दक्षिण अफ्रीका की नावी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, ट्रम्प को फिर निराशा
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी न्यायमूर्ति नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान किया है।
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साल का सबसे प्रतिष्ठित माना जाने वाला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार इस बार दक्षिण अफ्रीका की वरिष्ठ न्यायमूर्ति और मानवाधिकार विशेषज्ञ नवनेथम 'नावी' पिल्लई को दिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने इसका ऐलान किया। समिति ने कहा कि यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को आगे बढ़ाने की उनकी कोशिशों के लिए है।
समिति के मुताबिक पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मजबूत करने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और दुनिया भर में हिंसा को रोककर शांति कायम करने में अहम योगदान दिया है। इस घोषणा के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है।
नावी पिल्लई 85 साल की हैं। उनका जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में हुआ था। उनका परिवार करीब 136 साल पहले, यानी उन्नीसवीं सदी में भारत से दक्षिण अफ्रीका जाकर बस गया था। वे रंगभेद (Apartheid) वाली हुकूमत के बेहद मुश्किल दौर में पली-बढ़ीं और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में ही कानून की पढ़ाई की।
साल 1967 में वे अपने होमटाउन नेटाल में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला वकील बनीं। रंगभेद की व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेल्सन मंडेला जैसे कई राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का उन्होंने कानूनी बचाव किया।
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद खत्म होने के बाद 1995 में उन्हें हाई कोर्ट का कार्यवाहक जज नियुक्त किया गया। उसी साल संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उन्हें रवांडा नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) में जज चुना।
इसके बाद 1 सितंबर 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त (UN High Commissioner for Human Rights) की अहम जिम्मेदारी संभाली। दुनिया के कई देशों में हुए अत्याचार और हिंसा के लिए उन्होंने राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराते हुए मानवाधिकारों की मजबूत लड़ाई लड़ी।
पिछले कुछ समय से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दावा करते आ रहे थे कि उन्होंने कई जंगें रुकवाई हैं और इसलिए नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए। वे लगातार यह मांग उठाते रहे। लेकिन नोबेल समिति ने इन दावों को किनारे रखा और नावी पिल्लई के मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में किए गए काम को पहचान दी।
नोबेल समिति ने अपनी घोषणा में कहा, "आज की दुनिया में जब कानून की संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं, तब नावी पिल्लई जैसे साहसी, दूरदर्शी और न्यायप्रिय लोगों का योगदान पूरी मानवता के लिए उम्मीद की किरण है।"
नोबेल पुरस्कार की ओर से जारी संदेश में भी कहा गया कि पिल्लई ने सरकारों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराया है और हिंसा व संघर्ष के पीड़ितों के लिए उम्मीद जगाई है। संदेश के मुताबिक वे हमारे दौर में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों के सबसे बड़े रखवालों में से एक हैं।