शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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ब्रेस्ट कैंसर के बाद मां बनने की राह: इलाज से पहले फर्टिलिटी पर डॉक्टर से बात जरूरी

ब्रेस्ट कैंसर के बाद मां बनने की राह: इलाज से पहले फर्टिलिटी पर डॉक्टर से बात जरूरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

टीएलसी (द लॉन्जेविटी सेंटर) की संस्थापक डॉ. भावना शर्मा के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर के निदान का मतलब मातृत्व की उम्मीद खत्म होना नहीं है।

ब्रेस्ट कैंसर का इलाज शुरू होने से पहले ही भविष्य में मां बनने के बारे में सोच लेना युवा महिलाओं के लिए बहुत अहम है। खासकर जो महिलाएं आगे चलकर मां बनना चाहती हैं, उन्हें इलाज से पहले ही डॉक्टर से फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता बचाने के विकल्पों पर खुलकर बात करनी चाहिए। वजह यह है कि इलाज एक बार शुरू हो जाए तो कुछ विकल्प सीमित हो सकते हैं या मुमकिन है कि मिलें ही नहीं।

कैंसर का पता चलना, इलाज की फिक्र और उससे उबरने की चुनौती, इन सबके बीच युवा महिलाओं के मन में कई और जरूरी सवाल होते हैं। जैसे, क्या कैंसर के इलाज के बाद भी मैं मां बन पाऊंगी? ऐसे सवालों पर बात करना अक्सर मुश्किल होता है। टीएलसी (द लॉन्जेविटी सेंटर) की संस्थापक और प्रजनन चिकित्सा व आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी है।

डॉ. शर्मा के मुताबिक जिस महिला ने उम्र भर मां बनने का सपना देखा हो, उसके लिए ऐसे हालात का सामना करना बेहद भावनात्मक और कठिन हो सकता है। जब पूरा ध्यान कैंसर से लड़ने पर लगाना पड़ता है, तब मातृत्व के सपने और आगे के परिवार की योजना कुछ वक्त के लिए पीछे छूट सकती है। कैंसर का इलाज अक्सर फौरन शुरू करना जरूरी होता है, इसलिए गर्भधारण और बच्चे से जुड़ी योजनाएं टालनी पड़ती हैं। डॉ. शर्मा का कहना है कि कुछ महिलाओं को पहले से अंदाजा ही नहीं होता कि कीमोथेरेपी या दूसरे इलाज का असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। इलाज के दौरान माहवारी के चक्र में बदलाव दिखने लगता है, तभी उन्हें इस संभावित असर का एहसास होता है।

तो क्या ब्रेस्ट कैंसर के बाद सारी संभावनाएं खत्म हो जाती हैं? डॉ. शर्मा के मुताबिक ऐसा बिल्कुल नहीं है। कैंसर के इलाज और प्रजनन चिकित्सा में हुई तरक्की से अब महिलाओं के सामने ज्यादा विकल्प हैं। प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने के आधुनिक तरीके, इलाज पूरा होने के बाद गर्भधारण की सोची-समझी योजना और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, इन सबसे कुछ महिलाओं को परिवार बसाने की अपनी उम्मीद जिंदा रखने में मदद मिल सकती है। इसलिए निदान के बाद मातृत्व का सपना पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है।

डॉ. शर्मा ने कहा, "किसी युवा महिला को स्तन कैंसर का पता चलने के बाद इलाज की योजना के साथ उसकी प्रजनन क्षमता पर भी चर्चा होना बेहद जरूरी है। जो महिलाएं आगे मां बनने का अनुभव लेना चाहती हैं, उनके लिए यह मुद्दा और भी अहम है। निदान के बाद कई मरीजों का पूरा ध्यान कैंसर के इलाज पर होता है। लेकिन इस इलाज का प्रजनन स्वास्थ्य पर क्या असर हो सकता है, यह समझना भी उतना ही जरूरी है। इलाज शुरू करने से पहले प्रजनन विशेषज्ञ की सलाह ली जाए तो महिलाओं को भविष्य के मातृत्व के लिए मौजूद विकल्पों की जानकारी मिलती है और सोच-समझकर फैसला लेना मुमकिन होता है।"

डॉ. शर्मा के मुताबिक प्रजनन क्षमता बचाने का मतलब कैंसर का इलाज टालना नहीं है। इलाज शुरू होने से पहले जो वक्त मिलता है, उसमें प्रजनन क्षमता के लिए कोई विकल्प मुमकिन है या नहीं, यह जान लेना अहम है। इसके लिए कैंसर विशेषज्ञ और प्रजनन क्षमता के इलाज के विशेषज्ञ मिलकर सही मेडिकल योजना बनाएं, यह जरूरी है।

गलतफहमी के बारे में डॉ. शर्मा ने कहा कि किसी भी महिला को यह नहीं मान लेना चाहिए कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद मां बनने की इच्छा पूरी नहीं हो सकती। हालांकि गर्भधारण का फैसला सिर्फ अंदाजे या आम जानकारी के भरोसे करना ठीक नहीं होगा। उनके मुताबिक इसके लिए सही योजना और विशेषज्ञों की सलाह बहुत जरूरी है। गर्भधारण का सही वक्त क्या हो और चल रही दवाओं में कोई बदलाव करना पड़ेगा या नहीं, इस पर संबंधित ऑन्कोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से विस्तार से बात की जानी चाहिए। डॉ. शर्मा के अनुसार पूरी प्रक्रिया में महिला की सेहत और सुरक्षा के साथ उसकी मातृत्व की इच्छा और परिवार की योजना का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।

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