गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
17:14 IST

धान खरीदी की दिक्कतों पर मुनगंटीवार की सात मांगें, भुजबळ बोले: बकाया भुगतान की फाइलें दो दिन में वित्त विभाग पहुंचें

मुंबई में हुई बैठक में विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने धान खरीदी केंद्रों की दिक्कतें रखीं। मंत्री छगन भुजबळ ने दो दिन के भीतर फाइलें वित्त विभाग को भेजने का निर्देश दिया।

धान खरीदी की दिक्कतों पर मुनगंटीवार की सात मांगें, भुजबळ बोले: बकाया भुगतान की फाइलें दो दिन में वित्त विभाग पहुंचें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई में धान खरीदी की परेशानियों पर एक अहम बैठक हुई। इसमें विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किसानों, खरीदी केंद्र चलाने वालों और जुड़ी एजेंसियों की तकलीफें सामने रखीं। बैठक अन्न, नागरी आपूर्ति और ग्राहक संरक्षण मंत्री छगन भुजबळ की अध्यक्षता में हुई। चर्चा खास तौर पर नागपुर विभाग में न्यूनतम आधारभूत कीमत पर धान खरीदने वाली योजना के तहत चल रहे केंद्रों की अड़चनों पर थी। मुनगंटीवार ने साफ कहा कि इन मामलों में फौरन कदम उठाए जाएं।

मुनगंटीवार का कहना था कि धान उगाने वाले किसान की मेहनत का पूरा दाम उसे समय पर मिलना चाहिए। खरीदी की प्रक्रिया में जो गड़बड़ियां होती हैं, उनका खामियाजा किसान को नहीं भुगतना चाहिए। उनकी मांगों और लगातार चल रही पैरवी को देखकर मंत्री भुजबळ ने बैठक के दौरान ही आदेश दिया कि संबंधित मांगों और बकाया भुगतान की सारी फाइलें दो दिन के अंदर वित्त विभाग के पास भेज दी जाएं।

बैठक में सांसद प्रफुल्ल पटेल मौजूद थे। विधायकों में नाना पटोले, परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, अविनाश ब्राम्हणकर, कृष्णा गजबे, रामदास मसराम, स्नेहा दुबे पंडित, विजय रहांगडाले और राजकुमार बडोले भी आए थे। इनके साथ दूसरे जनप्रतिनिधि, विभाग के सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठे थे।

सबसे पहले मुनगंटीवार ने उठाव का मसला रखा। उनके मुताबिक धान खरीद लिया जाता है, मगर केंद्र से उसे उठाने में देर होती है। इसका सीधा असर किसानों और केंद्र चलाने वालों पर पड़ता है। देरी के चलते माल में जो कमी आ जाती है, उस पर छूट देने का सही फैसला होना चाहिए, यह उनकी मांग थी। उन्होंने यह भी कहा कि खरीदे गए धान को कम से कम समय में उठाने और आगे पहुंचाने का पक्का इंतजाम बने। उनका तर्क था कि किसान ने पसीना बहाकर जो धान उगाया, वह केंद्र पर यूं ही पड़ा रहे तो इसे महज प्रशासन का मामला मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। इसकी जड़ में किसान की आर्थिक तंगी है, और कार्रवाई इसी समझ के साथ होनी चाहिए।

दूसरा मुद्दा बारदाने का था। पर्याप्त बारदाना न होने से खरीदी रुकती है। मुनगंटीवार ने मांग की कि सीजन शुरू होने से पहले ही जितना बारदाना लगेगा, उतना पहुंचा दिया जाए। तीसरे नंबर पर गोदामों का किराया आया। धान रखने के लिए जो गोदाम लिए जाते हैं, उनके किराये की मौजूदा दर बढ़ते खर्च के आगे कम पड़ने लगी है। इसलिए उन्होंने कहा कि दर पर दोबारा सोचा जाए और हालात के हिसाब से उसे बढ़ाया जाए।

मुनगंटीवार ने एक अलग पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया। मकसद यह है कि खरीदी में पारदर्शिता रहे, विभागों में तालमेल बैठे और निगरानी कारगर हो। इस पोर्टल पर कितना धान खरीदा गया, कितना स्टॉक पड़ा है, उठाव और ढुलाई की क्या स्थिति है, गोदाम का क्या इंतजाम है और किसानों को कितना भुगतान हुआ, यह सब एक ही जगह दिख सकता है। इससे देरी कहां और क्यों हो रही है, यह तुरंत पकड़ में आएगा और वक्त रहते इलाज किया जा सकेगा।

भुगतान को लेकर उनकी मांग थी कि किसान को धान बेचने के बाद अपने हक के पैसे के लिए बेवजह इंतजार न करना पड़े। इसके लिए खरीदी के भुगतान का अलग फंड रखा जाए, या मौजूदा इंतजाम में अलग निधि का प्रावधान किया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि धान बेचकर जो रकम हाथ आती है, वही किसान के अगले सीजन, घर के खर्च और आगे की आर्थिक योजना की नींव बनती है। इसलिए भुगतान में देर किसी भी हाल में ठीक नहीं है। मिलिंग का खर्च भी चढ़ रहा है, सो मुनगंटीवार ने मिलिंग की दर पर नए सिरे से विचार करने और उसे बढ़ाने को कहा। खरीदी केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ाने, धान की फौरन ढुलाई करने, रखरखाव का मजबूत ढांचा खड़ा करने और खरीदी में आ रही प्रशासनिक व आर्थिक रुकावटें हटाने पर भी उन्होंने कई सुझाव दिए।

मंत्री भुजबळ ने मुनगंटीवार के मुद्दों पर ही नहीं, बाकी जनप्रतिनिधियों की मांगों पर भी नरम और सकारात्मक रवैया दिखाया। जिन मामलों में वित्त विभाग की मंजूरी लगती है, उनके सभी बिल और मांगें दो दिन में वित्त विभाग को सौंपने का निर्देश संबंधित विभाग को मिला। केंद्र सरकार से राज्य को जो रकम आनी बाकी है, उसके लिए दिल्ली में तुरंत पीछे पड़ने को भी कहा गया।

बैठक में एक और फैसला हुआ। दूसरे राज्यों में धान की खरीदी और मिलिंग के लिए कौन सी योजनाएं चल रही हैं, वहां की नीतियां, दरें और काम करने के तरीके क्या हैं, इसका तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। उसी के आधार पर महाराष्ट्र के लिए ऐसी नीति तय करने की दिशा में रिपोर्ट रखी जाएगी, जो जमीन पर चल सके और असर करे। साथ ही संबंधित विभागों से कहा गया कि खरीदी के बाद उठाव, ढुलाई और रखरखाव में बेवजह देर न हो, इसके लिए आपस में मिलकर काम करें। मंत्री ने यह हिदायत भी दी कि किसानों को धान बेचने के पैसे के लिए बेवजह इंतजार न कराया जाए।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे