पुणे की गीता मालुसरे ने 96 दिन में तीन बड़े स्विम पूरे कर जीता ओपन वॉटर ट्रिपल क्राउन
पुणे की ओपन वॉटर जलतरणपटू गीता महेश मालुसरे यह किताब जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं।
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पुणे की ओपन वॉटर जलतरणपटू गीता महेश मालुसरे ने सिर्फ 96 दिनों में इंग्लिश चैनल, कैटालिना चैनल और न्यूयॉर्क का '20 ब्रिजेस स्विम' पूरा कर 'ओपन वॉटर स्विमिंग ट्रिपल क्राउन' अपने नाम किया है। यह किताब हासिल करने वाली वे भारत की पहली महिला जलतरणपटू हैं।
कम समय में ट्रिपल क्राउन पूरा करने वालों में गीता दुनिया की छठी और एशिया की दूसरी महिला बनी हैं।
गीता ने दुनिया के सात बड़े ओपन वॉटर स्विम पूरे करके 'क्वीन ऑफ ओशन' का सम्मान पाने का लक्ष्य रखा है। इस मुहिम का पहला पड़ाव उन्होंने इंग्लिश चैनल पार करके पूरा किया। इसके बाद अमेरिका का कैटालिना चैनल उन्होंने 15 घंटे 42 मिनट में पार किया। कैटालिना चैनल पूरा करने वाली वे भारत की पांचवीं महिला थीं। फिर न्यूयॉर्क में मैनहैटन द्वीप के चारों तरफ करीब 46 किलोमीटर का '20 ब्रिजेस स्विम' उन्होंने 9 घंटे 32 मिनट में पूरा किया। तीनों मुश्किल स्विम 96 दिनों के भीतर पूरे करके गीता ने यह ट्रिपल क्राउन अपने नाम कर लिया।
इस सफर में गीता को कई दिक्कतों से गुजरना पड़ा। इंग्लिश चैनल में तैरते वक्त उन्हें जेलीफिश ने डंक मार दिया। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और अगली चुनौतियों के लिए उतरीं। कैटालिना चैनल के स्विम के दौरान दोनों हाथों में चोट लग गई। फिर भी कई महीनों की तैयारी, की हुई मेहनत और इस मुहिम के लक्ष्य को देखते हुए उन्होंने पीछे हटना मंजूर नहीं किया।
गीता ने कहा, "हर स्विम ने मुझे नया सबक दिया और मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत बनाया। इस सफर में दर्द, त्याग और मुश्किलें थीं, फिर भी पीछे हटने का सवाल ही नहीं था।" इस कामयाबी के लिए उन्होंने परिवार के साथ का खास जिक्र किया। उनके मुताबिक पिता, मां, दादी और बाकी परिवार के सहारे से ही यह सफर मुमकिन हो पाया। कोच प्रतीक जावडेकर और शेखर खासनीस के मार्गदर्शन के लिए भी उन्होंने आभार जताया।
'20 ब्रिजेस स्विम' के लिए स्पॉन्सरशिप देने पर गीता ने वेंकीज (Venkys) और क्रांति रिअल्टर्स का शुक्रिया अदा किया। अमेरिका की मुहिम के दौरान मदद करने वाले प्रीती सावंत जाधव, सुदीप जाधव, राजवीर जाधव, कौस्तुभ हळबे और वैष्णवी कुडले का भी उन्होंने धन्यवाद किया। गीता मालुसरे ने कहा, "यह कामयाबी सिर्फ मेरी नहीं है। मुझ पर भरोसा करने वाले कई लोगों के प्यार, त्याग, हौसले और साथ की वजह से यह सफर मुमकिन हो पाया।"