कर्जत के शिलार बांध पर किसान अड़े, अब सीधे मुख्यमंत्री फडणवीस से मिलने की तैयारी
कर्जत तालुका में प्रस्तावित शिलार बांध के खिलाफ 24 गांवों और आदिवासी वाड़ियों के किसान एक अक्टूबर से मुहिम शुरू करेंगे।
रायगड जिले के कर्जत तालुका में प्रस्तावित शिलार बांध का स्थानीय लोग जोरदार विरोध कर रहे हैं। बांध में जिनकी जमीन जा रही है, उन 24 गांवों और आदिवासी वाड़ियों के किसानों और ग्रामीणों ने तय किया है कि वे अब कर्जत तालुका के नेताओं से मिलेंगे। उनका कहना है कि बांध उन्हें नहीं चाहिए और यही बात वे राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचाएंगे।
किसानों की यह मुहिम मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात पर खत्म होगी। इसके लिए किसान गांव-गांव बैठकें कर रहे हैं। उनका मकसद अपनी खेती और जंगल को बचाना है, और इसीलिए वे चिल्हार नदी पर बनने वाले शिलार बांध को हमेशा के लिए हटवाना चाहते हैं। कर्जत तालुका की सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से मिलकर बांध के खिलाफ अपना रुख साफ किया जाएगा।
बांध मंजूर होने के बाद से ही इन गांवों और आदिवासी वाड़ियों के किसान कड़ा विरोध करते आए हैं। उन्होंने आंदोलन किए हैं और कर्जत तहसील कार्यालय पर बड़ा मोर्चा भी निकाला है। इसके बावजूद जमीन की नपाई का काम हाथ में लिया गया है।
शिलार बांध हटाओ मुहिम एक अक्टूबर से शुरू होगी। बांध वाले इलाके के हजारों किसान कर्जत पहुंचेंगे। सबसे पहले विधायक महेंद्र थोरवे के साथ और फिर कर्जत तालुका के सभी पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक है। किसानों का कहना है कि एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए जब तक शिलार बांध प्रोजेक्ट से प्रभावित सभी किसान मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ बैठक तक नहीं पहुंच जाते, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।
किसान विधायक महेंद्र थोरवे और कर्जत के तमाम राजनीतिक नेताओं से मिलेंगे और उनसे सहयोग की अपील करेंगे। बांध को हमेशा के लिए रद्द करवाने तक शिलार बांध का काम रोकने की ताकत इन्हीं नेताओं में है, ऐसा किसानों की ओर से कहा जाएगा।
शिलार बांध प्रोजेक्ट रायगड जिले के कर्जत तालुका में किकवी के पास चिल्हार (शिलार) नदी पर बनने वाला एक अहम पानी सप्लाई प्रोजेक्ट है। जलसंपदा विभाग ने इसके असली निर्माण के लिए महालक्ष्मी-एसईएल (जेवी) नाम की ठेकेदार कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया है। अगले 5 साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय स्तर पर किसान और ग्रामीण जमीन और पर्यावरण को बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट का विरोध और आंदोलन कर रहे हैं।