शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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01:12 IST

भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इस्राइल देगा सर्वोच्च नागरी शौर्य सम्मान, अमेरिका में भी दखल

भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इस्राइल देगा सर्वोच्च नागरी शौर्य सम्मान, अमेरिका में भी दखल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कुल्हाड़ी से हमले के बावजूद सूझबूझ दिखाकर 172 यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार (Captain Smit Machhar) को इस्राइल और अमेरिका शौर्य सम्मान से नवाजेंगे। बताया गया है कि हमला विमान के सहवैमानिक ने किया था।

इस्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्झोग ने मच्छार को देश का सर्वोच्च नागरी शौर्य पुरस्कार 'प्रेसिडेन्शियल अवॉर्ड फॉर सिव्हिलियन हिरोइझम' देने का ऐलान किया है। वहीं अमेरिका की प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनकी बहादुरी दर्ज की जाएगी।

भारत में इस्राइली दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करके इस फैसले की जानकारी दी। दूतावास का कहना है कि कैप्टन मच्छार की हिम्मत से एक बड़ा हादसा टालने में मदद मिली। दूतावास के मुताबिक, सेहत में सुधार होने के बाद राष्ट्रपति हर्झोग उन्हें यह पुरस्कार देंगे। उनके जल्द और पूरी तरह ठीक होने की शुभकामनाएं भी दी गई हैं।

इसी बीच भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने गुरुवार को ऐलान किया कि कैप्टन मच्छार की बहादुरी की तारीफ करने वाला उनका बयान अमेरिकी कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बाकी सांसदों से भी अपील की कि वे उनकी हिम्मत का सम्मान करें।

घटना 30 सितंबर की है। फ्लायदुबई की उड़ान एफझेड 1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। आरोप है कि उड़ान के दौरान सहवैमानिक ने कैप्टन मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की।

राजा कृष्णमूर्ति के बयान के मुताबिक, इस दौरान विमान सिर्फ 30 सेकंड में करीब 16 हजार फूट नीचे आ गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोल दिया। इससे विमान में मौजूद दूसरे यात्रियों और क्रू को कॉकपिट में जाकर हमलावर को काबू में करने का मौका मिला।

इसके बाद फ्लायदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने विमान संभाला और उसे सऊदी अरेबिया के तबूक में सुरक्षित उतार दिया। विमान में 172 यात्री थे, जिनमें चार अमेरिकी नागरिक और 27 बच्चे भी शामिल थे।

कैप्टन स्मित मच्छार को विमान उड़ाने का 17 साल का तजुर्बा है, जिसमें से 11 साल उन्होंने कैप्टन के तौर पर काम किया है। कृष्णमूर्ति ने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने पर भी उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को पहले रखा।

कृष्णमूर्ति के मुताबिक, अपनी जान बचाने की लड़ाई के बीच भी कैप्टन मच्छार को एहसास था कि विमान में सबकी जान उनके अगले कदम पर टिकी है। उनके तजुर्बे और सूझबूझ की वजह से दूसरों को दखल देने का मौका मिला और संभावित बड़ा हादसा टल गया।

सांसद कृष्णमूर्ति ने कहा कि विमान के हर यात्री के पीछे एक परिवार है। कैप्टन मच्छार ने हार नहीं मानी, इसीलिए यात्री और क्रू के लोग अपने अपनों के पास सुरक्षित लौट सके। इन्हीं शब्दों में उन्होंने कैप्टन की हिम्मत की तारीफ की।

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