नवरात्र पर प्राप्ती रेडकर बोलीं, अपने लिए डटकर खड़े होना ही असली स्त्रीशक्ति
अभिनेत्री प्राप्ती रेडकर ने नवरात्रि के मौके पर स्वाभिमान, आत्मविश्वास और खुद की हिफाजत की बात की और मालाड स्टेशन का अपना वाकया सुनाया।
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नवरात्र स्त्रीशक्ति के जागर और देवी के अलग-अलग रूपों को नमन करने का त्योहार है। इस दौरान देवी की पूजा के साथ उनके साहस, आत्मविश्वास और अन्याय से लड़ने की ताकत को भी खास तौर पर याद किया जाता है। पर अभिनेत्री प्राप्ती रेडकर का मानना है कि असली स्त्रीशक्ति सिर्फ देवी की आराधना तक सीमित नहीं है। वह अपने हक के लिए मजबूती से खड़े होने और स्वाभिमान से जीने में भी है।
प्राप्ती झी मराठी के धारावाहिक 'सावळ्याची जणू सावली' में सावली का किरदार निभा रही हैं। नवरात्रि के मौके पर उन्होंने खुद की हिफाजत की अहमियत बताई और हर औरत से कहा कि वह अपनी जिंदगी की नायिका बने।
प्राप्ती के हिसाब से स्त्रीशक्ति का मतलब है अपना स्वाभिमान संभालकर रखना और अपने लिए सही फैसला लेना। कोई बात ठीक न लगे तो उसके खिलाफ आवाज उठाना और अपने निर्णयों पर टिके रहना जरूरी है, यह उनकी राय है। उनका कहना है कि आज हर महिला को खुद को बचाने की जानकारी होनी चाहिए। हर लड़की कराटे या मार्शल आर्ट सीखे ही, ऐसा जरूरी नहीं, लेकिन मुसीबत के वक्त अपनी हिफाजत कैसे करनी है, इसकी समझ हर महिला में होनी चाहिए।
नवरात्रि के मौके पर उन्होंने हर महिला और लड़की को अपना ख्याल रखने और किसी भी हाल में हिम्मत न हारने का संदेश दिया है। उनके मुताबिक अपने साथ कुछ गलत हो रहा हो तो उसका विरोध करें और अपने लिए हिम्मत से लड़ें। जिंदगी में क्या करना है, कैसे जीना है और कौन से फैसले लेने हैं, यह तय करने का हक हर औरत को है। इसलिए अपनी जिंदगी के फैसले दूसरों को न लेने दें, अपनी जिंदगी की नायिका बनें और आत्मविश्वास से जिएं, यह अपील प्राप्ती ने की है।
प्राप्ती 2022 से मार्शल आर्ट सीख रही हैं। फिलहाल धारावाहिक की शूटिंग में व्यस्त होने की वजह से उनकी प्रैक्टिस रुकी हुई है। फिर भी उन्होंने बताया कि मार्शल आर्ट सीखने से पहले और बाद में उन्हें खुद में बड़ा फर्क महसूस हुआ। पहले कोई जानबूझकर गलत बर्ताव करता या धौंस दिखाने की कोशिश करता, तो उन्हें बेचैनी होती थी। उस वक्त सामने वाले का विरोध करने का भरोसा उनमें नहीं था। मगर मार्शल आर्ट सीखने के बाद खुद के लिए खड़े होने की हिम्मत और आत्मविश्वास बढ़ा, ऐसा वे कहती हैं।
प्राप्ती ने एक वाकया भी सुनाया, जिससे उन्हें अपने भीतर की स्त्रीशक्ति का एहसास हुआ। उन्होंने बताया कि मालाड स्टेशन पर एक लड़के ने जानबूझकर गलत तरीके से उन्हें छुआ। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि वह कौन था। लेकिन कुछ देर बाद वह उसी इरादे से फिर उनकी तरफ आता दिखा। तब प्राप्ती ने उसका कॉलर पकड़कर जोरदार विरोध किया। इसके बाद वह माफी मांगने लगा और वहां से भाग गया।
यह वाकया उनके लिए अहम रहा, क्योंकि उस पल उन्हें अपनी ताकत और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की अपनी क्षमता का एहसास हुआ। इसीलिए वे कहती हैं कि हर लड़की और महिला के पास कम से कम खुद को बचाने लायक जानकारी जरूर होनी चाहिए।
प्राप्ती के लिए नवरात्र सिर्फ देवी की आराधना का वक्त नहीं है, यह खुशी और उत्साह से त्योहार मनाने का मौका भी है। उनकी नानी के घर के पास सार्वजनिक नवरात्र उत्सव मनाया जाता है। इसमें बच्चों के खेल, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं, गरबा, फैंसी ड्रेस गरबा और पाककला प्रतियोगिता जैसे कई कार्यक्रम होते हैं। दोस्तों के साथ इनमें हिस्सा लेते हुए नवरात्रि के दिन कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता, वे बताती हैं।
इसके अलावा अलग-अलग नवरात्र मंडलों से आए न्योते पर वे देवी के दर्शन के लिए भी जरूर जाती हैं। नौ दिनों में देवी के दर्शन से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा और उत्सव का उत्साह उन्हें खास पसंद है।
नवरात्रि के मौके पर प्राप्ती रेडकर का दिया संदेश हर महिला को अपनी ताकत का एहसास कराने वाला है। स्वाभिमान संभालना, गलत बातों का विरोध करना, अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना और आत्मविश्वास से जिंदगी के फैसले लेना, उनके विचारों में यही असली स्त्रीशक्ति है।