्री धनश्री राजेंद्र म्हसे को उनकी खास शैक्षणिक उपलब्धि के लिए 'फाउंडर प्रेसिडेंट मेडल' से नवाजा गया।
दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय ललित थे। उन्होंने कहा, "शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है। MIT-WPU के ग्रेजुएट के तौर पर ज्ञान की बदलाव लाने वाली ताकत पर खड़ी संस्था की विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आप पर है। आप कोई भी पेशा या क्षेत्र चुनें, ईमानदारी, सच्चाई और उत्कृष्टता के मूल्यों को संभालकर रखें और अपने हुनर का इस्तेमाल सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें। देश और समाज आपकी तरफ उम्मीद से देख रहे हैं। भरोसे के साथ दुनिया में आगे बढ़ें, हर चुनौती का सकारात्मक नजरिए से सामना करें और अपने विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें।"
समारोह के सम्मानित अतिथि डॉ. अशोक खेमका, IAS (सेवानिवृत्त), हरियाणा सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा, "डिग्री मिलना अंत नहीं, जिम्मेदारी की शुरुआत है। तकनीक, मुकाबले और बदलावों से बनी दुनिया में कदम रखते हुए नए प्रयोग करने की हिम्मत, बदलाव लाने की रचनात्मकता और किसी भी हालत में टिके रहने के लिए जरूरी ईमानदारी को संजोकर रखें। पेशेवर हुनर आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा, लेकिन ईमानदारी की वजह से आप सिर उठाकर जी सकेंगे। प्रचलित धारणाओं पर सवाल उठाइए, आलोचना से सीखिए और ऐसे फैसले लीजिए जिन्हें ईमानदारी और अंतरात्मा की कसौटी पर सही ठहराया जा सके। आपकी कामयाबी से आपके परिवार का गर्व बढ़े और आप समाज के लिए सार्थक योगदान दें।"
सम्मानित अतिथि प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी ने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हमारी जिंदगी के लगभग हर पहलू को नया आकार दे रही है और उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल कैसे हो, यह आपकी पीढ़ी को तय करना है। आप तेजी से बदलती दुनिया में कदम रख रहे हैं, इसलिए महत्वाकांक्षी लेकिन हालात के साथ ढलने वाले रहिए, दूसरों से सीखिए और सार्थक जोखिम उठाने को तैयार रहिए। अपने ज्ञान, रचनात्मकता और हुनर का इस्तेमाल बुद्धिमत्ता, नैतिक मकसद और जनकल्याण के लिए कीजिए।"
डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा, "आज डिग्री लेते वक्त आपकी जिम्मेदारी सिर्फ नौकरी पाने, कारोबार शुरू करने या निजी कामयाबी तक सीमित नहीं है। एमआईटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी के राजदूत के तौर पर आपको सोचना चाहिए कि आप समाज में कैसे योगदान दे सकते हैं और देश का भविष्य गढ़ने में कैसे मदद कर सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तेजी से होते तकनीकी बदलावों के इस दौर में ज्यादा शांतिपूर्ण और जिम्मेदार दुनिया बनाने के लिए विज्ञान, अध्यात्म और मानवीय मूल्यों को जोड़ना जरूरी है।"
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