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22:55 IST

दिल्ली मंडी में चना 15 दिन में 700 रुपये चढ़ा, 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक जाने का अंदेशा

दिल्ली की लॉरेंस रोड मंडी में चने का भाव 7,650 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। कारोबारी सुरेश भाई ठक्कर के मुताबिक हालात यही रहे तो भाव 9,000 रुपये तक जा सकते हैं।

दिल्ली मंडी में चना 15 दिन में 700 रुपये चढ़ा, 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक जाने का अंदेशा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चने के दाम फिर चढ़ गए हैं और आम आदमी की जेब पर इसका असर दिखने लगा है। दिल्ली की लॉरेंस रोड मंडी में देसी चना अब 7,650 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है। यह भाव पिछले सिर्फ 15 दिन में 700 रुपये ऊपर गया है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष और ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर का कहना है कि दशहरा-दिवाली की ग्राहकी निकलने के बाद चने में यह तेजी आई है। उनके मुताबिक एक महीने में चना करीब 1,400 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हो चुका है।

ठक्कर का अनुमान है कि मौजूदा हालात बने रहे तो भाव पहले 8,500 रुपये तक जाएंगे और आगे चलकर 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हैं।

इस तेजी की सबसे बड़ी वजह देश में चने का कम उत्पादन बताई जा रही है। ठक्कर के अनुसार देश में चने का उत्पादन करीब 110 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि अनुमानित खपत इससे लगभग 30 लाख टन ज्यादा है। उत्पादन खपत से कम रहने के कारण बाजार में स्टॉक घट गया है। उत्पादक और वितरक मंडियों में माल की कमी है, इसलिए दाल मिलों को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पा रहा। इसका सीधा असर चने की कीमतों पर पड़ रहा है।

विदेश से भी राहत मिलती नहीं दिख रही। ठक्कर के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई चने के अक्टूबर-नवंबर शिपमेंट के भाव पिछले साल की इसी अवधि से करीब 250 डॉलर प्रति टन ऊंचे चल रहे हैं। उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में भाव 790 से 800 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गए हैं और वहां की फसल में क्वालिटी की दिक्कतों की खबरें हैं। इससे आयातित माल की लागत बढ़ी है और भारतीय बाजार में विदेशी चना महंगा पड़ रहा है।

लागत का एक और बोझ ढुलाई का है। ईंधन और परिवहन खर्च बढ़ने से उत्पादक मंडियों से दिल्ली तक माल मंगाना करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल महंगा पड़ रहा है।

आगे की फसल को लेकर भी चिंता है। ठक्कर ने आशंका जताई कि अल नीनो के असर से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत प्रमुख उत्पादक इलाकों में चने की बिजाई पर असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक इस बार दाने छोटे रहने से उत्पादकता भी प्रभावित हुई है।

कमजोर मानसून की वजह से घरेलू उत्पादन में कमी और विदेशी बाजारों के ऊंचे भाव के चलते दलहन और तिलहन के दामों में पहले से ही भारी तेजी दिख रही है। चने की तेजी ने उस महंगाई को और बढ़ा दिया है। कच्चे माल की कमी, महंगी ढुलाई और अगली फसल की बिजाई को लेकर आशंकाओं से बाजार में चिंता बनी हुई है।

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