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00:03 IST

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ को विश्व स्तरीय शिक्षा केंद्र बनना चाहिए - राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

विद्यापीठ के 127वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कौशल विकास, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर जोर दिया।

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ को विश्व स्तरीय शिक्षा केंद्र बनना चाहिए - राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पुणे की सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ में 127वां दीक्षांत समारोह राज्यपाल की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर राज्यपाल और विद्यापीठ के कुलपति जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल टेक्नोलॉजी की वजह से दुनिया तेजी से बदल रही है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने विद्यापीठ से अपील की कि वह शिक्षा, रिसर्च, इनोवेशन और सामाजिक जिम्मेदारी के जरिए विश्व स्तरीय शिक्षा केंद्र बनकर आगे आए।

समारोह में कुलगुरु प्रो. सुरेश गोसावी, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, प्र-कुलगुरु प्रो. डॉ. पराग काळकर, कुलसचिव प्रो. डॉ. प्रफुल्ल पवार और मैनेजमेंट काउंसिल के लोग मौजूद रहे।

राज्यपाल वर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्रों की जिंदगी का खास पल होता है, जहां ज्ञान जिम्मेदारी में और पढ़ाई लीडरशिप में तब्दील होती है। उन्होंने कहा कि बदलते हालात में सिर्फ डिग्री काफी नहीं है, छात्रों को जिंदगी भर सीखते रहना चाहिए और नए-नए स्किल्स सीखने चाहिए। उनके मुताबिक शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं है, बल्कि बराबरी, सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव का असरदार माध्यम है - और सावित्रीबाई फुले की यही सोच छात्रों को आगे ले जानी चाहिए। वर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने की दिशा में विद्यापीठ की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि विद्यापीठ को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च, इनोवेशन, भारतीय ज्ञान परंपरा, छात्रों के सर्वांगीण विकास और सस्ती व क्वालिटी एजुकेशन को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके मुताबिक डिजिटल गवर्नेंस और ग्रीन पहल से विद्यापीठ ज्यादा पारदर्शी, कारगर और टिकाऊ बनेगा।

उन्होंने बताया कि दुबई, सऊदी अरब और कजाकिस्तान के साथ शैक्षणिक साझेदारी से विद्यापीठ का ग्लोबल विस्तार और मजबूत हो सकता है। इंटरनेशनलाइजेशन में स्टूडेंट एक्सचेंज, साझा रिसर्च, इंटरनेशनल फैकल्टी और ग्लोबल पार्टनरशिप को भी अहमियत देनी चाहिए, ऐसा उन्होंने साफ किया।

राज्यपाल ने कहा कि विद्यापीठों को इंडस्ट्री के साथ पार्टनरशिप बढ़ाकर स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, रिसर्च और हाथों-हाथ अनुभव के मौके देने चाहिए। पूर्व छात्रों के नेटवर्क को भी मजबूत बनाकर उनका इस्तेमाल गाइडेंस, स्कॉलरशिप, रोजगार, रिसर्च और इनोवेशन के लिए करना चाहिए।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाइमेट चेंज, हेल्थ, एग्रीकल्चर, साइबर सिक्योरिटी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, ग्रामीण बदलाव और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में रिसर्च को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही कहा कि हर विद्यापीठ सालाना स्पोर्ट्स कैलेंडर बनाकर हर स्टूडेंट को कम से कम एक खेल या फिजिकल एक्टिविटी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करे, क्योंकि खेल से स्टूडेंट्स को अनुशासन, टीम भावना और लीडरशिप सीखने को मिलती है।

राज्यपाल ने कैंपस को सुरक्षित, हेल्दी और नशे से मुक्त रखने के लिए 'नशामुक्त भारत अभियान' के तहत जागरूकता, काउंसलिंग और सामाजिक गतिविधियां चलाने की अपील की। साथ ही विद्यापीठ और जुड़े कॉलेजों से कहा कि वे गांव गोद लेकर साक्षरता, डिजिटल एजुकेशन, हेल्थ, पर्यावरण, स्किल डेवलपमेंट और सामाजिक इनोवेशन के जरिए स्थानीय समुदाय से जुड़ें।

कुलगुरु प्रो. सुरेश गोसावी ने विद्यापीठ की एकेडेमिक और रिसर्च परफॉर्मेंस का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि विद्यापीठ से जुड़े 859 कॉलेजों और संस्थानों में साढ़े सात लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं, और विद्यापीठ का फोकस ज्ञान को सिर्फ लैब तक सीमित न रखकर समाज, गांव, खेत और अस्पतालों तक पहुंचाने पर है। उन्होंने ज्ञान निर्माण, रिसर्च, जनोपयोगी टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल बदलाव और इंटरनेशनल कोऑपरेशन के जरिए विद्यापीठ को नई ऊंचाई देने का संकल्प जताया। कार्यक्रम में एकेडेमिक काउंसिल और सीनेट के मेंबर्स, डीन, प्रोफेसर, अधिकारी, स्टाफ, मेहमान, पैरेंट्स और ग्रेजुएट स्टूडेंट्स मौजूद रहे।

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