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03:56 IST

चंद्रपुर में माता महाकाली महोत्सव की शुरुआत, पालखी समारोह में शामिल हुए विधायक जोरगेवार

एकोरी वार्ड के एकविरा माता मंदिर से निकली पालखी के साथ गुरुवार सुबह महोत्सव का शुभारंभ हुआ।

चंद्रपुर में माता महाकाली महोत्सव की शुरुआत, पालखी समारोह में शामिल हुए विधायक जोरगेवार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर में श्री माता महाकाली महोत्सव की शुरुआत गुरुवार, 15 अक्टूबर की सुबह भक्ति भरे माहौल में हुई। एकोरी वार्ड के एकविरा माता मंदिर से निकली पालखी के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ।

विधायक किशोर जोरगेवार अपनी पत्नी के साथ इस पालखी समारोह में शामिल हुए और माता के दर्शन किए। यानी विधायक ने सपत्नीक माता के दर्शन किए। उन्होंने माता महाकाली के चरणों में नतमस्तक होकर दर्शन लिए। श्रद्धा, भक्तिभाव और चंद्रपुर की धार्मिक परंपरा से जुड़ाव को निभाते हुए जोरगेवार ने इस आयोजन में हिस्सा लिया।

एकोरी वार्ड के एकविरा माता मंदिर से निकली माता महाकाली की पालखी शहर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए सबसे पहले विधायक किशोर जोरगेवार के राजमाता निवास पहुंची। इसके बाद जैन मंदिर के रास्ते से पालखी रथ माता महाकाली मंदिर में दाखिल हुआ। इस दौरान भी विधायक जोरगेवार पत्नी के साथ पालखी समारोह में शामिल रहे और माता के दर्शन किए। उनके शामिल होने से इस धार्मिक आयोजन को खास अहमियत मिली।

श्री माता महाकाली महोत्सव चंद्रपुर के लोगों की श्रद्धा और धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है। हर साल इस महोत्सव के मौके पर माता महाकाली के दर्शन के लिए भक्तों की बड़ी भीड़ जुटती है। पालखी समारोह के जरिए शहर की धार्मिक परंपरा, भक्तिभाव और सांस्कृतिक विरासत को सहेजा जाता है। इस परंपरा को बचाए रखने और आगे बढ़ाने की भावना से विधायक किशोर जोरगेवार का पत्नी सहित शामिल होना अहम रहा।

माता महाकाली के जयघोष और भक्ति भरे माहौल से पालखी के पूरे रास्ते पर उत्साह रहा। पालखी रथ के मंदिर पहुंचने के बाद भक्तों ने माता महाकाली के चरणों में नतमस्तक होकर दर्शन किए। इस पालखी समारोह के साथ श्री माता महाकाली महोत्सव के धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं और चंद्रपुर शहर में भक्ति और धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।

कुल मिलाकर, गुरुवार सुबह एकोरी वार्ड के एकविरा माता मंदिर से शुरू हुआ पालखी का सफर शहर के अलग-अलग रास्तों, राजमाता निवास और जैन मंदिर के रास्ते से होता हुआ माता महाकाली मंदिर पहुंचा। चंद्रपुर की धार्मिक परंपरा का यह समारोह भक्तों के लिए श्रद्धा का हिस्सा माना जाता है, और इसी श्रद्धा के बीच महोत्सव की शुरुआत हुई।

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