रविवार, 11 अक्टूबर 2026

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19:13 IST

चंद्रपुर के महाकाली मंदिर में 51 फुट ऊंचे ध्वज का आरोहण, महोत्सव शुरू

शारदीय नवरात्र उत्सव की घटस्थापना पर चंद्रपुर के श्री माता महाकाली मंदिर में 51 फुट ऊंचे ध्वज का विधिवत ध्वजारोहण हुआ। सूखे को देखते हुए मनोरंजन के कार्यक्रम रद्द किए गए हैं, धार्मिक परंपराएं जारी रहेंगी।

चंद्रपुर के महाकाली मंदिर में 51 फुट ऊंचे ध्वज का आरोहण, महोत्सव शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर में शारदीय नवरात्र उत्सव की घटस्थापना के मौके पर रविवार, 11 अक्टूबर को श्री माता महाकाली मंदिर में 51 फुट ऊंचे ध्वज का विधिवत ध्वजारोहण किया गया। यह समारोह श्री माता महाकाली महोत्सव ट्रस्ट की ओर से आयोजित माता महाकाली महोत्सव 2026 के तहत हुआ। विधायक किशोर जोरगेवार मंदिर में मौजूद रहे। उन्होंने चांदी की माता महाकाली मूर्ति के दर्शन किए, जिसके बाद माता की पालकी निकली।

कार्यक्रम में मनीष महाराज, सुनिल महाकाले, राजु शास्त्रकार, अजय जयस्वाल, श्याम धोपटे, मिलिंद गंपावार, बलराम डोडाणी, प्रसाद जोरगेवार, संजू बुरघाटे, अरुण तिखे, सविता दंढारे और वंदना हातगावकर के साथ श्री महाकाली माता महोत्सव ट्रस्ट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे।

महाराष्ट्र के सूखे जैसे हालात को देखते हुए इस साल महोत्सव के मनोरंजन के कार्यक्रम रद्द करने का फैसला लिया गया है। इन कार्यक्रमों पर होने वाला खर्च बचाकर सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद करने का इरादा है। हालांकि महोत्सव की धार्मिक परंपराएं और सामाजिक कार्यक्रम पहले की तरह ही चलते रहेंगे। श्रद्धा, सेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता में संतुलन रखते हुए महोत्सव की परंपरा को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

इस बारे में विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अपील के बाद "महाराष्ट्र के सूखे जैसे हालात में किसान भाइयों की तकलीफों और दिक्कतों को समझना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। इसलिए मनोरंजन के कार्यक्रम रद्द करके उस खर्च से सूखा पीड़ित किसानों की मदद करने का फैसला लिया गया है। लेकिन माता महाकाली महोत्सव की धार्मिक परंपरा और समाज के लिए उपयोगी कार्यक्रम जारी रहेंगे। माता के आशीर्वाद से भक्ति, सेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता की इस परंपरा को आगे ले जाने की हमारी कोशिश है।"

ध्वजारोहण के बाद चांदी की माता महाकाली मूर्ति की विधिवत पूजा हुई। फिर मूर्ति को पालकी में रथ तक ले जाया गया। भजन-कीर्तन और बाजे-गाजे के साथ यह रथ नितीन कुमरवार के निवास पर पहुंचा। इस बार माता महाकाली की चांदी की मूर्ति घर ले जाकर भक्तों को दर्शन का मौका देने का पहला मान कुमरवार परिवार को मिला।

नवरात्र उत्सव के दौरान माता महाकाली की चांदी की मूर्ति के घर-घर दर्शन कराने की परंपरा है। उसी के अनुसार कुमरवार परिवार के निवास पर मूर्ति विराजमान की गई है। सोमवार, 12 अक्टूबर को नितीन कुमरवार के निवास से मूर्ति बाजे-गाजे के साथ रामजीवन परमार के निवास पर ले जाया जाएगा।

घटस्थापना के दिन 51 फुट ऊंचे ध्वज का आरोहण करके महोत्सव के धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई। सूखा पीड़ित किसानों के प्रति सामाजिक प्रतिबद्धता निभाते हुए मनोरंजन के कार्यक्रम रद्द किए गए हैं, फिर भी धार्मिक परंपराओं और समाज के लिए उपयोगी कार्यक्रमों के जरिए महोत्सव आगे बढ़ता रहेगा।

रद्द हुए कार्यक्रम: 14 अक्टूबर से तय पांच दिन के महोत्सव में भक्तिसंगीत गायक गजेंद्र प्रताप सिंह, हेमंत ब्रिजवासी, चौतन्य देवढे और गायिका जयपिंदर नरुला के भक्तिमय गायन के कार्यक्रम रखे गए थे। राज्य के सूखे जैसे हालात की गंभीरता को देखते हुए ये सभी कार्यक्रम रद्द करने का फैसला लिया गया।

जारी रहने वाले कार्यक्रम: महोत्सव की धार्मिक परंपराएं और सामाजिक कार्यक्रम पहले से तय रूप में चलेंगे। इनमें 9999 कन्याओं का पूजन और भोजन, सौभाग्यवती महिलाओं को अखंड सौभाग्य की कामना के साथ हरा चूड़ा भरने की पहल और नवरात्रि के दौरान जन्मी कन्याओं को चांदी का सिक्का बांटना शामिल है। 19 अक्टूबर को नगर परिक्रमा भी निकाली जाएगी।

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