मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

ट्रंप ने बनाई 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स', जे क्लेटन को कमान; AI कंपनियों से स्वैच्छिक करार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई पर अमेरिका का दबदबा बनाए रखने के लिए नया विशेष कार्यदल बनाया है, जिसकी अगुवाई जे क्लेटन करेंगे।

ट्रंप ने बनाई 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स', जे क्लेटन को कमान; AI कंपनियों से स्वैच्छिक करार
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी के मैदान में दुनिया भर में अमेरिका की अव्वल जगह बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अगली पीढ़ी की एआई टेक्नोलॉजी पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल और दबदबा पक्का करने के मकसद से उन्होंने 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स' (Super Intelligence Force) नाम के नए विशेष कार्यदल का औपचारिक ऐलान किया है।

इस पहल के तहत अमेरिका के तमाम सरकारी दस्तावेजों में अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करना जरूरी कर दिया गया है।

इस मुहिम की कमान ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया विभाग (DNI) के डायरेक्टर जे क्लेटन (Jay Clayton) को सौंपी है। क्लेटन की अगुवाई वाला यह कार्यदल अलग-अलग सरकारी एजेंसियों, एआई रिसर्च संस्थाओं, सुरक्षा बलों और प्राइवेट टेक कंपनियों के बीच तालमेल बैठाने का काम करेगा। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 'स्पेस फोर्स' बनाई थी और इस एआई कार्यदल को उसी तर्ज पर तैयार किया गया है। इसका मुख्य मकसद आने वाले वक्त में डिजिटल दुनिया और ग्लोबल सुरक्षा पर अमेरिका की पकड़ और मजबूत करना है।

इस फैसले से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिका की प्रमुख एआई कंपनियों के बड़े अधिकारियों और CEO के साथ एक खास बैठक की थी। इस बैठक में सभी बड़ी एआई कंपनियों ने एक ऐतिहासिक स्वैच्छिक करार पर दस्तखत किए। करार में एआई के विकास के साथ सुरक्षा के पैमानों का पालन करने, जानकारी के गलत इस्तेमाल को रोकने और टेक्निकल तरक्की पर कंट्रोल रखने पर सहमति जताई गई है। ट्रंप प्रशासन का जोर इस बात पर है कि इंडस्ट्री खुद अपने नियम बनाकर (Self-regulation) कैसे और तेजी से आगे बढ़ सकती है।

अमेरिका का यह नया कार्यदल अलग-अलग प्रशासनिक विभागों की कोशिशों को एक जगह लाएगा। एआई सिस्टम में आने वाली संभावित तकनीकी खराबी, साइबर हमले और बाहरी सिस्टम के हैक होने के बढ़ते खतरों पर यह दल बारीकी से नजर रखेगा। क्लेटन की टीम को अगले 120 दिनों में एआई के संभावित खतरों की समीक्षा करने और केंद्र सरकार के मौजूदा कानूनों का इस्तेमाल करते हुए तुरंत अमल की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

जे क्लेटन को वॉल स्ट्रीट का बेहद सीनियर और तजुर्बेदार वकील माना जाता है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान गोल्डमैन सैक्स और लेहमन ब्रदर्स से संपत्तियां खरीदने के मामले में उन्होंने बार्कलेज बैंक की कामयाब नुमाइंदगी की थी। ट्रंप के पहले कार्यकाल में क्लेटन 'सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन' (SEC) के चेयरमैन रहे। उस दौरान उन्होंने कारोबारी हितों का ख्याल रखते हुए उभरती क्रिप्टो (Cryptocurrency) इंडस्ट्री पर कानूनी लगाम कसने के लिए कई अहम और सख्त कार्रवाइयां की थीं।

इसके बाद ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में क्लेटन को मैनहटन में फेडरल अभियोक्ता चुना था, और जुलाई में अमेरिकी सीनेट ने उन्हें 'डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस' (DNI) के पद पर मंजूरी दी। क्लेटन के पास एआई या कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का कोई सीधा तकनीकी अनुभव नहीं है, फिर भी अंतरराष्ट्रीय कानून, सुरक्षा, वित्त व्यवस्था और साइबर सुरक्षा में उनकी जानकारी को देखते हुए ट्रंप ने उन पर यह भरोसा जताया है।

क्लेटन की यह नियुक्ति ऐसे वक्त हुई है जब दुनिया भर के कई एआई रिसर्चर और वैज्ञानिकों ने इस टेक्नोलॉजी की बेलगाम बढ़त पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई सिस्टम में गड़बड़ी या सैन्य और आर्थिक क्षेत्र में उनका गलत इस्तेमाल दुनिया की शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप एआई इंडस्ट्री पर सख्त सरकारी नियम थोपने के पूरी तरह खिलाफ हैं। ट्रंप के मुताबिक अगर अमेरिका एआई पर बहुत कड़े नियम या पाबंदियां लगाएगा, तो अमेरिकी कंपनियों की तरक्की धीमी पड़ेगी और इसका सीधा फायदा प्रतिद्वंद्वी चीनी कंपनियों को मिलेगा। इसलिए अमेरिका ने दोहरा रास्ता चुना है: टेक्नोलॉजी के विकास को रफ्तार देना और सुरक्षा नियमों पर सख्ती से अमल करना। जे क्लेटन की अगुवाई में यह 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स' अमेरिका को ग्लोबल टेक्नोलॉजी की दौड़ में सबसे आगे रखने के लिए काम करेगा।

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