चंद्रपुर: पेठगांव के स्कूल की सुरक्षा दीवार चार साल से अधूरी, जंगल से सटे स्कूल में बाघ का डर
सावली तालुका के नि. पेठगांव की जिला परिषद स्कूल जंगल से सटी है। बाघ की हलचल बढ़ने से बच्चों की सुरक्षा का सवाल उठा है।
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चंद्रपुर जिले के सावली तालुका में नि. पेठगांव की जिला परिषद उच्च प्राथमिक स्कूल की सुरक्षा दीवार चार साल से पूरी नहीं हो पाई है। स्कूल से लगा हुआ जंगल है और इलाके में बाघ समेत दूसरे जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ गई है। इसी वजह से बच्चों की सुरक्षा का सवाल गंभीर हो गया है।
स्कूल के बच्चों, टीचरों और अभिभावकों में डर का माहौल है। लोगों की मांग जोर पकड़ रही है कि संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा दीवार का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
पेठगांव इलाके में बाघ की हलचल बढ़ने से गांव वालों में दहशत है। 16 सितंबर 2026 को स्कूल से कुछ मीटर की दूरी पर बाघ के हमले में एक आदमी की मौत हो गई थी। इसके बाद 29 सितंबर को बाघ ने स्कूल से सटी जगह पर ही एक सुअर का शिकार किया। गांव वालों ने यह भी बताया कि इस साल इलाके में बाघ के हमलों में चार से पांच बैल और गायें मारी गई हैं।
स्कूल के आंगन में छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में दीवार न होने से जंगली जानवर सीधे स्कूल के परिसर में घुस आएं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। स्कूल की सुरक्षा दीवार का काम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मंजूर हुआ था, लेकिन चार साल बीतने पर भी यह पूरा नहीं हुआ।
काम आखिर किस वजह से अटका है और उसके लिए जरूरी फंड मौजूद है या नहीं, इस पर प्रशासन से साफ जवाब देने की मांग हो रही है। स्कूल प्रबंधन समिति ने पंचायत समिति, सावली के खंड विकास अधिकारी को निवेदन देकर अधूरा काम फौरन पूरा करने की मांग की है। निवेदन में यह भी कहा गया है कि संबंधित अधिकारी स्कूल का मौके पर जाकर मुआयना करें और काम में देरी की वजहों व फंड की उपलब्धता पर रिपोर्ट तैयार करें।
स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सदानंद उमाजी किनेकर की पहल पर यह मुद्दा ग्रामसभा में उठाया गया। ग्रामसभा में स्कूल परिसर का मुआयना करने, वन विभाग की गश्त बढ़ाने और सुरक्षा दीवार का काम फौरन पूरा करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
दीवार का काम पूरा होने तक गांव वालों की मांग है कि वन विभाग इलाके में नियमित गश्त बढ़ाए, जरूरी जगहों पर कैमरा ट्रैप लगाए और बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्थायी इंतजाम करे। मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर है, फिर भी दीवार चार साल से अधूरी है, इसलिए प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। अब उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग फौरन ध्यान देकर दीवार पूरी करेगा और बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।
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