धान बचाने के लिए कर्नाटक के किसानों ने मांगा 2 टीएमसी फूट पानी कर्ज में
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तुंगभद्रा इलाके के किसान और राइस मिल मालिक आंध्र प्रदेश के हिस्से से 2 टीएमसी फूट पानी उधार चाहते हैं। खरीफ की फसल बचाने के लिए यह मांग उठी है।
कर्नाटक में धान की खेती करने वाले किसान इस वक्त भारी पानी की किल्लत और सूखे से जूझ रहे हैं। इसी हालात में कल्याणा के किसानों और राइस मिल मालिकों ने एक अलग तरह की मांग रखी है। वे चाहते हैं कि उन्हें पानी कर्ज के तौर पर दिया जाए, ताकि तुंगभद्रा इलाके की खरीफ फसल बच सके।
मांग यह है कि 20 नवंबर से दिसंबर के बीच तक कर्नाटक के किसानों को 2 टीएमसी फूट पानी दिया जाए। यह पानी तुंगभद्रा जलाशय से आंध्र प्रदेश को मिलने वाले 4 टीएमसी फूट के हिस्से में से लिया जाएगा। यानी आंध्र प्रदेश के लिए तय 4 टीएमसी फूट में से आधा कर्नाटक के धान के खेतों को मिले।
यह कर्ज कैसे लौटाया जाएगा, यह भी प्रस्ताव में बताया गया है। खरीफ का मौसम खत्म होने के बाद कर्नाटक अपने दूसरे बड़े जलाशयों से, जैसे अलमट्टी बांध या कृष्णा बेसिन के बाकी स्रोतों से, 2 टीएमसी फूट पानी छोड़कर यह कर्ज चुका देगा।
किसानों का कहना है कि पानी की कमी की वजह से राज्य के मुख्य धान उत्पादक इलाकों में 80 प्रतिशत तक फसल पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है। शनिवार को मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के साथ बैठक होनी थी। उससे पहले किसानों ने कहा कि अगर सरकार ने 15 दिसंबर तक पानी की सप्लाई पक्की नहीं की, तो खड़ी फसल का 80 प्रतिशत धान खत्म हो सकता है।
दांव पर बहुत कुछ लगा है। 6 लाख से ज्यादा किसानों ने धान में प्रति एकर 40,000 रुपये लगाए हैं। इस हिसाब से 2,500 करोड़ रुपये फसल के रूप में खेतों में खड़े हैं। कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष हनुमनागौडा दलगुर्की ने कहा, "हमारी मांग है कि आंध्र प्रदेश को प्रस्तावित 4 टीएमसी पानी में से 2 टीएमसी सरकार छोड़ दे।"
कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बेसिन में बसे कल्याणा राज्य में हर साल 70-75 लाख मेट्रिक टन चावल पैदा होता है। इसमें से 60 प्रतिशत उत्पादन तुंगभद्रा सिंचाई क्षेत्र से आता है, जिसमें रायचूर, कोप्पल, विजयनगर और बल्लारी शामिल हैं। अलमट्टी जलाशय में पानी भरपूर है, इसलिए कृष्णा नदी के पानी पर टिके इलाकों को नुकसान की आशंका नहीं है। लेकिन तुंगभद्रा इलाके में धान की खेती 50 प्रतिशत घट चुकी है।
कर्नाटक राज्य राइस मिल एसोसिएशन की अध्यक्ष सावित्री पुरुषोत्तम ने कहा, "अगर सरकार ने दिसंबर के पहले हफ्ते तक पानी की सप्लाई पक्की कर दी, तो बाजार में धान की आवक होगी और भाव स्थिर रहेंगे।"
महंगाई पहले ही आम आदमी की जिंदगी मुश्किल कर रही है। प्याज से लेकर शक्कर तक सब कुछ महंगा हो चुका है। अब चावल की बारी है। कर्नाटक में पहली बार चावल का भाव 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की कगार पर है।
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