गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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20:23 IST

त्योहार से पहले चीनी हुई कड़वी, पिछले साल के मुकाबले दाम करीब 20 फीसदी चढ़े

दिवाली नज़दीक आते ही चीनी के दाम 19 महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। सरकार ने व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी है।

त्योहार से पहले चीनी हुई कड़वी, पिछले साल के मुकाबले दाम करीब 20 फीसदी चढ़े तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

त्योहार का मौसम पास आ रहा है और आम आदमी की रसोई का बजट चीनी की महंगाई से गड़बड़ाने लगा है। पिछले कुछ महीनों से चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सिर्फ भारत में ही नहीं, दुनिया के बाज़ार में भी भाव ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।

देश के खुदरा बाज़ार में चीनी के भाव पिछले 19 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। पिछले साल के मुकाबले दाम सुमारे 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं। कुछ महीने पहले जो चीनी 48 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब 55 से 56 रुपये तक पहुंच गई है। इससे ग्राहकों का बजट बिगड़ गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी चीनी के भाव दो साल के ऊंचे स्तर पर हैं। अमेरिका में चीनी का फ्यूचर्स एक ही दिन में 4 प्रतिशत चढ़ा, और पिछले कुछ महीनों में भी इसमें काफी उछाल आया है। दुनिया में चीनी का भाव प्रति पौंड 21 डॉलर के आसपास बताया गया है।

दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में चीनी का उत्पादन घटना है। भारत, ब्राज़ील और थाईलैंड सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश हैं, और इन तीनों में मौसम के बदलाव का सीधा असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। एल निनो के असर से भारत और ब्राज़ील में बारिश का हिसाब बिगड़ा, जिससे गन्ने की पैदावार खतरे में आ गई।

ब्राज़ील में इस साल ज़्यादा बारिश हुई, जिससे गन्ने की प्रक्रिया में बड़ी रुकावटें आईं। वहां चीनी का उत्पादन 14 प्रतिशत से ज़्यादा घटकर 2.60 करोड़ टन रह गया है। भारत में कमज़ोर मानसून और कम बारिश की वजह से गन्ने की पैदावार और चीनी की रिकवरी दोनों में बड़ी गिरावट आई है। खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का उत्पादन 20 से 40 प्रतिशत तक कम हुआ है। भारत का उत्पादन पहले करीब 3.43 करोड़ टन आंका गया था, लेकिन अब उसके घटकर लगभग 3 करोड़ टन के आसपास रहने की संभावना जताई जा रही है।

थाईलैंड में भी चीनी उत्पादन में 17 प्रतिशत तक की गिरावट का अंदाज़ा है, जिससे दुनिया में चीनी की कमी बन गई है। स्टोनएक्स (StoneX) के मुताबिक आने वाले समय में दुनिया में चीनी की करीब 9 लाख टन की कमी महसूस हो सकती है।

उत्पादन के अलावा कुछ और वजहें भी हैं। भारत में सालाना घरेलू खपत करीब 2.80 से 2.90 करोड़ टन है। इस साल उत्पादन इसी स्तर पर या थोड़ा ज़्यादा रहने से सप्लाई चेन पर दबाव है। भारत में चीनी का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में जाता है। चीनी की कमी और दाम काबू में रखने के लिए सरकार एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन बंद करने या उस पर सख्त नियंत्रण लगाने पर विचार कर रही है, ताकि खाने के लिए चीनी का पर्याप्त स्टॉक रहे। दूसरी तरफ, विदेशी बाज़ार में भाव चढ़ने से चीनी मिल मालिकों और व्यापारियों को निर्यात में बड़ा मुनाफा दिख रहा है। बड़े पैमाने पर निर्यात से घरेलू बाज़ार में कमी का डर बना और व्यापारियों ने माल रोक लिया।

दिवाली जैसे त्योहारों में मिठाई और दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में दाम चढ़ने से आम परिवार का बजट बिगड़ता है, और इसका सीधा झटका गृहिणियों और खुदरा ग्राहकों को लगता है। उधर शेयर बाज़ार में चीनी कंपनियों के शेयरों में तेज़ी दिखी। धामपुर शुगर मिल्स, शक्ति शुगर्स, डालमिया भारत शुगर, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, श्री रेणुका शुगर, अवध शुगर और बलरामपुर चीनी मिल्स जैसी कंपनियों के शेयर 4 से 9 प्रतिशत तक चढ़े। बाज़ार को उम्मीद है कि ऊंचे दामों से इन कंपनियों की कमाई बढ़ेगी।

बढ़ते दामों पर लगाम लगाने और त्योहार में कालाबाज़ारी या बनावटी कमी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य मंत्रालय ने दाम काबू में रखने और सट्टेबाज़ी रोकने के लिए चीनी व्यापारियों पर पाबंदी लगाई है। व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर सिर्फ 1,000 क्विंटल कर दी गई है। यह नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक पूरे देश में लागू है, सिर्फ कोलकाता, उसके आसपास का इलाका और असम इससे बाहर हैं। अगस्त में यह सीमा 4,000 क्विंटल थी, फिर 2,000 क्विंटल हुई और अब 1,000 क्विंटल है।

इस नीति का मकसद यह है कि सप्लाई चेन में बेवजह जमाखोरी न हो और माल सीधे मिल से ग्राहकों तक सही दाम पर बिना रुकावट पहुंचे। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार के कदमों और सख्त स्टॉक लिमिट से त्योहार में दाम बेकाबू होने से रुकेंगे।

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