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19:53 IST

चंद्रपुर में महाकाली महोत्सव शुरू, 51 फुट का ध्वज फहराया; सूखे के चलते गायन कार्यक्रम रद्द

घटस्थापना के दिन श्री माता महाकाली मंदिर में ध्वजारोहण के साथ महोत्सव की शुरुआत हुई। राज्य की सूखे जैसी हालत को देखते हुए मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं होंगे, धार्मिक परंपराएं जारी रहेंगी।

चंद्रपुर में महाकाली महोत्सव शुरू, 51 फुट का ध्वज फहराया; सूखे के चलते गायन कार्यक्रम रद्द तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर में माता महाकाली महोत्सव 2026 की शुरुआत घटस्थापना के मौके पर 51 फुट ऊंचे ध्वज के विधिवत ध्वजारोहण से हुई। रविवार, 11 अक्टूबर को श्री माता महाकाली मंदिर में यह समारोह हुआ। महोत्सव का आयोजन श्री माता महाकाली महोत्सव ट्रस्ट कर रहा है।

ध्वजारोहण के मौके पर विधायक किशोर जोरगेवार ने चांदी की मूर्ति के दर्शन किए। इसके बाद माता की पालकी निकाली गई। राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए इस बार महोत्सव के मनोरंजन वाले कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। धार्मिक परंपराएं और सामाजिक उपक्रम पहले की तरह ही चलते रहेंगे।

कार्यक्रम में मनीष महाराज, सुनिल महाकाले, राजु शास्त्रकार, अजय जयस्वाल, श्याम धोपटे, मिलिंद गंपावार, बलराम डोडाणी, प्रसाद जोरगेवार, संजू बुरघाटे, अरुण तिखे, सविता दंढारे और वंदना हातगावकर मौजूद थे। इनके साथ श्री महाकाली माता महोत्सव ट्रस्ट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में भक्त भी पहुंचे।

आयोजकों के मुताबिक महाराष्ट्र की सूखे जैसी हालत को ध्यान में रखकर मनोरंजन के कार्यक्रम रद्द करने का फैसला लिया गया है। इन कार्यक्रमों पर होने वाला खर्च बचाकर सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद करने का इरादा है। श्रद्धा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी में संतुलन रखते हुए महोत्सव की परंपरा निभाने पर जोर दिया गया है।

विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अपील के बाद यह फैसला हुआ है। उनके शब्दों में, "महाराष्ट्र की सूखे जैसी हालत में किसान भाइयों की तकलीफ और परेशानियों का ख्याल रखना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। इसीलिए मनोरंजन के कार्यक्रम रद्द करके उस खर्च से सूखाग्रस्त किसानों की मदद करने का फैसला लिया है। लेकिन माता महाकाली महोत्सव की धार्मिक परंपरा और समाज के काम आने वाले उपक्रम जारी रहेंगे। माता के आशीर्वाद से भक्ति, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की इस परंपरा को आगे ले जाने की हमारी कोशिश है।"

ध्वजारोहण के बाद चांदी की माता महाकाली मूर्ति की विधिवत पूजा हुई। फिर मूर्ति को पालकी में रखकर रथ तक शोभायात्रा निकाली गई। भजन-कीर्तन और बाजे-गाजे के बीच रथ को नितीन कुमरवार के घर ले जाया गया। इस साल चांदी की मूर्ति को घर ले जाकर भक्तों को दर्शन का मौका देने का पहला मान कुमरवार परिवार को मिला है।

नवरात्रि के दौरान माता महाकाली की चांदी की मूर्ति के घर-घर दर्शन कराने की परंपरा है। इसी के तहत मूर्ति को कुमरवार परिवार के घर विराजमान किया गया है। सोमवार, 12 अक्टूबर को मूर्ति नितीन कुमरवार के घर से बाजे-गाजे के साथ रामजीवन परमार के घर ले जाई जाएगी।

रद्द हुए कार्यक्रमों में 14 अक्टूबर से तय पांच दिन के महोत्सव के गायन कार्यक्रम शामिल हैं। इनमें भक्ति संगीत गायक गजेंद्र प्रताप सिंह, हेमंत ब्रिजवासी, चौतन्य देवढे और गायिका जयपिंदर नरुला की प्रस्तुतियां होनी थीं। राज्य में सूखे की गंभीरता को देखते हुए ये सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए।

वहीं धार्मिक परंपराएं और सामाजिक उपक्रम तय योजना के मुताबिक चलेंगे। इनमें 9999 कन्याओं का पूजन और भोजन, सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की कामना के साथ हरी चूड़ियां पहनाने का उपक्रम, और नवरात्रि के दौरान जन्मी कन्याओं को चांदी का सिक्का देना शामिल है। 19 अक्टूबर को नगर प्रदक्षिणा भी निकाली जाएगी।

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